जय श्री कृष्णः.श्री कृष्ण शरणं मम.श्री कृष्ण शरणं मम.चिन्ता सन्तान हन्तारो यत्पादांबुज रेणवः। स्वीयानां तान्निजार्यान प्रणमामि मुहुर्मुहुः ॥ यदनुग्रहतो जन्तुः सर्व दुःखतिगो भवेत । तमहं सर्वदा वंदे श्री मद वल्लभ नन्दनम॥ जय श्री कृष्णः

शुक्रवार, 27 अगस्त 2010

पांच महा उपरत्नों का प्रयोग कर लाभ उठायें..

रत्नों का संसार बहुत ही निराला है. प्रत्येक रत्न की अपनी चमक, रंग व प्रभाव होता है. शास्त्रों में चौरासी (८४) रत्नों को प्रमुख माना गया है. लक्ष्मी जाप के लिए स्फटिक की माला का प्रयोग कहा गया है. स्फटिक की माला को धारण करने से मानसिक शान्ति भी मिलती है. स्फटिक श्री यंत्र भी बहुत शुभ फल प्रदान करने वाला यंत्र होता है. यह एश्वर्य के साथ साथ वास्तु दोष भी दूर करता है. ८४ रत्नों में से पांच महा रत्न हीरा, मोती, माणिक्य, पन्ना और नीलम है. इसी प्रकार पांच उप महा रत्न भी सुनैला, कटेला, सफेद मूंगा, फीरोज़ा और स्फटिक के रूप में हमारे सामने है जिनका हम उचित प्रयोग कर जीवन की अनेक समस्याओं से छुटकारा पा सकते है.


सुनैला:-- यह पीले रंग का पत्थर होता है. पीले पुखराज का यह उपरत्न है. जो कार्य पुखराज करता है वही कार्य सुनैला भी करता है. कन्या के शीघ्र विवाह के लिए सुनैला पहनाया जाता है. व्यापार व्यवसाय की उन्नति तथा पुत्र प्राप्ति के लिए सुनैला रामबाण उपाय सिद्ध हुआ है. खाने पीने से उत्पन्न रोग, मोटापा दूर करने के लिए भी इसे पहना जा सकता है. यदि पडाई में मन नहीं लगता हो तो भी सुनैला बड़े काम का उपरत्न है.

कटेला:-- इसे अंग्रेजी में एमेथिष्ट भी कहा जाता है. यह नीलम का उपरत्न है. इसे पहनने से किसी भी प्रकार का नुक्सान नहीं होता है. यह बहुत ही काम का उपरत्न है. यदि शनि जन्मकुण्डली में अशुभ भाव में स्थित हो या शनि जीवन में किसी भी प्रकार से तकलीफ दे रहा हो तो इसे पहना जा सकता है. यदि आपका भाग्य साथ ना दे रहा हो या राजकीय पक्ष से परेशानी हो तो इसे धारण करने से आशातीत लाभ होता है.

स्फटिक:-- स्फटिक एक अतिशुभ रत्न माना जाता है. शास्त्रों में स्फटिक शिवलिंग की पूजा करने पर बहुत शुभ फल कहा गया है. यह सुख समृद्धि धन एवं वैभव प्रदान करता है. लक्ष्मी जाप के लिए स्फटिक की माला का प्रयोग कहा गया है. स्फटिक की माला को धारण करने से मानसिक शान्ति भी मिलती है. स्फटिक श्री यंत्र भी बहुत शुभ फल प्रदान करने वाला यंत्र होता है. यह एश्वर्य के साथ साथ वास्तु दोष भी दूर करता है.

फिरोजा:-- शुक्र ग्रह के लिए हीरे का प्रयोग किया जाता है. क्योंकि हीरा एक महंगा रत्न है. तो उसके स्थान पर फिरोजा पहना जा सकता है. वैसे हीरे के स्थान पर अमरीकन डायमण्ड भी धारण कर सकते है. फिरोजा, शुक्र ग्रह के साथ साथ बुध ग्रह को भी प्रभावित करता है. फिल्म, टी०वी०, फैशन, ज्वैलरी, कपड़ा उद्योग से जुड़े व्यक्तिओं को फिरोजा बहुत लाभकारी होता है.

सफेद मूंगा:-- यदि कुण्डली में मंगल दोष है या बार बार दुर्घटनाये होती हो तो सफेद मूंगा बहुत काम का उपरत्न है. चन्द्र मंगल की युति यदि व्यक्ति को परेशान कर रही हो तो चांदी की अंगूठी में सफेद मूंगा पहनना चाहिए इसको पहनने से तुरंत राहत मिलेगी. विवाह में बहुत बाधाएं आ रही हो तो सफेद मूंगा धारण करने से विवाह शीघ्र हो जाता है.

इस प्रकार यह पांच उप महा रत्न धारण करने से इनके महा रत्नों का प्रभाव मिलता है. कई बार तो प्रभाव तुरंत देखने को मिलता है तो कई बार प्रभाव कुछ समय बाद दिखाई देता है. इन्हें हर कोई व्यक्ति आसानी से खरीद सकता है. यह बहुत महंगे नहीं होते है. इनको धारण करने से निश्चय ही विलक्षण प्रभाव देखने को मिलते है...........










1 टिप्पणी:

  1. अच्‍छी कि‍फायती जानकारी के लि‍ये धन्‍यवाद

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