जय श्री कृष्णः.श्री कृष्ण शरणं मम.श्री कृष्ण शरणं मम.चिन्ता सन्तान हन्तारो यत्पादांबुज रेणवः। स्वीयानां तान्निजार्यान प्रणमामि मुहुर्मुहुः ॥ यदनुग्रहतो जन्तुः सर्व दुःखतिगो भवेत । तमहं सर्वदा वंदे श्री मद वल्लभ नन्दनम॥ जय श्री कृष्णः

सोमवार, 27 सितंबर 2010

जूते चप्पल बाहर रखेंगे तो बाधाएं दूर होंगी...



वास्तु और ज्योतिष को ध्यान में रख कर बनाया गया मकान सुख समृद्धिदाता होता है. वास्तु में मकान की ऊचाई का विशेष महत्व होता है. मकान की ऊंचाई वास्तु पुरुष से जुड़ी हुई होती है. जिस मकान की ऊंचाई छोटी होती है. उसमें रहने वाले परिवार की समृद्धि छोटी हो कर समाप्त हो जाती है. राशियां बारह होती है उसी अनुपात से मकान की ऊंचाई भी बारह फुट हो तो अच्छा रहता है. क्योंकि बारह फुट ऊंचाई में रहने वाले व्यक्ति को पर्याप्त रोशनी, हवा और प्रकाश मिलता है. जिससे व्यक्ति सदा ही स्वस्थ रहता है और सुख पूर्वक जीवन व्यतीत करता है.

मकान की दांयी तरफ की खिड़कियों का बहुत महत्व होता है. ये व्यक्ति के जीवन और समृद्धि से जुड़ी होती है. मकान की दांयी तरफ की खिड़कियों का प्रतिनिधि ग्रह सूर्य होता है. तथा सूर्य, पुत्र सन्तान का प्रतिन निधि भी है. यदि मकान की दांयी तरफ की खिड़कियां कमजोर और टूटी हुई है तो परिवार में पुरुष संतति कष्ट में रहती है. अगर दांयी खिडकी में दरार है तो परिवार में पुरुष वर्ग पर संकट बना रहता है. दरार राहू तथा केतु का प्रतिनिधित्व करती है. जिन्हें सूर्य का शत्रु माना जाता है. दांयी ओर की मुख्य खिडकी रसोई में खुलती है तो परिवार में पुरुष वर्ग के लिए शुभ होता है. क्योंकि सूर्य खिडकी का प्रतिनिधि है, शुक्र रसोई घर का प्रतिनिधि है, और मंगल अग्नि का कारक है. ऐसे घर में रहने वाले लोग पत्नी के सहयोगी होते है.

यदि दांयी ओर की खिडकी किसी गोदाम में या स्टोर में खुलती है या किसी भी तरह का खिडकी में दोष उत्पन्न हो रहा हो तो पिता-पुत्र में आपस में नहीं बनती है. वे सदा किसी ना किसी बात पर पर आपस में लड़ते ही रहते है. परिवार के पुत्र तमोगुणी होने लगते है. घर में सूर्य का प्रकाश पहुंचना बहुत ही जरूरी होता है. जिस घर में सूर्य का प्रकाश नहीं पहुंचता है, पूर्व में कोई खिडकी नहीं होती है. या घर के अन्दर दिन में भी अँधेरा रहता है, गेंहू आदि खाने पीने की चीजों पर प्रकाश की किरणें नहीं पहुँचती है तो समझ लीजिए उस घर में सूर्य-शनि का कुप्रभाव है. ऐसे घर के स्वामी और परिजनों को नींद ना आने की बिमारी, शरीर में टूटन, बेचैनी सदा ही बनी रहेगी.

किसी भी घर में दांयी या बाँयी खिडकी, आगंतुक व्यक्ति के प्रवेश एवं निकलने के समय दांयी ओर व बाँयी ओर की खिडकी का विचार किया जाता है. घर में बाँयी खिडकी का प्रति निधि ग्रह चन्द्रमा है. ज्योतिष में चन्द्रमा स्त्री ग्रह है और जगत माता का रूप है. अगर घर की बाँयी ओर वाली खिडकी ठीक ठाक है. उनमे से पर्याप्त हवा व प्रकाश घर में आ रहा है तो तो कोई गंभीर समस्या घर में उत्पन्न नहीं होती है. घर की बेटियाँ तथा स्त्रियाँ हमेशा सुखी रहती है. इसके विपरीत घर के बाँयी ओर यदि खिड़कियां ही ना हो तो घर में एक व्यक्ति अवश्य ही निठल्ला रहता है. और वह मानसिक रूप से भी विकृत एवं बीमार रहता है. चन्द्रमा मस्तिष्क का स्वरूप है. और घर में बाँयी ओर का भाग पाप ग्रह केतु से प्रभावित रहता है.

अगर घर में बाँयी खिडकी के आसपास या सामने दरार होती है तो वंहा केतु पाप ग्रह का प्रभाव अवश्य होने लगता है. इसके प्रभाव से घर में स्त्रियाँ सदा ही रोग से पेशान रहेंगी व मानसिक रूप से भी चिडचिडी रहेंगी. उनका किसी काम में मन नहीं लगेगा. इसलिए वास्तु और ज्योतिष दोनों के अनुसार घर या भवन के दांयी और बाँयी खिड़कियां सूर्य देव तथा चंद्र देव का प्रतिनिधित्व करती है. साथ ही यह दोनों ग्रह हमेशा राहू व केतु से भी प्रभावित रहते है. यही कारण है

कि यदि कोई जूते या चप्पल पहन कर घर या भवन में प्रवेश करता है तो राहू तथा केतु ग्रह भी उसके साथ प्रवेश कर जाते है. इसलिए घर में प्रवेश करते समय जूते, चप्पल बाहर उतारे जाने का प्रचलन हमारे शास्त्रों में था जिससे कि घर में कोई बाधा या रुकावट ना आए. अभी भी यदि इन नियमों को हम घर में अपना ले तो जीवन सुखी बना सकते है क्योंकि जब जीवन में बाधा या रुकावट ही नहीं रहेगी तो फिर हमारा जीवन सुख समृद्धि से परिपूर्ण रहेगा ...

शुभमस्तु!!



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