जय श्री कृष्णः.श्री कृष्ण शरणं मम.श्री कृष्ण शरणं मम.चिन्ता सन्तान हन्तारो यत्पादांबुज रेणवः। स्वीयानां तान्निजार्यान प्रणमामि मुहुर्मुहुः ॥ यदनुग्रहतो जन्तुः सर्व दुःखतिगो भवेत । तमहं सर्वदा वंदे श्री मद वल्लभ नन्दनम॥ जय श्री कृष्णः

गुरुवार, 29 जुलाई 2010

छींके मगर ध्यान से..

वैज्ञानिकों की दृष्टि में छींक का आना एक शारीरिक प्रतिक्रिया है, लेकिन लोगों की दृष्टि में छींक के बारे में विभिन्न धारणाए है. शास्त्रों में छींक को शुभ और अशुभ दो वर्गो में बांटा गया है. छींक के विषय में अंग-विज्ञान और जानकार लोगों की धारणाए क्या है तथा किन परिस्थितियों की छींक शुभ या अशुभ फल वाली होती है ? 

कोई व्यक्ति घर से बाहर किसी कार्यवश जाने की तैयारी में होता है और घर का कोई सदस्य उसी समय छींक देता है, तो वह अचानक ही उस पर बिगड़ जाता है क्योंकि जाने से पहले ही छींक दिया न जाने अब काम होगा या नहीं.सियार, बिल्ली, नेवला घर से निकलते ही रास्ता काट जाते है तो छींक की तरह ही व्यक्ति इस दुविधा में पड़ जाता है, कि भगवान जाने अब काम होगा या नहीं.
उपरोक्त मान्यताएं बहुत पुरानी है और आज भी समय-असमय व्यक्ति को प्रभावित करती रहती है. छींक भारतीय समाज में रसी बसी हुई है.इसके शुभाशुभ के बारे में अक्सर ही प्रश्न खड़ा होता रहता है. 

छींक के बारे में अनेक प्रकार के डर और भ्रम व्यक्ति के मन को प्रभावित करते आए है.और आज भी कर रहे है.लोग छींक का अर्थ अपनी सोच के अनुसार निकालते है.

 कोई छींक को अशुभ मानता है तो कोई छींक को शुभ मानता है.छींक के शुभाशुभ का इतिहास बहुत पुराना है. लेकिन आज किसी भी पुरातन मान्यता को तभी लोग मानते है जब कोई लोजिक हो.

पति कहीं जा रहा हो और उसकी पत्नी, पति की पीठ के पीछे या बांयी ओर छींकती है तो इसे पति को शुभ मानना चाहिए. पीठ के पीछे या बांयी ओर खड़ा व्यक्ति छींक मारता है तो अक्सर इसके परिणाम शुभ ही प्राप्त होते है.

आप कंही यात्रा कर रहे है तो ऊंचाई पर छींक हो, यानि ऊंचाई पर खड़े होकर छींकता है तो ऐसी छींक यात्रा को शुभ बनाने वाली होती है. यात्रा में सफलता अवश्य ही मिलेगी.

घर से चलते समय व्यक्ति को एक साथ दो छींके हो जाए तो उसे घबराकर अपनी यात्रा को स्थगित नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह छींक शुभ फलदायक होती है.

आसन, शयन, शौच, दान, भोजन, दवा-सेवन, पडाई शुरू करते समय, बीज बोते समय, युद्ध या विवाह के लिए जाते समय छींक आती है तो कुछ लोग इसे अशुभ मानते है. जबकि यह छींक शुभ फलदायक होती है.

यात्रा पर जाते समय अगर आपके सामने से कोई छींक मारता है तो झगड़ा होता है.

चलते समय दांयी ओर से कोई छींकता है तो धन की हानि होती है.

कन्या, विधवा, वेश्या, रजस्वला, धोबन, फूहड़ स्त्री की छींक अंग विज्ञान में अशुभ मानी गयी है. चलते समय इनके छींकने पर यात्रा नहीं करनी चाहिए.कुछ देर रुक कर जाये यदि जरूरी ना हो तो अगले दिन शुरुआत करे.

घर-बाहर के वातावरण के कारण भी छींक आती है. रसोईघर से आती छोंक की धोंस नाक में प्रवेश कर जाति है तो स्वाभाविक रूप से छींक आ जाती है ऐसी छींक का कोई भी शुभ या अशुभ फल नहीं होता है.

गर्म सर्द से भी छींक आती है. सूर्य की ओर सीधे देखने से उसकी तेज रोशनी व पराबैंगनी किरणों का नाक व आंखों में प्रवेश करना भी छींक का कारण बन जाता है. धूल कणों के साफ़-सफाई के समय नाक में प्रवेश करने से भी छींक आती है इन सब छींको का कोई भी अर्थ नहीं होता है......


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