जय श्री कृष्णः.श्री कृष्ण शरणं मम.श्री कृष्ण शरणं मम.चिन्ता सन्तान हन्तारो यत्पादांबुज रेणवः। स्वीयानां तान्निजार्यान प्रणमामि मुहुर्मुहुः ॥ यदनुग्रहतो जन्तुः सर्व दुःखतिगो भवेत । तमहं सर्वदा वंदे श्री मद वल्लभ नन्दनम॥ जय श्री कृष्णः

बुधवार, 21 जुलाई 2010

माणिक्य रत्न भगाए रोग...

प्राचीन समय में घाव होते ही उस पर माणिक्य को तीन चार बार फेर देते थें जिससे घाव सड़ता नहीं था और टिटनेस होने का भी भय नहीं रहता था यदि खून के दस्त आ रहें हो तो नित्य माणिक्य के धोए हुए जल का सेवन करना चाहिए जिससे कुछ ही दिनों में बीमारी से आराम मिल जाता है.रक्त सम्बन्धी विकार होने पर यदि माणिक्य की भस्म का सेवन वैद्य की देख रेख में किया जाय तो आश्चर्यजनक लाभ देता है.नपुंसकता में माणिक्य भस्म राम बाण ओषधि है.माणिक्य का पीलिया सम्बन्धी रोग में प्रयोग किया जाए तो लाभदायक होता है.

संग्रहणी और अतिसार में भी माणिक्य श्रेष्ठ माना गया है.

यदि किसी की स्मरण शक्ति कमजोर हो तो माणिक्य पहनने से उसे शीघ्र लाभ हो जायगा.

अंगूठी में माणिक्य जड़ा हुआ हो तो नित्य भोजन करने के बाद साफ़ पानी के गिलास में पांच बार यदि माणिक्य को घुमा कर उसका सेवन किया जाए तो कभी अजीर्ण या उदार रोग नही हो सकता है.
रोगी के सिरहाने यदि माणिक्य रखा जाए तो उसकी रश्मियों से कीटाणु स्वयमेव ही नष्ट हो जाते है.
क्षय रोग में रोगी को अगर माणिक्य का जल अर्थात माणिक्य को दो घंटे साफ़ पानी में भिगो कर रखा गया जल दिया जाए तो उसे अत्यंत शीघ्र लाभ होगा.

हर्निया और दुर्बलता वाले व्यक्ति को भी इसके उपयोग से आशातीत लाभ होता है.

प्राचीन शास्त्रों की मान्यता अनुसार पति या पत्नी माणिक्य धारण किये रहे और पति के हाथ में शुद्ध माणिक्य है तो पत्नी के दुष्चरित्र होते ही उसका रंग बदल जाएगा. कहते है कि अरागान की कैथेराइन को जब तलाक दिया जाने लगा तो उसकी उंगली में जो माणिक्य पहना हुआ था उसका रंग स्वतः ही बदल गया था.

ग्रहस्थी में जब भी बाधाएं आती है अथवा पति या पत्नी में से कोई एक जब भी अपने विश्वास खो बैठता है तो उसके हाथों में माणिक्य का रंग फीका पड़ जाता है.

मानव की मृत्यु से तीन माह पूर्व उसके हाथ की उंगली में माणिक्य का रंग फीका या सफेद पड़ जाता है.....

1 टिप्पणी:

कृपया अपने प्रश्न / comments नीचे दिए गए लिंक को क्लिक कर के लिखें

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails

लिखिए अपनी भाषा में