जय श्री कृष्णः.श्री कृष्ण शरणं मम.श्री कृष्ण शरणं मम.चिन्ता सन्तान हन्तारो यत्पादांबुज रेणवः। स्वीयानां तान्निजार्यान प्रणमामि मुहुर्मुहुः ॥ यदनुग्रहतो जन्तुः सर्व दुःखतिगो भवेत । तमहं सर्वदा वंदे श्री मद वल्लभ नन्दनम॥ जय श्री कृष्णः

शनिवार, 17 जुलाई 2010

सोमनाथ ज्योतिर्लिंङ्ग की अदभुत महिमा..


हिन्दू धर्म के पंच देवों में एक भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंङ्गों में सोमनाथ प्रथम ज्योतिर्लिंङ्ग है। भारत के पश्चिम में अरब महासागर के तट पर गुजरात के काठियावाड क्षेत्र के जूनागढ़ जिले में ऐतिहासिक सोमनाथ मंदिर में शिव के साक्षात् अवतार भगवान सोमेश्वर विराजित हैं। यह क्षेत्र प्रभाष पाटन और देवपाटन के नाम से भी प्रसिद्ध है। जहां भगवान श्रीकृष्ण के यदुवंश का संहार हुआ तथा व्याध (शिकारी) के बाण से पाद का भेदन होने पर भगवान श्रीकृष्ण देह त्याग कर लौकिक लीला पूर्ण की। यह मंदिर प्राचीन काल से ही अनेक बार ध्वस्त और पुननिर्मित हुआ। इस प्रकार यह मंदिर यह सिद्ध करता है कि पतन या विनाशकारी ताकतों पर अंतत: रचनात्मक और सृजन की ताकतों की विजय होती है। यहां सृजन की प्रेरणा मिलती है। ये पूरा जगत शिवमय है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि क्यों होती है शिवलिंग की पूजा। क्या आप सही मायने में शिवलिंग का रहस्य जानते हैं। शिव का असली स्वरूप क्या है। क्यों शिव ही इस जगत के आधार हैं। क्या हुआ था जब पहली बार विधाता ने इस सृष्टि की रचना शुरू की थी। दरअसल शिव के ज्योतिर्लिंगों से जुड़ा है सृष्टि का सारा रहस्य। हर ज्योतिर्लिंग से जुड़ी है मनोरथ और सिद्धि के तमाम सीढ़ियां। लेकिन पहले जानते हैं शिव कौन हैं। कैसे धारण करते हैं वो इस जगत को। कैसे देवी भगवती शक्ति बनकर हमेशा उनके साथ रहती हैं।
एक राजा थे उनकी सत्ताईस कन्याएं थीं। उनकी शादी होती है। लेकिन एक कन्या की वजह से सारी कहानी बदल जाती है। उस कन्या का प्यार कैसे चंद्रमा के लिए शाप का विषय बनता है। और फिर कैसे पैदा होता है शिव का पहला ज्योतिर्लिंग। देश में शिव के जो बारह ज्योतिर्लिंग है उनके बारे में मान्यता है कि अगर सुबह उठकर सिर्फ एक बार भी बारहों ज्योतिर्लिंगों का नाम ले लिया जाए तो सारा काम हो जाता है। सोमनाथ का ज्योतिर्लिंग इस धरती का पहला ज्योतिर्लिंग है। इस ज्योतिर्लिंग की महिमा बड़ी विचित्र है। शिव पुराण की कथा के हिसाब से प्राचीन काल में राजा दक्ष ने अश्विनी समेत अपनी सत्ताईस कन्याओं की शादी चंद्रमा से की थी। सत्ताईस कन्याओं का पति बन के चंद्रमा बेहद खुश हुए। कन्याएं भी चंद्रमा को वर के रूप में पाकर अति प्रसन्न थीं। लेकिन ये प्रसन्नता ज्यादा दिनों तक कायम नहीं रह सकी। क्योंकि कुछ दिनों के बाद चंद्रमा उनमें से एक रोहिणी पर ज्यादा मोहित हो गए। ये बात जब राजा दक्ष को पता चली तो वो चंद्रमा को समझाने गए। चंद्रमा ने उनकी बातें सुनीं, लेकिन कुछ दिनों के बाद फिर रोहिणी पर उनकी आसक्ति और तेज हो गई।जब राजा दक्ष को ये बात फिर पता चली तो वो गुस्से में चंद्रमा के पास गए। उनसे कहा कि मैं तुमको पहले भी समझा चुका हूं। लेकिन लगता है तुम पर मेरी बात का असर नहीं होने वाला। इसलिए मैं तुम्हें शाप देता हूं कि तुम क्षय रोग के मरीज हो जाओ।राजा दक्ष के इस श्राप के तुरंत बाद चंद्रमा क्षय रोग से ग्रस्त होकर धूमिल हो गए। उनकी रौशनी जाती रही। ये देखकर ऋषि मुनि बहुत परेशान हुए। इसके बाद सारे ऋषि मुनि और देवता इंद्र के साथ भगवान ब्रह्मा की शरण में गए।फिर ब्रह्मा जी ने उन्हें एक उपाय बताया। उपाय के हिसाब से चंद्रमा को सोमनाथ के इसी जगह पर आना था। भगवान शिव का तप करना था और उसके बाद ब्रह्मा जी के हिसाब से भगवान शिव के प्रकट होने के बाद वो दक्ष के शाप से मुक्त हो सकते थे।इस जगह पर चंद्रमा आए। भगवान वृषभध्वज का महामृत्युंजय मंत्र से पूजन किया। फिर छह महीने तक शिव की कठोर तपस्या करते रहे। चंद्रमा की कठोर तपस्या को देखकर भगवान शिव खुश हुए। उनके सामने आए और वर मांगने को कहा।चंद्रमा ने वर मांगा कि हे भगवन अगर आप खुश हैं तो मुझे इस क्षय रोग से मुक्ति दीजिए और मेरे सारे अपराधों को क्षमा कर दीजिए।भगवान शिव ने कहा कि तुम्हें जिसने शाप दिया है वो भी कोई साधारण व्यक्ति नहीं है। लेकिन मैं तुम्हारे लिए कुछ करूंगा जरूर। इसके बाद भगवान शिव ने चंद्रमा के साथ जो किया उसे देखकर चंद्रमा न ज्यादा खुश हो सके और न ही उदास रह सके। लेकिन शिव ने ऐसा किया क्या।चंद्रमा की तपस्या से भगवान शिव प्रसन्न थे। उन्हें वर देना चाहते थे लेकिन संकट देखिए। जिन्होंने चंद्रमा को श्राप दिया है वो भी कोई साधारण हस्ती नहीं थे। असमंजस था ऐसा असमंजस जिसमें भगवान शिव भी पड़ गए थे।खैर, शिव एक रास्ता निकालते हैं। चंद्रमा से कहते हैं कि मैं तुम्हारे लिए ये कर सकता हूं एक माह में जो दो पक्ष होते हैं, उसमें से एक पक्ष में तुम निखरते जाओगे। लेकिन दूसरे पक्ष में तुम क्षीण भी होओगे। ये पौराणिक राज है चंद्रमा के शुक्ल और कृष्ण पक्ष का जिसमें एक पक्ष में वो बढ़ते हैं और दूसरे में वो घटते जाते हैं।भगवान शिव के इस वर से भी चंद्रमा काफी खुश हो गए। उन्होंने भगवान शिव का आभार प्रकट किया उनकी स्तुति की।यहां पर एक बड़ा अच्छा रहस्य है। अगर आप साकार और निराकर शिव का रहस्य जानते हैं तो आप इसे समझ जाएंगे, क्योंकि चंद्रमा की स्तुति के बाद इसी जगह पर भगवान शिव निराकार से साकार हो गए थे। और साकार होते ही देवताओं ने उन्हें यहां सोमेश्वर भगवान के रूप में मान लिया। यहां से भगवान शिव तीनों लोकों में सोमनाथ के नाम से विख्यात हुए।जब शिव सोमनाथ के रूप में यहां स्थापित हो गए तो देवताओं ने उनकी तो पूजा की ही, चंद्रमा को भी नमस्कार किया। क्योंकि चंद्रमा की वजह से ही शिव का ये स्वरूप इस जगह पर मौजूद है।समय गुजरा। इस जगह की पवित्रता बढ़ती गई।शिव पुराण में कथा है कि जब शिव सोमनाथ के रूप में यहां निवास करने लगे तो देवताओं ने यहां एक कुंड की स्थापना की। उस कुंड का नाम रखा गया सोमनाथ कुंड।
कहते हैं कि कुंड में भगवान शिव और ब्रह्मा का साक्षात निवास है। इसलिए जो भी उस कुंड में स्नान करता है, उसके सारे पाप धुल जाते हैं। उसे हर तरह के रोगों से निजात मिल जाता है।
शिव पुराण में लिखा है कि असाध्य से असाध्य रोग भी कुंड में स्नान करने के बाद खत्म हो जाता है। लेकिन एक विधि है जिसको मानना पड़ता है। अगर कोई व्यक्ति क्षय रोग से ग्रसित है तो उसे उस कुंड में लगातार छह माह तक स्नान करना होगा। ये महिमा है सोमनाथ की।
शिव पुराण में ये भी लिखा है कि अगर किसी वजह से आप सोमनाथ के दर्शन नहीं कर पाते हैं तो सोमनाथ की उत्पति की कथा सुनकर भी आप वही पौराणिक लाभ उठा सकते हैं।इस तीर्थ पर और भी तमाम मुरादें हैं जिन्हें पूरा किया जा सकता है। क्योंकि ये तीर्थ बारह ज्योतिर्लिंगों में से सबसे महत्वपूर्ण है।धरती का सबसे पहला ज्योतिर्लिंग सौराष्ट्र में काठियावाड़ नाम की जगह पर स्थित है। इस मंदिर में जो सोमनाथ देव हैं उनकी पूजा पंचामृत से की जाती है। कहा जाता है कि जब चंद्रमा को शिव ने शाप मुक्त किया तो उन्होंने जिस विधि से साकार शिव की पूजा की थी, उसी विधि से आज भी सोमनाथ की पूजा होती है।यहां जाने वाले जातक अगर दो सोमवार भी शिव की पूजा को देख लेते हैं तो उनके सारे मनोरथ पूरे हो जाते हैं। अगर आप सावन की पूर्णिमा में कोई मनोरथ लेकर आते हैं तो भरोसा रखिए उसके पूरा होने में कोई विलंब नहीं होगा।अगर आप शिवरात्रि की रात यहां महामृत्युंजय मंत्र का महज एक सौ आठ बार भी जाप कर देते हैं तो वो सारी चीजें आपको हासिल हो सकती जिसके लिए आप परेशान हैं।ये है इस धरती के सबसे पहले ज्योतिर्लिंग की महिमा। शिव पुराण में ये कथा महर्षि सूरत जी ने दूसरे ऋषियों को सुनाई है। जो जातक इस कथा को ध्यान से सुनते हैं या फिर सुनाते हैं उनपर चंद्रमा और शिव दोनों की कृपा होती है। चंद्रमा शीतलता के वाहक हैं। उनके खुश होने से इंसान मानसिक तनाव से दूर होता है। और शिव इस जगत के सार हैं। उनके खुश होने से जीवन के सारे मकसद पूरे हो जाते हैं। 



37 टिप्‍पणियां:

  1. पंडितजी नमस्कार, में रविकुमार कर्नाटक से मेरा जन्म दिनांक १८-०१-१९८२ समय १०-३० पम बहुत परेशां हु, दयाकर्के उपाय बताईये, सादर प्रणाम

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    1. रवि कुमार जी आपने अपनी परेशानी का विवरण नही दिया की किस प्रकार की परेशानी है तभी उस समस्या का उपाय कुंडली के अनुसार बताने की कोशिश करूँगा

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  2. पंडितजी नमस्कार, में रविकुमार कर्नाटक से मेरा जन्म दिनांक १८-०१-१९८२ समय १०-३० पम बहुत परेशां हु, दयाकर्के उपाय बताईये, सादर प्रणाम

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  3. pandit ji nmaskar me mere vaivahik jivan se pareshan huaa mere aur mere pati me hamesha jhagde hote hai pandit ji 2 mahine ho gai me mere maa ke paas hi huaa mere pati na hi phone uthate nahi mujhe mitne aate mujhe kuch aacha upay pataye

    deepa ganesh jadhav date of brith: 28.07.1992

    ganesh chagan jadhav date of brith : 09.07.1982

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  4. NAME-SHRAVAN KUMAR
    D.O.B-06.02.1982
    SATURDAY.

    MERI SAADI KAB HOGI.

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  5. पंडित जी मेरी जनम तिथि ३१-०१-१९७४ समय सुबह 0६:३० पर हुआ है मैं इन्टरनेट कैफ़े व कंप्यूटर टाइपिंग का बिज़नेस करता हूँ जिसको दिनाक २९-०९-२०१२ को आरम्भ किया था दुकान का नाम श्री बाला जी इन्टरनेट कैफ़े एवं लोकवाणी केंद्र है किन्तु लगभग ६ माह के बाद भी व्यवसाय चल नहीं पा रहा है कृपा कर उपाय बतायें.

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  6. mera naam mona rathore hai meri dob 18/03/1994 hai main sunha 5 bje lucknow me hue ti plz btaiye meri married life kaisi rahegi..............

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    1. आप जन्म कुंडली अनुसार मांगलिक है इसलिए विवाह के समय कुण्डली मिलान सावधानी से करें तो वैवाहिक जीवन सुखमय रहेगा ...

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  7. DOB 15/03/1975
    time 7.00pm and place roorkee
    pls mere naukri ke baare me bata dijiye kafi pareshani hai naukri me braek ata rahrta hai sarkari lagegi ya nahi.

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    1. आपकी जन्म कुंडली अनुसार अभी अप्रैल 2014 तक बाधा ही रहेगी इसके बाद ही आपका समय अनुकूल होगा भगवान् शिव की आराधना करने से लाभ होगा

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  8. parnam guru ji mere pati ki job mein bar bar transfer kar dete hain date of birth 02-12-1957 birth time 15:25

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    1. आपने अपने पति का जन्म स्थान का विवरण नही दिया अतः पूरा विवरण दें

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  9. namaste guri mera naam vikram singh bais he aur puchna chata hu ki me bhot kosis karta hu but koi aachi job nhi lagte koi gaytri mata se related uppy batay d.o.b he 17-05-1988 time 08: 35 mathura

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    1. आपकी जन्म कुंडली अनुसार फरवरी 2016 तक बाधाएं है इसके बाद ही जीवन में सफलता मिलनी शुरू हो जायेंगी आप तीन टाइम अर्थात त्रिसंध्या में माँ गायत्री की पांच पांच माला का उत्तराभिमुख होकर जाप करें अवश्य लाभ होगा

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  10. pandit ji pranam .....
    mera name naveen tiwari h D.O.B. 14.11.1992 h plz mujhe future ke bare me btaye naukari ka yog h ya nhi..

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    1. आपने अपना जन्म समय और जन्म स्थान का कोई विवरण नही दिया है कृपया पूरी जानकारी दें

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  11. pandit ji pranam .....
    mera name naveen tiwari h D.O.B. 14.11.1992 h plz mujhe future ke bare me btaye naukari ka yog h ya nhi..

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    1. आपने अपना जन्म समय और जन्म स्थान का कोई विवरण नही दिया है कृपया पूरी जानकारी दें , बिना समय और स्थान के कैसे बताएं

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  12. namaste pandit ji ...
    mera name sushma singh h meri DOB 15.10.1991 h aur rashi- meen h mujhe mere future k bare kuch btaye aur meri tabiyat aaye din kharab rhti h kuch upay btaye .

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    1. आपने भी अपना जन्म समय और जन्म स्थान का कोई विवरण नही दिया है कृपया पूरी जानकारी दें

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  13. namaste pandit ji ...
    mera name sushma singh h meri DOB 15.10.1991 h aur rashi- meen h mujhe mere future k bare kuch btaye aur meri tabiyat aaye din kharab rhti h kuch upay btaye .

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    1. आपने अपना जन्म समय और जन्म स्थान का कोई विवरण नही दिया है कृपया पूरी जानकारी दें

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  14. Pandit ji mera prem vivah hua hai par hamare bich anban chalti hai Mary pati ki date of birth 6-5-1971,time- 2.30 am hai or mare 8-9-1988,time-5.45pm hay mera margdartion kijiya ki hamare bich ki anban dur ho plz margdartion kijeya

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    1. mayuri bajaj जी आपने अपने और अपने पति के जन्म स्थान के विषय में कुछ नही लिखा है कहाँ पर जन्म हुआ है जन्म स्थान अनिवार्य होता है

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  15. Or inki tabiyat bhi karab hoti hai bar bar plz upai or margdartion kijiya

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    1. mayuri bajaj जी आपने अपने और अपने पति के जन्म स्थान के विषय में कुछ नही लिखा है कहाँ पर जन्म हुआ है जन्म स्थान अनिवार्य होता है

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  16. My birth place goregav & my hasband birth place borivali plz reply

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  17. Mera janm sthan Mumbai goregav or pati ka Mumbai borivali

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    1. आप दोनों की जन्म कुंडली अनुसार राही का तथा पितृ दोष के कारण कलह की स्थिति बन रही है अतः आप भगवान शिव की पूजा करें तथा आपके पति हनुमान जी की और प्रत्येक अमावस्या किसी ब्राह्मण को भोजन घर में आमंत्रित कर के खिलाएं

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  18. Namaste Pandi Ji,

    Mera Naam mamta Upadhyay hai, aur mere artner ka naam vinit pal singh h , hum dono ki family pehle ready nahi thi par ab maan gaye hai , aur hum dono November main shaadi ka plan kar rahe hain . toh main ye janana chahti hu ki hum dono ka vivah succesfull rahega vinit ko meri vajah se ya mujhe vinit ki taraf se kisi tarah ka koi nuksaan toh nahi pahauchega . kyuki vinit Sikh dharm se hai toh vo ye sab nahi mante , par main apne man ke satisfaction k liye puch rahi hu.

    hum dono ka vivah puri tarah acchey se ho jaye aur agey ki life after marriage happy rahe ishka upay bataye , please .

    MAMTA UPADHYAY
    27.09.1990
    AGRA
    1:45 P.M


    VINIT PAL SINGH
    29.09.1986
    LUCKNOW
    10.00

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    1. आप दोनों का वैवाहिक जीवन सुखमय रहेगा तथा जन्म कुंडली अनुसार फरवरी 2017 से शादी का योग बनेगा किसी बात की कोई समस्या नही आएगी

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  19. Namaskar pandit Ji

    Mera Naam
    Mamta Upadhyay
    DOB : 27.09.1990
    Place : Agra UP
    Time : 1:45 P.M

    Aur mere partner ka naam

    Vinit Pal Singh
    DOB : 29.09.1986
    Place : Lucknow
    Time : 10:00 A.M

    Vinit Sikh family se belong karte hain toh unke yaha kundali mila ya garh dasa nahi mani jati , par main chahti hu ki hum dono ki married life main koi bhi dikkat na ho aur vinit ko meri vajah se koi bhi dikkat na ho after marriage toh ishke liye koi upaye bataye .

    aur ye shaadi acchey se ho jaye ye bhi upaye bataye please .

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    1. आप दोनों का वैवाहिक जीवन सुखमय रहेगा तथा जन्म कुंडली अनुसार फरवरी 2017 से शादी का योग बनेगा किसी बात की कोई समस्या नही आएगी

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  20. Namaste pandit ji , humari family toh November main shaadi ka plan kar rahe rain aur hum bhi .

    please suggest.

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