जय श्री कृष्णः.श्री कृष्ण शरणं मम.श्री कृष्ण शरणं मम.चिन्ता सन्तान हन्तारो यत्पादांबुज रेणवः। स्वीयानां तान्निजार्यान प्रणमामि मुहुर्मुहुः ॥ यदनुग्रहतो जन्तुः सर्व दुःखतिगो भवेत । तमहं सर्वदा वंदे श्री मद वल्लभ नन्दनम॥ जय श्री कृष्णः

शनिवार, 5 जून 2010

पड़ोसियों से वास्तु द्वारा सम्बन्ध मधुर करें..


कहतें है कि अच्छा पड़ोसी बड़े भाग्य से मिलता है.सुख-दुःख के समय सगे सम्बन्धी तथा रिश्तेदार तो बाद में पहुँचते है या एन वक्त पर अपनी हाजिरी देते है लेकिन पड़ोसी ही समय पर काम आता है.किसी अज्ञात महापुरूषों का कहना है कि यदि पड़ोसी अच्छा व आपसे उसके मधुर सम्बन्ध है तो समझ लें कि आप सोभाग्यशाली है.
 क्या आपका पड़ोसी अच्छा है? क्या आपके सम्बन्ध उससे अच्छें है? क्या वह आपके सुख-दुःख में शामिल होता है? क्या आप भी पड़ोसी धर्म में कुशल है? यदि हां तो आप सचमुच बड़े भाग्यशाली है यदि नहीं तो आईए वास्तु शास्त्र का सहारा लें और अपने पड़ोसी से सम्बन्ध सुधार कर समाज में अपनी प्रतिष्ठा बनाएँ.

वास्तु शास्त्र में आठ दिशाओं का अत्यंत महत्व है इन्हीं आठ दिशाओं को यदि हम ठीक या इनके स्वामी को प्रसन्न कर ले तो हमें जीवन में किसी भी प्रकार का अभाव नहीं होगा तथा हमारें जीवन के प्रत्येक कार्य समय अनुसार व प्रसन्नतापूर्वक संपन्न होते जायंगे यही हमारे जीवन की उपलब्धि होगी.

वास्तु शास्त्र के नियम अनुसार पड़ोसी का स्थान हमारे घर में वायव्य अर्थात उत्तर-पश्चिम में होता है और वायव्य दिशा के कोण का स्वामी चन्द्रमा है. हमारे परिवार में चन्द्र से सम्बंधित वस्तुएं भली प्रकार से व्यवस्थित होनी चाहिए. घर में अपनी माता को पूर्ण आदर सम्मान दें. प्रतिदिन भगवान शिव कि पूजा तथा शिव लिंग की अर्चना करें.

प्रत्येक उत्सव तथा त्यौहार आदि में पड़ोसियों को मिष्ठान आदि देकर आमंत्रित करें तथा सुबह उठ कर अपनें घर के मुख्य द्वार पर पानी का छिड़काव लगानें से भी पड़ोसी के साथ सम्बन्ध मधुर बनतें है.....  

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