जय श्री कृष्णः.श्री कृष्ण शरणं मम.श्री कृष्ण शरणं मम.चिन्ता सन्तान हन्तारो यत्पादांबुज रेणवः। स्वीयानां तान्निजार्यान प्रणमामि मुहुर्मुहुः ॥ यदनुग्रहतो जन्तुः सर्व दुःखतिगो भवेत । तमहं सर्वदा वंदे श्री मद वल्लभ नन्दनम॥ जय श्री कृष्णः

रविवार, 6 जून 2010

वास्तु एक वैज्ञानिक धारणा

मनुष्य के जीवन को दो चीजें प्रभावित करती है एक भाग्य, दूसरा वास्तु. ५० प्रतिशत भाग्य तथा ५० प्रतिशत वास्तु अगर आपके ग्रह अच्छे है और वास्तु ठीक नहीं हो तो आपकी मेहनत का फल आधा ही मिलेगा. अर्थात यदि वास्तु शास्त्र के अनुसार निवास किया जाए तो सभी के भाग्य की स्थिति बदल सकती है वास्तु का तात्पर्य है की हमारें जीवन का ऐसा घर या मकान जिसमें रहने से सुख की अनुभूति हो अमेरिका तथा यूरोप आदि देश भी आज वास्तु के मार्ग दर्शन पर चल रहे है हांगकांग तथा बैंकॉक का निर्माण वास्तु के द्वारा होने से वो आज विश्व के बाज़ार में अग्रणी है ये है वास्तु का चमत्कार.


ब्रह्माण्ड में करोड़ो गैलेक्सिया है तथा एक गैलेक्सी में खरबों सितारे होते है उनमे सूर्य भी एक है ग्रहों का सम्बन्ध सूर्य से है और कॉस्मिक से भी होता है.ये सब के सब ग्रह आदि एनर्जिक फील्डपैदा करते है.और इन सबकी पृथ्वी में प्रवेश करने की अलग अलग दिशायें निर्धारित है कोस्मिक पावर व सेटेलाइट पावर रेडिएशन पृथ्वी पर उत्तर-पूर्व कोण अर्थात ईशान्य कोण से प्रवेश करती है सूर्य की अल्ट्रावायलेट रेंज जब पानी में घुलती है तो पानी अमृत सा बन जाता है.

सूर्य में थर्मों न्यूक्लियर रिएक्शन से थर्मल एनर्जी पैदा होती है जो अग्नि बनती है तथा इसका प्रवेश पृथ्वी पर पूर्व-दक्षिण दिशा अर्थात अग्नि कोण से होता है. जब हम इस धरती पर अपने रहने के लिए मकान दूकान फैक्ट्री आदि का निर्माण करते है तो उसमे कॉस्मिक पावर से कॉस्मिक एनर्जी फील्ड बनता है जिसे हमारा शास्त्र वास्तु के नाम से प्रतिष्ठित करता है और वह वास्तु एनर्जी भी कहलायीं जाती है. पृथ्वी की चुम्बकीय शक्ति इलेक्ट्रिक मेग्नेटिकरेंज – कॉस्मिक रेडिएशन – स्टेलर स्पेस के रेडिएशन ये सब मिल कर कास्मिक एनर्जी के रूप में भूखण्ड में उत्तर-पूर्व दिशा में प्रवेश कर दक्षिण-पश्चिम दिशा की तरफ निरन्तर चलते रहते है इन दिशाओं से टकरा कर पुनःबाओ एनर्जी के रूप में उत्तर पूर्व की तरफ लोटते है और यही बाओ एनर्जी मध्य ब्रह्म स्थान पर एकत्रित हो जाती है

अगर भूमि का आकार टेड़े मेडे या कोई विकृति हो तो यह एनर्जी कमजोर अवस्था में यंहा इस मध्य भाग पर इकट्ठी हो जाती है जिससे घर में अशांति का वातावरण बनने लगता है अब यदि यह बायो एनर्जी सामान अनुपात में रहती है तो निरोगता,खुशहाली तथा एश्वर्य को देने वाली होती है


यही वास्तु शास्त्र की वैज्ञानिकता है.










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