जय श्री कृष्णः.श्री कृष्ण शरणं मम.श्री कृष्ण शरणं मम.चिन्ता सन्तान हन्तारो यत्पादांबुज रेणवः। स्वीयानां तान्निजार्यान प्रणमामि मुहुर्मुहुः ॥ यदनुग्रहतो जन्तुः सर्व दुःखतिगो भवेत । तमहं सर्वदा वंदे श्री मद वल्लभ नन्दनम॥ जय श्री कृष्णः

सोमवार, 5 जुलाई 2010

नवरत्न धारण करने से कामना पूर्ण करें..

नवरत्न धारण करने से सुख सम्पदा, मान प्रतिष्ठा, यश,धन,सन्तान,सौभाग्य व पारिवारिक सुख,मानसिक सुख सब कुछ भरपूर मात्रा में प्राप्त होता है.इसे धारण करने से समस्त प्रकार के अनिष्ट दूर होते है.शोकों आदि से मुक्ति मिलती है.रोगों में भी लाभ मिलता है तथा आयु की वृद्धि होती है.प्राचीन मान्यता के अनुसार नवरत्नो का सम्बन्ध नवग्रहों से है क्रमशः मंगल ग्रह का सम्बन्ध मूंगा, चंद्रमा का मोती, सूर्य का माणिक्य, शुक्र का हीरे से, शनि का नीलम, राहू का गोमेद तथा केतु का लहसुनिया से है अत: सभी नौ ग्रहों की शान्ति के लिए नवरत्न को धारण किया जाता है.

रत्न अंगूठी धारण करने के विषय में यह नियम है कि या तो अलग अलग रत्नों कि अंगूठी धारण की जाए या नवरत्नो अंगूठी या माला या ब्रासलेट अथवा पेंडल पहना जाए, क्योंकि ग्रहों की महादशाएँ बदलती रहती है.ज्योतिष के अनुसार जब सौर मंडल के क्रूर और अनिष्टकारी ग्रह अपनी गति बदलते है तो जहां जहां जाते है अपनी विषमयी किरणों के प्रभाव से वहां रहनो वालो के स्वास्थ्य, बुद्धि तथा जीवन पर अपने दुष्प्रभाव डालते है.संसार में जो कुछ भी होता है इन ग्रहों की गति के अनुसार ही होता है मनुष्य के जीवन में सुख-दुःख, उत्थान-पतन, लाभ-हानि सब कुछ इन ग्रहों के शुभ अथवा अशुभ प्रभाव से होता है.ऐसी स्थिति कब आएगी जब कोई ग्रह हमारे साथ अपना अशुभ प्रभाव डालेगा यह हम हर वक्त नहीं जान सकते इसी परेशानी से बचने के लिए नवरत्न धारण किये जाते है.
नवरत्न मनुष्य की अभीष्ट ग्रहों के अशुभ प्रभाव से रक्षा करता है.नवरत्न धारण करने से हमारे जो ग्रह शुभ है वह इन्हें और भी शुभ प्रभावशाली बनाते है. जिससे वह हमारे लिए सर्वोच्च शुभकारी बनते है. कभी कभी किसी किसी कुण्डली में ग्रहों की महा दशा ऐसी बन जाती है कि यह निर्णय करना कठिन हो जाता है कौन सा रत्न पहनना शुभकारी है तथा कौन सा पहनना अशुभकारी है ऐसी स्थिति में नवरत्न धारण करने चाहिए.
नवरत्न कोई भी धारण कर सकता है.यह हर राशि तथा नक्षत्र वाले को समान लाभदायक है इसे धारण करकर सभी राशि वाले फायदा उठा सकते है.इसको धारण करने के लिए किसी भी ज्योतिषी अथवा पण्डित जी की आवश्यकता नहीं होती है. हर हाल में धारक को फायदा पहुँचता है.कभी भी नुक्सान नहीं होता है. नवरत्नों को सोने या चांदी में अपनी सुविधा अनुसार बनवाकर धारण कर चाहिए.....

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