जय श्री कृष्णः.श्री कृष्ण शरणं मम.श्री कृष्ण शरणं मम.चिन्ता सन्तान हन्तारो यत्पादांबुज रेणवः। स्वीयानां तान्निजार्यान प्रणमामि मुहुर्मुहुः ॥ यदनुग्रहतो जन्तुः सर्व दुःखतिगो भवेत । तमहं सर्वदा वंदे श्री मद वल्लभ नन्दनम॥ जय श्री कृष्णः

शनिवार, 4 सितंबर 2010

आपका भाग्य अंक २ और भविष्य..

आप सोच रहें होंगे, कोई अंक अच्छे या बुरे भी होंगे. नहीं, आप विश्वास कीजिये, कोई भी अंक अच्छा या बुरा नहीं होता . जिस प्रकार कोई भी ग्रह शुभ या अशुभ नहीं होता. हर व्यक्ति के जीवन पर उनका भिन्न भिन्न प्रभाव रहता है.उसी प्रकार अंको का भी हमारे जीवन शैली पर है. अंको की एक सुनिश्चित गति है, स्पष्ट लक्षण है, स्पष्ट अर्थ है. एक क्रम व योजना है. उसे भली प्रकार समझ लें तो मानव जीवन को समझना सरल हो जाता है.
भाग्यांक के लिए जन्म तारीख, जन्म मास्, जन्म वर्ष की आवश्यकता रहती है. सवाल यह है कि भाग्यांक कैसे बनाया जाये ? उदाहरण:- माना किसी की जन्म तिथि २७-०६-१९६२ है तो तारीख को जोड़ा २+७=९, मास् का योग किया तो ०+६= ६, जन्म वर्ष को जोड़ा तो १+९+६+२= १८, अब इन तीनों का जोड़ करेंगे ९+६+१८= ३३ आया इसका फिर एक अंक में परिवर्तन करने के लिए जोड़ेंगे तो ३+३= ६ अंक हमारे सामने आ रहा है बस यही भाग्यांक का अंक है अर्थात उपरोक्त जन्म तिथि के अनुसार हम कह सकते है कि भाग्यांक ६ है. अब भाग्यांक के फल पर भी विचार करते है.

भाग्यांक २ है तो:-- अंक २ को चंद्र का प्रतीक माना गया है इस अंक के व्यक्ति कोमल, भावुक व संवेदनशील, जागरूक, कल्पना जगत में विचरण करने वाले सहृदयी विपत्ति में लोगों के काम आने वाले शीतल स्वभाव के होते है. इनके अंदर भौतिक से ज्यादा मानसिक गुण होते है. यह जीवन में एक कार्य से संतुष्ट न रह कर बदल बदल कर जीवन बिताते है. कोई भी कार्य जोश से करेंगे परन्तु थोड़ी सी रुकावट आने पर बाधा या अड़चन आने पर दुसरे कार्य में लग जायेंगे. थोड़ी सी भी परेशानी, धन नष्ट, हानि होने पर सहन नहीं कर पाते और शौर मचाना शुरू कर देते है. आप रजोगुण प्रधान, मोक्ष इच्छुक, माया का पूर्ण भोग करने वाले निरन्तर उन्नति की ओर अग्रसर रहते है.

आप अपनी नीतियों में सदृढ़, नियमित कार्य करने वाले आनुशासन प्रिय है. सौन्दर्यप्रेमी होने के कारण जहां सुंदरता देखते है वहीं पर आप ठहर जाते है. बागवानी, तैरने व कलात्मक चीजे करते रहते है. आपके संपर्क में आ कर, अपरिचित कभी अपरिचित नहीं रहता है आप सचमुच भोले व सरल चित्त होने के कारण दूसरों से भी ठगे जाते है.बात बात में धोखा खाते है. एवं फिर पछताते है. आप सदगृहस्थ है. परन्तु आपकी पत्नी भी आपको समझ नहीं पाती है. ग्रहस्थ में निरन्तर भूचाल आने की संभावना बनी रहती है. अपने मित्रों को मन का भेद न दे अन्यथा पछताएंगे. उदासीनता आप पर हावी रहती है.

व्यवसाय:- तैलीय कार्य, समुद्र यात्रा, पशु व्यवसाय, डेरी, मुर्गीपालन, घी का व्यवसाय, कागज़, जल, कृषि, औषधि, खंडसारी, भ्रमण कार्य, एजेंट, संपादन, लेखन, संगीत, नृत्य, भूमि प्रबंधन, ठेकेदारी, पत्थर का कार्य अपनाने का प्रयास करना चाहिए.

दिशाए:- उत्तर-पूर्व, उत्तर-पश्चिम, उत्तर यह दिशाए कार्य क्षेत्र के लिए श्रेष्ठता प्रदान करती है.

सर्वोत्तम तारीखें:-- २.११.२०,२९, ४,१३ २२,३१, श्रेष्ठ: व ७,१६,२५ तारीखे उत्तम फल देंगी..

सर्वोत्तम वर्ष:-- ४, १३, २२, ३१, ४०, ४९, ५८, ६७, ७६ वर्ष श्रेष्ठ, ३४, २५, ४३, ५२, ६१, ७० उत्तम फल दायक रहेंगे..

अनुकूल रंग:- गहरे हरे से लेकर सभी प्रकार के क्रीम रंग, पीला रंग, लाल रंग, सफेद रंग के कपड़े पहनें. काले, बैंगनी, रंगों से विशेष रूप से परहेज रखें...

प्रेम मित्रता के लिए आपके भाग्य अंक:-- अंक २, ७, १, ४ इन अंको के भाग्यवर्धक लोग उपयुक्त रहते है. आपके भाग्यशाली दिन रविवार, सोमवार, तथा शुक्रवार रहते है. यदि इन वारों में २, १, ७, ४, अंक हो तो कोई भी कार्य करने के लिए अधिक अच्छा है...

 ..जारी...............शेष भाग.........



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