जय श्री कृष्णः.श्री कृष्ण शरणं मम.श्री कृष्ण शरणं मम.चिन्ता सन्तान हन्तारो यत्पादांबुज रेणवः। स्वीयानां तान्निजार्यान प्रणमामि मुहुर्मुहुः ॥ यदनुग्रहतो जन्तुः सर्व दुःखतिगो भवेत । तमहं सर्वदा वंदे श्री मद वल्लभ नन्दनम॥ जय श्री कृष्णः

शनिवार, 31 जुलाई 2010

सुख-सौभाग्य का प्रतीक त्रिशक्ति यंत्र..

इस यंत्र में तीनों शक्तिओं का एक साथ समावेश होने से इसका प्रभाव अत्यंत सुख-समृद्धि में वृद्धि करता है. पूर्ण श्रद्धा विश्वास के साथ इसका उपयोग अवश्य करें. ऐसा करने से मनोवांछित लाभ प्राप्त होते है.इसे विधि पूर्वक करने से आप हमेशा कष्टों से एवम परेशानियों से बचे रहेंगे  तथा सुख, समृद्धि एवम सौभाग्य से आपका सम्पूर्ण परिवार परिपूर्ण बना रहेगा. यह यंत्र सर्वशक्तिमान यंत्र है इसमें तीनों शक्तियां त्रिशूल, ओम् और स्वास्तिक है. तीनों का मिला जुला रूप होने से इसे त्रि-शक्ति यंत्र का नाम दिया गया है.

त्रिशूल :- भगवान शिव की शक्ति का प्रतीक त्रिशूल हमें काम, क्रोध और लोभ इन तीनों विकारों से दूर रहने की शक्ति प्रदान करता है.

ओम :- ब्रह्माण्ड में इसी शब्द की सबसे पहले उत्पत्ति हुई थी.अत: यह नाद का स्वरूप है यह वायु मंडल में रहने वाली शब्द तरंगों के द्वारा शक्ति को चलायमान बनाता है ओम् के जाप से ही कई रोगों का इलाज भी होते देखा गया है.व कई परेशानिओं से मुक्ति मिलती है.

स्वास्तिक:- शुभ कार्यों के स्वामी श्री गणेश जी का प्रतीक स्वास्तिक को सूर्य का आसन और भगवान विष्णु जी का प्रतिनिधि भी माना गया है.इसे अत्यंत शुभ एवं पवित्र माना जाता है मांगलिक कार्यों में अधिकाँश: स्वास्तिक बनाकर कार्य प्रारम्भ किया जाता है.

इस यंत्र का उपयोग आप अपने घर तथा कार्यालय के दरवाजे के बाहर की तरफ कर सकते है.इसे या तो कील के द्वारा दरवाजे में लगा सकते है अथवा अन्य  सुविधानुसार लगाया जा सकता है.

 इसे आप वाहन पर भी लगा कर वाहन को दुर्घटनाओं से रक्षा कर सकते है. इसे घर के पवित्र या पूजा स्थल में भी रखा जा सकता है.

यदि घर में रोग पीछ नहीं छोड़ रहे हो तो इस त्रिशक्ति यंत्र को प्रत्येक कमरे के दक्षिण-पूर्व के कोने में स्थापित करने से शीघ्र लाभ होने लगता है.

इस त्रिशक्ति यंत्र का निर्माण शनिवार संध्या काल में श्री हनुमान जी के सिन्दूर के द्वारा घर के मुख्यद्वार के ऊपर किया जाये तो शत्रु भी अपनी शत्रुता छोड़ कर मित्र बन जाते है.

यदि बच्चों का मन पड़ाई  में नहीं लग रहा हो तो उनकी पड़ने वाली मेज पर या उनके कमरें में उत्तर-पूर्व (ईशान) कोन में इसे हल्दी को गंगाजल में घोलकर माता या पिता द्वारा वृहस्पतिवार को सुबह अनामिका उंगली से बनाने से बच्चों का मन पडाई में लगेगा.

अपने व्यवसाय का घाटा रोकने के लिए व्यवसाय की रोकड़ बही या खाता बही के मुख्य प्रष्ट पर शुक्रवार किसी सुहागिन महिला द्वारा कुंकुम रोली से बनवा कर मिठाई वितरण कर दे इससे हानि होनी रुक जायेगी.

वैसे भी इस यंत्र की महिमा अपार है किसी आवश्यक काम हेतु जाना है तो चलते समय किसी सफ़ेद सादे प्लेन कागज़ पर लाल स्याही या पैन से इस यंत्र को लिखे तत्पश्चात जेब में रख कर घर से निकले रास्ते में किसी भी मंदिर में इसे श्रद्धापूर्वक चड़ा देने से कार्य में बाधा नहीं आएगी..



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