जय श्री कृष्णः.श्री कृष्ण शरणं मम.श्री कृष्ण शरणं मम.चिन्ता सन्तान हन्तारो यत्पादांबुज रेणवः। स्वीयानां तान्निजार्यान प्रणमामि मुहुर्मुहुः ॥ यदनुग्रहतो जन्तुः सर्व दुःखतिगो भवेत । तमहं सर्वदा वंदे श्री मद वल्लभ नन्दनम॥ जय श्री कृष्णः

रविवार, 8 अगस्त 2010

क्या सारे ग्रह हम भारतवासियों पर ही लागू होते हैं क्या ?

क्या सारे ग्रह हम भारतवासियों पर ही लागू होते हैं क्या ? यह प्रश्न एक टिप्पणी के रूप में मेरे सामने आया मुझे पड़ कर बहुत्त अच्छा महसूस हुआ, सही बात बताऊ तो मै सोच ही रहा था कि किस विषय पर अगला लेख लिखा जाये पर जब टिप्पणी आयी तो एक ऐसा विषय लेकर आई जिस विषय को लेकर सभी लोग प्रश्न करते है कि ज्योतिष या ग्रह केवल भारतीयों के लिए ही है ? या कोई प्रश्न करता है कि यह ग्रह, टोने टोटके भूत प्रेत आदि क्या भारतीय समाज के लिए ही होते है? किसी दूसरी जाति या किसी दुसरे धर्म के लिए भी यही सिद्धान्त लागू होते है. मैने सोचा कि टिप्पणी का जवाब भी दूँ तो अलग से लेख के रूप में ताकि सभी जान सके कि ज्योतिष, ग्रहों का असर भारतीयों पर ही नहीं बल्कि प्रत्येक मनुष्य, पशु, पक्षी आदि जितने भी जीवचारी है यहां तक कि पेड़ पौधों का भी सम्बन्ध ज्योतिष और ग्रहों से होता है.
यह एक अटल सत्य है कि इस विश्व का प्रत्येक जीव का सम्बन्ध ग्रहों के द्वारा निश्चित है. तथा प्रत्येक धर्म का भी इससे किसी न किसी रूप से सम्बन्ध है. यह तो लाखों वर्ष या कह सकते है कि युगों युगों से इस पृथ्वी पर विचरण करने करने वाले सभी पर ग्रह अपने असर दिखाते है इसका प्रमाण हमे प्राचीन ग्रंथो में भी मिलता है.
 एक बात यह भी सत्य है ज्योतिष को मानने वाले या इस पर विश्वास करने वाले भारत में कम संख्या में है यूरोप, अमेरिकन, चीन आदि अन्य देशो में इसकी बहुत अधिक संख्या है इसका कारण यह भी है कि यहां दुसरे देशों से अधिक लोग पड़े लिखे है........मेरा विचार है तो यही है. आपने देखा होगा कि चीनी ज्योतिष, फेंगसुई पाश्चात्य पद्धति कहा से आई........जबकि ज्योतिष का मूल जन्म स्थान भारतवर्ष ही है और भारत वर्ष में ही इसकी उपेक्षा हो रही है क्यों?
यदि एक डाक्टर किसी रोग को डाइग्नोज नहीं कर पाता है और वो फेल हो जाता है तो इसका यह मतलब नहीं कि मेडिकल साइंस फेल हो गयी. यह ज्योतिष शास्त्र तो महान है इसे विद्या को किसी विज्ञान या किसी अन्य विधि द्वारा प्रमाणपत्र लेने की आवश्यकता नही है. ज्योति + ईश = ज्योतिष अर्थात ईश्वर का प्रकाश जो हमे मार्ग दर्शन करता है. हमारे श्रधेय परम पूज्य ऋषि मुनियों ने जो गणितीय सिद्धांतों को हमारे सामने रखा उसी के कारण हम आज तक खोज कर रहे है क्या आपने सोचा यदि शून्य जीरो का आविष्कार हमारे ऋषि ना करते तो आज विज्ञान की स्थिति क्या होती?
आज का विज्ञान प्रगति पर है हमारा जीवन उस पर बहुत निर्भर करता है. विज्ञान बहुत कुछ है लेकिन सब कुछ नहीं है.यदि हम रोग का ही उदाहरण ले तो भारतीय ज्योतिष किसी भी मनुष्य के जीवन में होने वाले रोग को वर्षो पूर्व ही जानकारी देने में सक्षम है जबकि विज्ञान अभी भी यहां तक नहीं पहुंचा है विज्ञान शरीर में रोग के लक्षण उत्पन्न होने पर ही रोग के बारे में बताता है.

ज्योतिष के बारे में यह भी तथ्य सामने है कि ज्योतिष और सिद्धान्त का जन्म एशिया, यूरोप ओर मध्य-पूर्व में हुआ था ग्रीस और मिस्त्र में भी ज्योतिष की गणना का कार्य सफलता पूर्वक हुआ. और मायानज्योतिश के समय इजरायली लोग केवल ज्योतिष के सहारे ही जीवन यापन करते थे.इसके आलावा ज्योतिष मध्ययुगीन मुस्लिम खगोलविदो जैसे अल फराबी, इब्न अल ह्य्थम, अबू अल, आवेरोस आदि इस्लामी विद्वानों ने नए सूत्रों की खोज कर ज्योतिष को आसान बनाने का मार्ग निकाला.इब्न अल और दार अल ने ज्योतिष के गुढ़ रहस्यों से पर्दा हटा कर एक नया ज्योतिष प्रस्तुत किया गया.अभी भी भारतीय ज्योतिष में वर्ष फल की गणना के बाद जब फलित की और जाते है तो वर्ष के सभी योग उर्दू में ही उन्हें पुकारा जाता है. लेख के विस्तार होने के भय से इतना ही लिखना चाहूँगा कि यूरोप में गैलन, पेरासेलसस,गिरोलोमा कार्देन्न, निकोलुस, कोपर्निकस, ताकी, अल्दीन, तेश्यो,योहानेस केपलर, कार्ल जंग आदि बहुत से ज्योतिषो ने इसका विस्तार कर इसकी श्रेष्ठता को पहचाना.
यदि विचार किया जाय तो भारत में इस पर विश्वास करने वालो की संख्या बहुत कम हर जबकि विश्व के दुसरे देशों में इसे इसका ज्यादा प्रचार प्रसार हो रहा है. आज भी जब हम राशि का फल देखते है तो पाश्चात्य पद्धति द्वारा सन साइन को महत्ता देते है. चीनी ज्योतिष और फेंगसुई भारत में कितनी फैल चुकी है यह सब को मालूम ही है
इसलिए यह कहना कि क्या यह सारे ग्रह भारतवासियो पर ही लागू होते है क्या ? इसका उत्तर भी यही है हां.......परन्तु भारतवासियो से ज्यादा शेष विश्व भी इस भारतीय ज्योतिष का दीवाना है और कुछ समय बाद भारतीय ज्योतिष पूरे संसार में अपने ज्ञान का ध्वज फेहराने का उत्सुक है...एक सर्वे जो कि पिछले वर्षो हुआ था किसी मासिक पत्रिका में उसका उल्लेख था कि भारत वर्ष में केवल ३२% प्रतिशत ही लोग ज्योतिष में आस्था रखते है.सबसे अधिक यूरोप में जो कि ८२% प्रतिशत के लगभग  ज्योतिष के प्रति आस्थावान है.
अत: इसी कारण से सारे ग्रह भारतवासियो पर लागू नहीं होते है
अंत में मै एक ही शब्द लिखता हूं कि ज्योतिष एक शद्धा एवं विश्वास का प्रतीक है.




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