जय श्री कृष्णः.श्री कृष्ण शरणं मम.श्री कृष्ण शरणं मम.चिन्ता सन्तान हन्तारो यत्पादांबुज रेणवः। स्वीयानां तान्निजार्यान प्रणमामि मुहुर्मुहुः ॥ यदनुग्रहतो जन्तुः सर्व दुःखतिगो भवेत । तमहं सर्वदा वंदे श्री मद वल्लभ नन्दनम॥ जय श्री कृष्णः

बुधवार, 14 जुलाई 2010

आभूषण धारण करने का रहस्य....

विश्व के पहले शल्य चिकित्सक सुश्रुत के अनुसार यदि कानों में छिद्र करके सोने या जस्ते की बालियां पहन ली जाय तो आंत उतरने,  पसली का रोग लगने की संभावना नहीं रहती. हंसुली को गले में पहनने से नेत्र ज्योति बनी रहती है. इससे गलगण्ड रोग भी नहीं होता अंगूठी धारण करने से मानसिक तनाव कम हो जाता है.यह सब आभूषणों का ही चमत्कार है.आभूषणों का प्रयोग आदिकाल से पूरे संसार में होता आ रहा है मनुष्य के सभ्य बनने के साथ यद्यपि आभूषणों का रंग रूप आकार बदलते रहे लेकिन उनकी अनिवार्यता सदैव बनी रही. क्या आभूषणों का प्रयोग केवल सौन्दर्य वृद्धि के लिए ही होता है ?   नहीं,  आभूषण शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है.



विश्व के प्राचीनतम ग्रन्थ वेदों से लेकर महादेवी वर्मा के संस्मरणों तक आभूषणों का विवरण भरा हुआ है.यजुर्वेद में तो आभूषणों को अपशगुन को दूर करने वाला बताया है.ऐसी धारणा है कि आभूषण धारण करने से बुरी आत्माओं से शरीर और मन की रक्षा होती है.आयुर्वेद के अनुसार सोने की प्रकृति गर्म है और चांदी की शीतल इस लिए यदि सिर में सोने के और पाँव में चांदी के आभूषण धारण किये जाए तो सिर से उत्पन्न विद्युत नीचे की ओर चली जायगी.एवम पाँव वाली ठंडी बिजली उसे अपनी ओर खींच लेगी पाँव के अंगुठो व उंगलियों में सदैव चांदी के ही गहने पहनने चाहिए.ताकि मस्तिष्क की गर्म बिजली पाँव की ओर तथा पाँव की शीतल बिजली का प्रवाह मस्तिष्क की ओर बना रहे.
आभूषण शरीर की शोभा की वृद्धि तो करते ही है रोग भी दूर करने में सहायक होते है.अंगूठी से बवासीर में भी फायदा होता है. कफ सम्बन्धी विकारों में सोने की अंगूठी और पाचन सम्बन्धी विकारों में चांदी की अंगूठी बहुत लाभ करती है.अंगूठी पहनने से उंगलिओं में शिथिलता नहीं आती है. बाजूबंद कंधे और कोहनी के बीच पहना जाने वाला आभूषण है जो कि कंधे और हाथ के दर्द से छुटकारा दिलाता है. कमरधनी पीठ व कमर के दर्द से छुटकारा दिलाती है. नथ, बाली या लौंग जो नाक में पहनी जाती है वह नाक के रोगों से बचाव करती है इससे महिलाओं की सेक्स भावना संयमित रहती है. मासिकधर्म सम्बन्धी विकारों में भी नथ की उपयोगिता सर्वविदित है बिछियां पहनने से महिलाओं को प्रसव पीड़ा कम होती है. पायल पहनने से एड़ी व घुटनों के दर्द से राहत मिलती है हकलाहट या तुतलाहट में चूड़ियां फायदा पहुंचाती है.इससे यह भी मान सकते है कि आभूषण धारण का एक्यूप्रेशर व एक्यूपंक्चर से परोक्ष सम्बन्ध है. इसलिए सौन्दर्य के साथ साथ शरीर भी स्वस्थ रखने में आभूषण बहुत उपयोगी सिद्ध होते है...

3 टिप्‍पणियां:

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  2. Pandit ji प्रणाम mera nam shivani h meri date of bith 20/12/1995 h tim2:15pm din wednesday kanpur nagar me ek ladke se pyr krti hu uska mayank h date of birth3/2/1993 h time 2:10 pm kanpur nagar
    Pandit ji me ye janna chahti hu ki meri love marriag Hogi usse arranged ho banke or future. Kesa hoga
    Ya or mera future. Kesa h Pandit ji
    Plzz help kre kre or btaye

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    1. आपकी जन्म कुंडली अनुसार आपका प्रेम विवाह का योग नही है किसी से धोखा भी मिलने की संभावना है

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