जय श्री कृष्णः.श्री कृष्ण शरणं मम.श्री कृष्ण शरणं मम.चिन्ता सन्तान हन्तारो यत्पादांबुज रेणवः। स्वीयानां तान्निजार्यान प्रणमामि मुहुर्मुहुः ॥ यदनुग्रहतो जन्तुः सर्व दुःखतिगो भवेत । तमहं सर्वदा वंदे श्री मद वल्लभ नन्दनम॥ जय श्री कृष्णः

सोमवार, 6 सितंबर 2010

आपका भाग्य अंक ४ और भविष्य..

आप सोच रहें होंगे, कोई अंक अच्छे या बुरे भी होंगे. नहीं, आप विश्वास कीजिये, कोई भी अंक अच्छा या बुरा नहीं होता . जिस प्रकार कोई भी ग्रह शुभ या अशुभ नहीं होता. हर व्यक्ति के जीवन पर उनका भिन्न भिन्न प्रभाव रहता है.उसी प्रकार अंको का भी हमारे जीवन शैली पर है. अंको की एक सुनिश्चित गति है, स्पष्ट लक्षण है, स्पष्ट अर्थ है. एक क्रम व योजना है. उसे भली प्रकार समझ लें तो मानव जीवन को समझना सरल हो जाता है.

भाग्यांक के लिए जन्म तारीख, जन्म मास्, जन्म वर्ष की आवश्यकता रहती है. सवाल यह है कि भाग्यांक कैसे बनाया जाये ? उदाहरण:- माना किसी की जन्म तिथि २७-०६-१९६२ है तो तारीख को जोड़ा २+७=९, मास् का योग किया तो ०+६= ६, जन्म वर्ष को जोड़ा तो १+९+६+२= १८, अब इन तीनों का जोड़ करेंगे ९+६+१८= ३३ आया इसका फिर एक अंक में परिवर्तन करने के लिए जोड़ेंगे तो ३+३= ६ अंक हमारे सामने आ रहा है बस यही भाग्यांक का अंक है अर्थात उपरोक्त जन्म तिथि के अनुसार हम कह सकते है कि भाग्यांक ६ है. अब भाग्यांक के फल पर भी विचार करते है.

आपका भाग्य अंक ४ है तो:-- अंक ४ यूरेनस और राहू ग्रह का परिचायक है. यह सूर्य के अंक १ से संबंध समझा जाता है अंक विद्या में इसे ४-१ की तरह लिखा जाता है.इस अंक के लोगों का अपना अलग परिचय होता है.यह प्रत्येक चीज को अन्य लोगों से भिन्न कोण से देखते है अर्थात उल्टा, वाद विवाद में हमेशा विरोध में बोलते है.और अनजाने ही गुप्त शत्रु बना लेते है. जो लगातार इनके खिलाफ कार्य करते है. कायदे क़ानून से विरोध की प्रवर्ती रहती है. आप पुराने रीति रिवाजो के खिलाफ व नवीनताओं के समर्थक रहते है. आपके जीवन में अचानक घटनाएं होती है. जिससे आप विचलित हो जाते है. तात्पर्य यह है कि शुभता, अनुकूलता, उन्नति प्रेम, रोमांस प्रतीति, धनागम, भाग्य वृद्धि, रोग, प्रतिकूलता, वैर-विरोध, आदि सब कुछ अकस्मात होता है. जीवन में विश्राम या ठहराव कभी नहीं आता है. क्रियाशील आपका गुण है. उस पार या इस पार. बीच का कोई भी रास्ता नहीं. जीवन में एकदम उन्नति पायेंगे या अवनति का गहरा गर्त. सब मिलाकर आप रहस्यमयी तथा मन का भेद न देने वाले व्यक्ति है. आयु का यथेष्ठ भाग दिखावे, सैर सपाटे, प्रदर्शन, बनाव श्रृंगार, भोग यशोपार्जन में खर्च कर डालते है. घर के सदस्य व लोग आपके प्रति सदैव भ्रम में बने रहते है.वृद्धावस्था कष्टमय रहता है.

व्यवसाय:-- शिक्षक, प्रोफ़ेसर, इंजीनियर, लेखन कार्य, टेक्नीशियन, शराब, स्प्रिट, तेल, केरोसिन, रेल विभाग, छापे का काम, टेलीफोन, ऑपरेटर, शिल्पकार, खनिज कार्य इनमे सफलता प्राप्त होती है.

दिशाएं:-- दक्षिण-पूर्व, दक्षिण-पश्चिम, यह दिशाए अच्छी सफलता देने वाली है.

रंग:-- धूमिल, नीला या स्लेटी रंग इन्हें शुभ फलदायक होते है.

भाग्यशाली वार:-- शनिवार, रविवार, तथा सोमवार, वृहस्पतिवार शुभ है.

प्रेम व मित्रता के लिए भाग्य अंक:--- १, २, ७, ८, इनके साथ प्रेम मित्रता करना तथा व्यवसाय करना शुभ रहता है.

सर्वश्रेष्ठ वर्ष:--- ४, १३, २२, ३१, ३७, ३८, ४७, ५६, ६५, ७४, वर्ष विशेष शुभ दायक है.

शुभ तारीखें:-- ४, १३, २२ और ३१ आपके लिए सदैव शुभ फलदाई होंगी. यह तारीखे व वर्ष जीवन में नया मोड़ लाएंगी..

..........जारी.....शेष..भाग..............


1 टिप्पणी:

  1. अनिल जी प्रणाम . वैसे तो मुझे पहले थोडा बहुत विश्वास ज्योतिष विद्या में था . पर मेरी सास का हाथ जो भी देखता कहता वे सुहागन मरेंगी परन्तु ऐसा नहीं हुआ . लेकिन बार बार अंक ज्योतिष के बारें में जानना चाहती हूँ . अंक ९ के लिए आप ने कुछ नहीं लिखा . क्या इससे भविष्य के बारें में भी जाना जा सकता है जैसे मेरा बेटा आगे क्या करेगा.धन्यवाद

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