जय श्री कृष्णः.श्री कृष्ण शरणं मम.श्री कृष्ण शरणं मम.चिन्ता सन्तान हन्तारो यत्पादांबुज रेणवः। स्वीयानां तान्निजार्यान प्रणमामि मुहुर्मुहुः ॥ यदनुग्रहतो जन्तुः सर्व दुःखतिगो भवेत । तमहं सर्वदा वंदे श्री मद वल्लभ नन्दनम॥ जय श्री कृष्णः

गुरुवार, 24 जून 2010

दर्पण आपके भाग्य का द्वार खोलने में सहायक

आपको को यदि कोई कहे कि अपनी फैक्ट्री को या दूकान या व्यवसायिक स्थल केवल इसलिए न बेचें क्योंकि इसमें घाटा हो रहा है वास्तु शास्त्र के अनुसार आप उत्तर-पूर्व अर्थात ईशान कोण में दर्पण लगा दो और फिर चमत्कार देखों कि किस प्रकार हमारे कार्य में उन्नति होती है.दर्पण के सामने जब कोई व्यक्ति आता है तो दर्पण उसे गरमा अर्थात वार्म अप कर देता है. इससे सकारात्मक उर्जा (पाजिटिव-पावर) बनती है इसी कारण से यदि दर्पण ईशान कोण में लगाया जाता है तो मातृ पक्ष पैदा होता है घर के फर्श पर गरमाई उत्पन्न होती है आय व धन के नए साधन भी जुटते है इसी के कारण नकारात्मक उर्जा (नेगेटिव-पावर) खत्म हो जाति है. हल्का और बड़े आकार का दर्पण अति लाभदायक सिद्ध होता है.

 इतना हमेशा याद रखें कि उत्तर की दीवार पर दर्पण गोल नहीं लगाना चाहिए आयताकार या वर्गाकार ही लगाने से लाभ होता है.

दर्पण चाहे आईने के रूप में हो या चमकीले फर्श के, चमकीली धातु या किसी अन्य पदार्थ जिसमे प्रतिविम्ब बने, काल्पनिक रूप से प्रतिविम्बित क्षैत्र बड़ा देता है चमकीला फर्श या छत का दर्पण गहराई को काल्पनिक रूप से बड़ाता है यह बड़ा रूप लाभ देगा या हानि, यह निर्भर करता है कि दर्पण कहाँ लगा है दर्पण के आकार प्रकार की तरह ही उसके स्थान को भी दर्पण के प्रभाव से सीधा सम्बन्ध है.
यदि आपका मास्टर बैड रूम, अर्थात घर के मुखिया का शयन कक्ष दक्षिण-पश्चिम में है तो दक्षिण-पश्चिम की दीवार पर यदि दर्पण लगा है तो तब पश्चिम या दक्षिण की और काल्पनिक चित्र बनता है और बहुत हानिकारक होता है.

फैक्ट्री में भी दक्षिण-पश्चिम की दीवार पर लगा दर्पण व्यापार में घाटा लाता है इस दर्पण को तुरंत हटा दें या कागज लगा कर आवरण लगा दे. ऐसा करने से घाटे और कर्ज से भी बचे रहेंगे.

दक्षिण-पूर्व अर्थात अग्नि कोण में दर्पण लगाना ठीक नही होता इससे अग्नि लगने का भय या दुर्घटना की संभावनाए बनी रहती है.यहाँ से दर्पण हटा दें या फिर उस पर वाल पेपर लगा दें.

ईशान कोण की चर्चा पहले कर चुका हूं यहां पर दर्पण शुभ फलदायक होता है भारी लाभ की इच्छा हो तो ईशान कोण में हल्का तथा बड़ा दर्पण लगायें.   उत्तर-पश्चिम अर्थात वायव्य कोण में यदि दर्पण हो तो परिवार वैमनस्यता की और बढता है.

पूर्व की ओर के भाग में आधा भाग जो उत्तर की ओर जाता है यानी ईशान्य कोण की ओर वाले भाग में लगा दर्पण बहुत लाभ देता है, जबकि दक्षिण भाग का दर्पण नुक्सान वाला होता है.

ऐसे ही उत्तर की ओर के भाग में आधा भाग जो पूर्व की ओर है वहाँ पर दर्पण लाभ देता है जबकि पश्चिम की ओर लगाने से हानि के योग बनते है.

घर के मध्य भाग में दर्पण धन के नाश का रास्ता खोलता है इसे तुरंत ही हटा दे.

बेसमेन्ट के उत्तर-पूर्व (ईशान) कोण, उत्तर की पूर्व की ओर की आधी दीवार, पूर्व की उत्तर की ओर की आधी दीवार, उत्तर-पूर्व दोनों की ईशान कोण की दीवारों पर दर्पण लक्ष्मी को खींच लाने में समर्थ होते है. यहाँ पर धन बरसने लगता है.

पूर्व व उत्तर की ओर के कोने में अन्दर को अलमारी बना कर उसमे पूर्वी या उत्तरी खाने में कई दर्पण लगाने से भी लाभ बहुत अधिक होता है.

ईशान कोण कि जगह अर्थात जो उत्तरी ओर पूर्वी दीवारों के मिलने का स्थान है पर यदि ऐसे स्थान पर पूर्व की दीवार पर दर्पण लगाएगें तो सन्तान सुख मिलेगा और आपकी प्रसिद्धि बढेगी, मान-सम्मान भी बढता है. इसी कोण में यदि उत्तर की दीवार पर दर्पण लगायेगें तो धन समृद्धि बढेगी.

षट कोण व अष्ट कोण का दर्पण पूर्व-उत्तर की ओर लगाने से भारी धन लाभ होता है लक्ष्मी वहीं पर वास करने लगती है. एक बात अवश्य ध्यान रखे कि यही षट कोण व अष्ट कोण का दर्पण बाकी दिशाओं में हानि कारक रहेगा.

अष्ट कोण दर्पण को पैसेज/गलियारे में या ड्राइंग रूम में लगायेंयह आठों दिशाओं की उर्जा का प्रतीक है.

शयन कक्ष में दर्पण भूल के भी न रखे. ईशान कोण के दर्पण को हमेशा साफ़ सुथरा रखने से धन कही फंसता नहीं है.

श्रीरस्तु..............




5 टिप्‍पणियां:

  1. mera name meera hai mere bare me kuch bataye d.o.b 15-09-1987

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  2. Kailash choudhary
    Anil ji mera Namsethe or Chran Saprs
    Mai Padai kar raha hu
    me mehant karne ke bad bhi Job nahi lag raha hu
    aap muje bataye ki me job laguga ki nahi

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    1. कृपया अपने जन्म तिथि समय व् जन्म स्थान का पूर्ण विवरण दें......

      हटाएं

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