जय श्री कृष्णः.श्री कृष्ण शरणं मम.श्री कृष्ण शरणं मम.चिन्ता सन्तान हन्तारो यत्पादांबुज रेणवः। स्वीयानां तान्निजार्यान प्रणमामि मुहुर्मुहुः ॥ यदनुग्रहतो जन्तुः सर्व दुःखतिगो भवेत । तमहं सर्वदा वंदे श्री मद वल्लभ नन्दनम॥ जय श्री कृष्णः

सोमवार, 24 मई 2010

राहू-काल का हमारें जीवन में दैनिक उपयोग....


आज के समय प्रत्येक व्यक्ति की यही इच्छा रहती हैं कि उसके कार्य में कहीं कोई भी रूकावट न आये.इस हेतु वह प्रयास भी करता हैं, अपनी आस्था के अनुसार वह उपाय भी करता हैं. समय कि गति बहुत ही बलवान हैं, हम क्या शास्त्र भी कहते हैं कि समय को हमेशा याद करो. समय को कसें याद करें या समय का केसे सदुपयोग करें. आज ज्योतिष के आधार पर यह जानें कि किस समय समय शुभ हैं व किस समय समय की गति अशुभ चल रही हैं
.
समय के दो पहलू हैं पहले प्रकार का समय व्यक्ति को ठीक समय पर काम करने के लिए कहता हैं. तो दूसरा समय उस काम को किस समय करना चाहिए इसका ज्ञान कराता हैं. समय हमारा मार्गदर्शक की तरह काम करता हैं.

ज्योतिष में राहू-काल के रूप में प्रतिष्ठित एक समय जिसकी जानकारी आज में यहाँ पर देने जा रहा हूँ. राहू-काल के समय कोई भी शुभ काम नहीं किया जाना चाहिए. अनुभव में आया हैं की इस समय कार्य करने से उसमें नाना प्रकार के व्यवधान उत्पन्न होते हैं. राहू-काल का प्रचलन दक्षिण भारत में अधिक हैं.
यह सप्ताह के सातों दिन निश्चित समय पर लगभग डेढ़ घंटा रहता हैं.इसे अशुभ समय के रूप में देखा जाता हैं.इसी कारण राहू-काल में शुभ कर्मो को यथा संभव टाल दिया जाता हैं.

राहू-काल दिन के आठवें भाग का नाम हैं. सामान्यतः दिन का आरम्भ प्रात: ६:०० बजे से शाम के ६:०० बजे तक माना गया हैं. १२ घंटो को बराबर ८ भागो में बांटा गया हैं.प्रत्येक भाग डेढ़ घंटे का होता हैं. जिसे ज्योतिष शास्त्र अनुसार राहू-काल कहते हैं. एक दम सही भाग निकालने के लिए स्थानीय सूर्य उदय व सूर्यास्त के समय की दूरी को आठ भागो में बाँट कर एक भाग राहू-काल का निश्चित होता हैं.

सप्ताह के प्रत्येक दिवस के अनुसार राहू-काल का समय सामान्यतः निम्न प्रकार से हैं. इसे हमेशा स्मरण रखें. कोई भी शुभ कार्य करने के लिए इस भाग को त्याग दें.



१-                सोमवार – प्रात: ०७:३० बजे से ०९:०० बजे तक.

२-               मंगलवार – दोपहर ०३:०० बजे से ०४:३० बजे तक.

३-               बुधवार – दोपहर १२:०० बजे से दोपहर ०१:३० तक.

४-              वृहस्पतिवार – दोपहर ०१:३० से दोपहर ०३:०० बजे तक.

५-              शुक्रवार – प्रात: १०:३० बजे से दोपहर १२:०० बजे तक.

६-               शनिवार – प्रात: ०९:०० बजे से प्रात: १०:३० बजे तक.

७-              रविवार – सांयकाल ०४:३० बजे से सांयकाल ०६:०० बजे तक.

राहू-काल के समय किसी नए काम को शुरू नहीं किया जाता हैं. परन्तु जो काम इस समय से पहले शुरू हो चुका हैं उसे राहू-काल के समय बीच में नहीं छोढा जाता है, अशुभ कामों के लिये इस समय का  विचार नहीं किया जाता है 


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

कृपया अपने प्रश्न / comments नीचे दिए गए लिंक को क्लिक कर के लिखें

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails

लिखिए अपनी भाषा में