जय श्री कृष्णः.श्री कृष्ण शरणं मम.श्री कृष्ण शरणं मम.चिन्ता सन्तान हन्तारो यत्पादांबुज रेणवः। स्वीयानां तान्निजार्यान प्रणमामि मुहुर्मुहुः ॥ यदनुग्रहतो जन्तुः सर्व दुःखतिगो भवेत । तमहं सर्वदा वंदे श्री मद वल्लभ नन्दनम॥ जय श्री कृष्णः

बुधवार, 2 जून 2010

वास्तु में पर्स की भूमिका..........





आखिर पर्स का ही वास्तु क्यों? क्योंकि मेरे विचार से हम सब के जीवन में पर्स एक महत्वपूर्ण भूमिका रखता है. जैसे मासिक वेतन मिला तो गया पर्स में अर्थात पूरे महीने की आमदनी को हमने पर्स के हवाले कर दिया. वस्तुओं के खरीद-फरोख्त में भी पर्स सामने आता है किसी वस्तु को खरीदने से नुक्सान हुआ तो किसी में फायदा हुआ या कभी पर्स पाकेटमार ने पार कर दिया तो कभी पर्स में रखे धन की बरकत खत्म हो जाती है सुबह रुपये रखो और शाम आते ही पर्स खाली. इन्हीं बातो को ध्यान में रख कर यदि हम पर्स को वास्तु के नियमों के अनुसार रखे तो हमे पर्स के द्वारा भी बरकत मिल सकती है और धन के नुक्सान से बच सकते है.

आज का युग ऐसे दौर से गुजर रहा है जिसमें कि प्रत्येक व्यक्ति जल्द से जल्द अपनी समस्त महत्वाकांक्षा को पूरा करना चाहता है तथा उस उद्देश्य की पूर्ति को प्राप्त करने के लिए वह सारे यत्न भी करता है वास्तु को ही लें तो आज कल सभी जानते है कि वास्तु का प्रयोग प्रत्येक क्षेत्र में होने लगा है जैसे घर का वास्तु, ऑफिस का वास्तु, दूकान का वास्तु, आपकी कार का वास्तु आदि-आदि. क्या कभी किसी ने यह विचार किया कि जो वस्तु हमेशा हमारे पास होती है वह पर्स का वास्तु क्यों नहीं ?


आज विज्ञान नए नए आविष्कार कर हमारी कल्पनाओं को साकार करने में अग्रसर है तो वास्तु शास्त्र में भी रहस्य छुपे है आवश्यकता है इन्हें समझ कर निकालने की और समाज की भलाई हेतु उसका प्रयोग कर उनकी इच्छाओं की पूर्ती करें. जिस प्रकार हमारे आस-पास का वातावरण या विशेष वस्तुएँ हमारें जीवन को प्रभावित करती है.उसी तरह से हमारा पर्स भी अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने में सक्षम है.


 एक जमानें में तिजौरी का घर,दूकान आदि में बड़ा महत्व होता था क्यों ? क्योंकि वही एकमात्र धन को संग्रह करने का स्थान था. समय बीता और तिजौरी का स्थान धीरे धीरे हटने लगा,परिणाम स्वरूप आज तिजौरी बहुत कम यदा-कदा ही मिलती है. वास्तु में तिजौरी का वर्णन मिलता है. पिछले कई वर्षो से पर्स का चलन बड़ने लगा है और पर्स महिलाओं के हाथ में होना एक फैशन का रूप भी बन गया है. पुरुष वर्ग भी पर्स के बिना धन नहीं रखते. मेरे अनुभव में तिजौरी और पर्स में कोई विशेष अन्तर नहीं रहा. दैनिक कार्यों में पर्स की महत्ता ज्यादा है,
आपके पर्स का आकार, रंग आपके पर्स में रखे हुए सामान आपके जीवन में होने वाली छोटी से छोटी घटना के सूचक होते है. आज मै पर्स रखने के वास्तु शास्त्र के नियम आपके सामने रख रहा हूं.

          मेष,सिंह, और धनु राशि वाले अपना पर्स लाल या नारंगी रंग का रखे. तो लाभ होगा.
        वृष,कन्या, और मकर राशि वालों को भूरे रंग का पर्स तथा मटमैले रंग का पर्स बहुत फायदा पंहुचायगा.
        मिथुन,तुला, और कुम्भ राशि वाले यदि नीले रंग व सफ़ेद रंग का प्रयोग करते है    तो मानसिक स्थति के साथ साथ धन के के आगमन के रास्ते भी खुलेंगे.

        कर्क,वृश्चिक, और मीन राशि को तो हमेशा हरा रंग और सफ़ेद रंग का प्रयोग अपने पर्स में करना लाभदायक रहेगा.
        रात्री में सोते समय पर्स कभी भी सिरहाने ना रख कर उसे हमेशा अलमारी में रखें.
         पर्स में रूपये कभी भी मोड या फोल्ड कर ना रखे.
        पर्स में कभी भी रुपयों के साथ कोई बिल-रसीद या टिकट ना रखे इससे विवाद बड़ता है .
        पर्स में सिक्कों की व्यवस्था अलग हो तथा बंद कर के रखें पर्स खोलते समय सिक्का नीचे नहीं गिरना चाहिये.इससे अपव्यय बढता है.
         पर्स में चाबी को ना रखें.
१०      शौच के समय या शौचालय में पर्स आगे वाली जेब में रखे.
११       प्रत्येक जन्म दिवस पर अपने पर्स में एक नोट (छोटा या बड़ा) पर अपने पिता या माता के हाथों से केसर का तिलक लगा कर पूरे वर्ष के लिए रख दे. अगले जन्म दिवस पर किसी कन्या को दें.पुन:माता या पिता से तिलक करवा कर वर्ष हेतु रख लें.
१२      अपने पर्स में किसी पूर्णिमा को लाल रेशमी कपडे में चुटकी भर या २१ दाने अखंडित चावल बाँध कर छुपा कर रखने से बेवजह खर्च नहीं होता है.
१३      यदि पर्स कभी फट या कट जाय तुरंत बदल दें.
१४      यदि कर्ज का ब्याज देना हो तो वह रूपये पर्स में भूल कर भी ना रखे . रखोगे तो कर्ज नहीं उतरेगा. बल्कि और चड़ने की संभावना रहेगी.
१५      पर्स बायीं जेब में रखना अति शुभ माना गया है.
पर्स में कभी भी बीड़ी/सिगरेट या गुटखा आदि ना रखें.



इन सब बातों का ध्यान रख कर पर्स से समृधी प्राप्त कर सकते है.





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