जय श्री कृष्णः.श्री कृष्ण शरणं मम.श्री कृष्ण शरणं मम.चिन्ता सन्तान हन्तारो यत्पादांबुज रेणवः। स्वीयानां तान्निजार्यान प्रणमामि मुहुर्मुहुः ॥ यदनुग्रहतो जन्तुः सर्व दुःखतिगो भवेत । तमहं सर्वदा वंदे श्री मद वल्लभ नन्दनम॥ जय श्री कृष्णः

बुधवार, 30 जून 2010

आईने में चेहरा देखना छोड़ दो




लगभग सभी मनुष्यों की आदत या दिन की शुरुआत ही आईना देखने से होती है. सुबह बिस्तर छोड़ कर सीधा आईने की तरफ भागते है इसी को ध्यान में रख कर ही हमने आईना को घर आदि भवनों में ज्यादा से ज्यादा स्थान ओर महत्व दे रखा है जैसे कि घर में घुसते ही आईना, घर के ड्राइंगरूम रूम में भी आईना, घर के प्रत्येक कमरों में भी आईना, बाथरूम में आईना, टॉयलेट में आइना,बाहर वाशबेसिन में भी आइना ओर घर से निकलते समय भी आईना यह तक कि खाली बैठे बैठे भी आइना का ध्यान रहता है. क्यों ना हो.. आखिर इसी लिए तो लगाया है चलो छोडो मै कौन होता हूं आप को मना करने वाला ओर फिर आप क्यों मेरी बात मानेंगे परन्तु ब्लॉग का शीर्षक तो यही है.  
आईना (दर्पण) एक ऐसी वस्तु है जिसका कि प्रत्येक घर-दूकान-भवन आदि में महत्वपूर्ण स्थान है.समय कैसा भी हो आईना प्रत्येक नर नारी ने देखना होता है. आईना हमेशा निष्पक्ष रहता है किसी से भेद भाव भी नहीं करता है.आईना कभी झूठ नही बोलता है.सब कुछ सच सच सामने रख देता है.देखा जाए तो आईने के बिना यह जीवन व्यर्थ ही दिखाई देता है.
 गरीब हो या अमीर सभी को आईने से लगाव है. यहां तक की हमारी भावना अनुसार हम भगवान की आरती व श्रृंगार के समय भी आईने का प्रयोग करना नही भूलते है. मेरा विचार है कि यदि आईना ना होता तो श्रृंगार शब्द की कल्पना भी ना होती ओर श्रृंगार रस कहाँ से उत्पन्न होता या शायद ओर कोई विकल्प निकल आता... ख़ैर आज उस विकल्प की नही बल्कि वर्तमान में आईना (दर्पण) की चर्चा कर रहे है कि आईने में चेहरा देखना छोड़ दो लेकिन क्यों? ओर कब?
शास्त्र ओर हमारे ऋषियों व मुनिओं ने स्पष्ट कहा है कि प्रातःकाल उठ कर सर्वप्रथम अपने दोनों हाथों को सामने रख कर देखें फिर अपने इष्ट देव को प्रणाम कर शय्या का त्याग करें. माता-पिता के चरणों में प्रणाम कर अपनी दिनचर्या का श्री गणेश करे.ऐसा करने से नकारात्मक उर्जा समाप्त होती है शरीर में में नयी उर्जा का प्रवेश होता है.

यही सबसे बड़ा कारण है कि सुबह उठ कर जब हम आईना या दर्पण या शीशा देखते है तो हमारी रात्री काल की सारी नेगेटिव उर्जा को आईना फिर से हमारे ऊपर फेंक देता है क्योंकि आईना कुछ भी अपने पास नही रखता फलस्वरूप जैसे ही हम आईने के सामने खड़े होकर विभिन्न मुद्राओं का प्रदर्शन करेंगे उसी मुद्रा का विपरीत फल अर्थात नकारात्मक उर्जा हमारे शरीर में पुनः प्रवेश कर जीवन में नाना प्रकार की बाधाए उत्पन्न करती है.कम से कम सुबह उठ कर मुंह धोने पूर्व आईने का प्रयोग ना करे इसी लिए शास्त्रों ने भी यही मार्ग दर्शन दीया कि सुबह-सुबह बिना मुंह धोये आईने का प्रयोग ना करे इससे भाग्य पिछड़ता है.इसलिए सुबह उठ कर अपने दोनों हाथो को अपने सामने रख कर इष्टदेव का ध्यान करे. यह श्लोक भी यही कहता है.
कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती करमूले स्थितो  ब्रह्मा प्रभाते करदर्शनम् ||


इस श्लोक को पढ़ कर हथेलियों का दर्शन करे. क्योंकि लक्ष्मी हाथों के आगे है यानी करम पहले है सरस्वती मध्य भाग में सोचने की शक्ति प्रदान करती है ब्रह्मा जी हाथ के नीचे है अच्छे करम करो अपनी विद्या का भली प्रकार से प्रयोग कर अपना भाग्य अच्छा बनाए.प्रातःकाल हाथों का दर्शन सबसे पहले कर दिन अर्थात जीवन के एक ओर कदम का शुभ कामना लेकर आरम्भ करना चाहिए


 ना आईने को अपने सामने रख कर इसलिए सुबह उठ कर आईने में चेहरा देखना छोड़ दो.......







1 टिप्पणी:

  1. चलिए, कल से हथेली दर्शन करेंगे सबसे पहले. आभार.

    उत्तर देंहटाएं

कृपया अपने प्रश्न / comments नीचे दिए गए लिंक को क्लिक कर के लिखें

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails

लिखिए अपनी भाषा में