जय श्री कृष्णः.श्री कृष्ण शरणं मम.श्री कृष्ण शरणं मम.चिन्ता सन्तान हन्तारो यत्पादांबुज रेणवः। स्वीयानां तान्निजार्यान प्रणमामि मुहुर्मुहुः ॥ यदनुग्रहतो जन्तुः सर्व दुःखतिगो भवेत । तमहं सर्वदा वंदे श्री मद वल्लभ नन्दनम॥ जय श्री कृष्णः

गुरुवार, 12 अगस्त 2010

आहार ज्योतिष (Food-Astrology) द्वारा रोग दूर भगाएं..

एक सुख निरोगी काया दूजा सुख घर में हो माया, तीजा सुख सुलक्षणा नारी चौथा सुख सुत आज्ञाकारी. पहला सुख प्राप्त हो जायगा तो बाकी सुख भी धीरे धीरे मिल ही जायंगे. ज्योतिष के ग्रहों के अशुभ फल को कम करने के लिए एवं शुभ ग्रहों को बल प्रदान करने के लिए आम तौर पर सभी सलाहकार रत्नों की सलाह देते है.प्रत्येक ग्रह के अनुसार मनुष्य को रत्न बताए जाते है. जैसे सूर्य के लिए माणिक्य आदि आदि रत्न का प्रयोग कर लाभ उठाये जाते है. कुछ ज्योतिषी लाल किताब के उपायों द्वारा भी समस्या का समाधान करते है. इसके अतिरिक्त वैदिक मंत्रो का भी ज्योतिष में विशेष महत्व है. प्रत्येक ग्रह अनुसार मंत्रो का जाप विशेष फलदायी होता है. इस तरह प्रत्येक ज्योतिषी अपने अनुभव के आधार पर विभिन्न उपाय बताते है.


रत्न , यंत्र, मन्त्र, दान, पूजा, यज्ञ आदि के अतिरिक्त यदि हम प्रत्येक ग्रह के अनुकूल संतुलित खाद्य पदार्थो को भी अपने जीवन में सम्मिलित कर ले तो निश्चित रूप से अपने तन और मन को अधिक स्वस्थ एवं सुंदर बना सकते है. अपने व्यक्तिगत अनुभव द्वारा मैने यह महसूस किया कि संतुलित आहार द्वारा भी हम विभिन्न ग्रहों को बल दे सकते है तथा शुभकारक कमजोर ग्रहों को बलशाली बना कर स्वास्थ्य के प्रति शुभ फल बड़ा सकते है



सूर्य:-- सूर्य को आत्माकारक ग्रह माना गया है. यह प्रथम, नवम और दशम भावों का कारक ग्रह है.इन भावो से हम रूप, रंग, स्वास्थ्य, गुण, स्वभाव, आत्मा, सुख-दुःख, मानसिक शान्ति, धार्मिक प्रवृति एवं कर्म क्षैत्र का विचार करते है. सूर्य ग्रह के श्रेष्ठ भोज्य वस्तुएं है गुड़, गेंहू, जौ, खुमानी, मुनक्का, खजूर, छुआरा, गन्ना, किशमिश, मक्का आदि. वैसे तो गेंहू का आटा सभी खाते है.पर यदि हम गेंहू को अंकुरित करके लें या गेंहू औए जौ को बो कर उसके ज्वारे का रस पीएं अथवामुनक्का, किशमिश तथा खुमानी को पानी में भिगो कर नित्य ग्रहण करें और भोजन के उपरान्त थोड़े से गुड़ का सेवन करें तो निश्चित रूप से स्वास्थ्य में आशातीत लाभ होगा और मन भी प्रफुल्लित रहेगा.

कहा गया है कि मन चंगा तो कठोती में गंगा, इन सब भोज्य पदार्थो से विशेष स्फूर्ति का अनुभव होगा और आत्मिक बल प्राप्त होगा. कर्म क्षेत्र में विशेष उत्साह से कार्य कर सकेंगे. और हड्डियां मजबूत होंगी.

चंद्रमा:-- चंद्रमा को मन का कारक ग्रह माना गया है.और यह चतुर्थ भाव का कारक ग्रह है. चन्द्र के अनुकूल भोज्य पदार्थ है दूध, दही, पनीर, सफेद तिल, एवं अखरोट. चंद्रमा को बल प्रदान करने के लिए सोयाबीन के दूध अथवा पनीर का प्रयोग करें.सफेद तिल के लड्डू खाएं, सेला चावल का प्रयोग करे. अखरोट की गिरी भिगो कर प्रातःकाल चबा कर खाएं. यह दिल के लिए बहुत उपयोगी है.हृदय रोगियों के लिए बहुत फायदा करेगी. जो बच्चे रात को बिस्तर गीला करते है उन्हें नियमित रूप से तिल का सेवन कराया जाये तो इस समस्या से छुटकारा पा सकते है.

मंगल:-- मंगल तृतीय एवं छठे भावो का कारक ग्रह है.इसका अनुकूल रंग है लाल. और इसके अनुकिल भोज्य पदार्थ अनार, गाजर, मोठ, लाल चौलाई, चुकंदर, टमाटर, लौंग, मसूर, लाल मक्का आदि है. इनके सेवन से खून सम्बन्धी सभी दोषों से मुक्ति मिल जाति है.मोठ को अंकुरित कर के नित्य सुबह कच्चा चबा कर खाएं तो शरीर में खून के लाल कणों की वृद्धि होती है. सर्दिओं में मक्के के आटे की रोटी खाएं. और बादाम को भिगो कर प्रतिदिन सुबह खाएं तो बल की वृद्धि होती है. पराक्रम बड़ता है तथा छोटे-मोटे रोग तो पास ही नहीं आते है.

बुध:-- बुध ग्रह चतुर्थ और दशम भाव का कारक है. इस ग्रह का अनुकूल रंग हरा है. इस ग्रह को बल प्रदान करने के लिए संतुलित भोज्य वस्तुएं है हरा आंवला, मूंग, मेथी, लौकी, बथुआ, पालक, सरसों, गेंहू और जौ के ज्वार अथवा हरी दूब और कच्चा हरा पेठा. हरी मूंग और मेथी अंकुरित कर प्रयोग करें. बथुआ, पालक और सरसों के साग का सर्दियो में सेवन बहुत लाभकारी है. इनमें केल्शियम एवं फोंलिक एसिड की मात्र बहुत अधिक होती है. ये खून की नलियों को साफ़ रखते है. पालक का बीटा कैरोटिन नामक विटामिन शारीरिक विकास में सहायक होता है. गेंहू, जौ के ज्वारों अथवा दूब का रस निकाल कर सुबह-सुबह पीएं पेट के सभी रोगों में बहुत लाभ मिलेगा. ग्वार पाठे का जूस अथवा इसके गुदे का हलवा या ग्वार की फली भी घुटनों के दर्द में अत्यंत लाभकारी होती है.आंवले का जूस आंखों के लिए अत्यंत लाभकारी है. ब्रोकिल अथवा हरी गोभी स्तन कैंसर के उपचार के लिए बहुत उपयोगी है.

वृहस्पति:-- वृहस्पति द्वितीय, पंचम, नवम तथा एकादश भाव का शुभ कारक ग्रह है.इसका प्रिय रंग पीला और इसके अनुकूल भोज्य पदार्थ पपीता, मेथी दाना, शकरकंद, अदरक, चना दाल, चने का आटा, सीताफल, संतरा, कच्ची हल्दी और मक्के का आटा है.जंहा केला, पपीता बदहजमी और अम्लता को दूर करते है. वही कच्ची हल्दी या अंकुरित मेथी भी स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभप्रद होती है. ये सभी वस्तुए पेट की समस्याओं को दूर करती है और चर्बी नहीं बड़ने देती है.

शुक्र:-- शुक्र ग्रह सप्तम भाव का कारक ग्रह है. और इसका शुभ रंग सफेद है इस ग्रह की अनुकूल भोज्य वस्तुए है. सफेद भीगे बादाम, गेंहू, सफेद मिर्च, अखरोट, सिंघाड़े, नारियल, अल्फाल्फा तथा चौलाई के बीज, चौलाई के बीजो को फुला कर बनाई गई खीर अथवा लड्डू सुपाच्य होते है. तथा वृद्धो और बच्चों के लिए लाभदायक है. इनसे रूप रंग में तो निखार आयगा ही यौवन भी बरकरार रहता है. भीगे बादाम व अखरोट कोलेस्ट्रोल को कम करते है. दमा व जोड़ों के दर्द में राहत देंगे. कैंसर अवरोधि तत्वों को मजबूत करते है. रक्त और ज्ञान तंतुओ को बल मिलता है. याददास्त, बुद्धि एवं स्फूर्ति में भी वृद्धि होती है. दुबले पतले व शक्ति हीन व्यक्तियों को इसके प्रयोग से लाभ मिलता है. जिन लोगों को मधुमेह की शिकायत हो, वह बराबर मात्रा में गेंहू चना (काला साबुत) या सोयाबीन जौ व मंडवे (मडुआ) के आटे की रोटी का सेवन करें अवश्य लाभ होगा.

शनि:-- शनि छठा, आंठवा एवं द्वादश भावो का कारक ग्रह है. इस ग्रह का अनुकूल रंग काला, नीला अथवा कत्थई है और इस ग्रह को अनुकूल बनाने के लिए जंहा काली उडद व तेल का दान करते है. वहीं भोज्य पदार्थो में जामुन, काली मिर्च, मंडवा का आटा, काले अंगूर, कुल्थी, मुनक्का, गुलकंद आदि है. शनि के शुभ प्रभाव को बड़ाएगे. जिहे पथरी की शिकायत होती है. अगर वे नियमित रूप से भिगोई गयी कुल्थी के पानी का सेवन करें और हफ्ते में एक या दो बार उसकी दाल खाएं तो काफी लाभ होता है. इन पदार्थो के सेवन से एक ओर पाचन ठीक रहेगा तो दूसरी ओर शारीरिक बल भी प्राप्त होता है.बवासीर के रोगी नारियल की छाल को जला कर ताजा दही के साथ एक एक चम्मच तीन बार खाए तो अत्यंत लाभ प्राप्त होता है. साथ ही धूम्रपान मदिरा मांस आदि से बचना चाहिए. यदि धूम्रपान छोड़ देंगे तो पैरों के दर्द तथा दिल के रोग में लाभ होगा. वनस्पति घी का प्रयोग बिलकुल ना करे उसके स्था पर सरसों का तेल, सोयाबीन का तेल अथवा बिनोले का तेल प्रयोग करने से पैरों व घुटनों के दर्द से राहत मिलती है. इन सब के प्रयोग से शारीरिक रोगों से काफी हद तक मुक्ति प्राप्त कर सकते है.

यदि इस प्रकार हम इन ग्रहों के भोज्य पदार्थ प्रतिदिन खाने में प्रयोग करें तो स्वास्थ्य लाभ तो होगा ही साथ ही उस ग्रह की पीड़ा या दोष भी शान्त होकर वह ग्रह हमारे लिए शुभ फलदायी बन जायेंगे. समाज में हमारे पूर्वज इसी प्रकार ऋतु व मौसम के अनुसार भोजन ग्रहण कर स्वास्थ्य और दीर्घायु प्राप्त करते थे. आज यदि हम भी उन्ही सिद्धांतों का अनुसरण करते है तो हमार जीवन भी सदा सुखमय व्यतीत होगा........



16 टिप्‍पणियां:

  1. यह एक नये तरह की बात जानी...उपयोगी. आभार.

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  2. स्वास्थ्यवर्धक जीवन पाने हेतु उपयोगी जानकारी

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  3. आपके द्वारा जो भी ब्लॉग पर अंकित है वो सराहनीय एवं प्रशंसनीय है हर तरह की जानकारी का समावेश है इस ब्लॉग पर आप साधुवाद के पात्र है

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  4. पंडित जी प्रणाम मेरा नाम मनीष है और मेरे पार्टनर का नाम मधुकर है हम एक कम्पनी रियल एस्टेट की स्टार्ट करना कहते है तो क्या पर्तेनेर्शिप निभ पायेगी ?और कंपनी का नाम किस अक्षर से रखने पैर सूट करेगा मेरा जन्मतिथि १०.१०.१९७६ समय रात्रि ११.४५ पर मनेन्द्रगढ़ मध्यप्रदेश में हुआ कृपया समाधान बताएं

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    1. आपकी जन्म कुंडली अनुसार आपको पार्टनरशिप में काम नही करना चाहिए अतः विचार त्याग दें आप अपना स्वयम का काम करें तो लाभ होगा

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  5. पंडित जी प्रणाम मेरा नाम मनीष है और मेरे पार्टनर का नाम मधुकर है हम एक कम्पनी रियल एस्टेट की स्टार्ट करना कहते है तो क्या पर्तेनेर्शिप निभ पायेगी ?और कंपनी का नाम किस अक्षर से रखने पैर सूट करेगा मेरा जन्मतिथि १०.१०.१९७६ समय रात्रि ११.४५ पर मनेन्द्रगढ़ मध्यप्रदेश में हुआ कृपया समाधान बताएं

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    1. आपकी जन्म कुंडली अनुसार आपको पार्टनरशिप में काम नही करना चाहिए अतः विचार त्याग दें आप अपना स्वयम का काम करें तो लाभ होगा

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  6. pranam pandit ji
    mera dob 30/09/1983 mera janma sthaan jamshedpur (bihar) hei mera jnma samay hei 12:25 am
    pandit ji please meri kundali mein kya hei boliye aur mujhe naukri kab tak milegi batayiye

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    1. आपकी जन्म कुंडली अनुसार आपकी नौकरी का योग अक्तूबर 2013 से आरम्भ हो रहा है

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  7. नाम-जीतेन्द्र वर्मा
    डी.ओ.बी-०३/११/१९८६
    जन्म स्थान -दुर्ग(छ.ग.)
    जन्म समय -१२:५० दोपहर

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  8. i want to be rich person. is it posible or not sir please sugest me.
    sir recently i become father my child name name- divyansh, dob-11/6/2015, place-raipur(cg), time-2:01pm.

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