जय श्री कृष्णः.श्री कृष्ण शरणं मम.श्री कृष्ण शरणं मम.चिन्ता सन्तान हन्तारो यत्पादांबुज रेणवः। स्वीयानां तान्निजार्यान प्रणमामि मुहुर्मुहुः ॥ यदनुग्रहतो जन्तुः सर्व दुःखतिगो भवेत । तमहं सर्वदा वंदे श्री मद वल्लभ नन्दनम॥ जय श्री कृष्णः

सोमवार, 28 जून 2010

वास्तु के चमत्कारी प्रयोग भाग 1..

श्री राम चरित मानस में गोस्वामी तुलसी दास जी ने लिखा है होई है सो ही जो राम रचि रखा लेकिन उसी श्री राम चरित मानस में गोस्वामी जी ने यह भी लिखा है कि.ग्रह भेषज जल पवन पट पाई कुयोग्य सुयोग्य.होहिं कुवस्तु सुवस्तु जग लख है सुलछन लोग अर्थात ग्रह चलते है ओर मनुष्य के ऊपर सुख-दुःख उसके पिछले कर्मों के अनुसार उसे प्राप्त होते है यदि कुछ वस्तुओं में स्थान बदलने से बुरे को अच्छे में बदला जा सकता है.तभी ज्योतिष से लाभ उठाया जा सकता है. वास्तु शास्त्र अनुसार केवल भवन निर्माण में ही वास्तु के नियम अपना कर इति श्री ना करें.बल्कि घर में वस्तुओं को भी शास्त्र के अनुसार ही रखे.घर में स्थित वस्तुओं को यदि नियम अनुसार न रखा जाए तो भारी दोष होने लगता है तब आरोप वास्तु पर लगाने लगते है घर में स्थित वस्तुओं का प्रभाव भवन के वास्तु से भी ज्यादा होता है.यहाँ तक की यदि घर के निर्माण में कोई त्रुटि भी रह जाए तो शास्त्र कहता है कि उसे वस्तुओं के द्वारा ठीक कर सकते है
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गोस्वामी श्री तुलसी दास जी ने यह भी स्वीकार किया है कि ग्रह एवम वास्र्तु मनुष्य के जीवन को प्रभावित करते है. इसलिए भाग्य को वास्तु के सहारे एवम ज्योतिष के नियमों के अनुसार बदलने का प्रयत्न करना चाहिए केवल हाथ पर हाथ धरे बैठे रहने से भाग्य कभी भी नहीं बदलता है.

उसी वास्तु के नियम में शृंखला बढ आपके सामने रख रहा हूं जिसके करने से आप वास्तु के दोष तो दूर करोगे ही साथ ही भाग्य भी खोल सकने में समर्थ होंगे.

घर का ओवर हैड टैंक ईशान कोण व आग्नेय कोण में ना लगाए.

घर की नीवं की खुदाई कभी भी दक्षिण-पश्चिम से ना आरम्भ करे.

आवासीय कमरों की कोई भी भुजा घर के स्वामी या मुखिया का हाथ के नाप से कम से कम सात हाथ या इससे अधिक रखें.

भूमि खरीदते समय देखें कि उस क्षैत्र की ढाल पूर्व की ओर हो.

ऑफिस टेबल पर क्रिस्टल की कोई भी आकृति रखने से कार्य क्षमता बडती है तथा व्यापार में लाभ होता है.
ऑफिस की टेबल के ऊपर काले रंग का कांच नहीं लगाना चाहिए यह आपके कार्य को असफल करता है.

ऑफिस या दूकान के ईशान भाग में भारी सामान ना रखें.

कोई भी नुकीली चीज किसी को उपहार में नहीं देनी चाहिए.मित्रता समाप्त होती है.

दूकान में तराजू पश्चिम या दक्षिण की ओर रखनी चाहिए.

घर या ऑफिस के अन्दर अनावश्यक वस्तुएं संभाल कर नहीं रखनी चाहियें यह धनात्मक उर्जा को रोक कर नकारात्मक उर्जा की वृद्धि करते है.

यदि व्यापार में लाभ ना हो रहा हो तो उत्तरी क्षैत्र में खिडकी या दरवाजा बनवाएं ओर दक्षिण क्षैत्र की खिडकी या दरवाजा बंद करें. तो आशातीत लाभ होने लगेगा.

चार दीवारी टूटी फूटी नहीं रहनी चाहिए इसे दक्षिण ओर पश्चिम में पूर्व से ऊँची रखनी चाहिए.ऐसे करने से घर में सुख संपदा का आगमन होने लगता है..


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