जय श्री कृष्णः.श्री कृष्ण शरणं मम.श्री कृष्ण शरणं मम.चिन्ता सन्तान हन्तारो यत्पादांबुज रेणवः। स्वीयानां तान्निजार्यान प्रणमामि मुहुर्मुहुः ॥ यदनुग्रहतो जन्तुः सर्व दुःखतिगो भवेत । तमहं सर्वदा वंदे श्री मद वल्लभ नन्दनम॥ जय श्री कृष्णः

शुक्रवार, 15 अक्तूबर 2010

सूर्य देव आपकी मनोकामना भी पूर्ण करते है ..


हमारे प्राचीन धार्मिक ग्रंथो में भगवान सूर्य देवता का महत्वपूर्ण स्थान है, और हमारे जीवन में भी सूर्य प्रत्यक्ष देवता के रूप में विद्यमान है. चाहे कोई माने या न माने सूर्य देव ने तो सारे जगत को प्रकाश देना है. भगवान सूर्य देवता प्रत्येक देश, जाति, धर्म तथा प्रत्येक जीव, पशु आदि कोई भी हो किसी से भी भेद भाव नहीं रखते है. अर्थात समस्त जगत को एक समान अपनी ऊर्जा प्रदान करते है, यह हमारी क्षमता पर निर्भर करता है कि हम उसका कितना लाभ लेने में सक्षम होते है.


प्राचीन धार्मिक ग्रंथों में सूर्य देव का एक बहुत ही सुन्दर व् प्रभावशाली स्तोत्र का वर्णन है. जिसे सूर्य द्वादशनाम स्तोत्र के नाम से भी जाना जाता है. यह बहुत ही चमत्कारी फल देने वाला है. पिछले कई वर्षों से इसका प्रभाव देखने में आ रहा है. जो भी व्यक्ति श्रद्धापूर्वक नित्य प्रातःकाल इस स्तोत्र का पाठ करता है, उसे निम्नलिखित लाभ प्राप्त होने लगते है.


१:- उसे दुस्वप्न नहीं आते है.

२:- उसे सर्वसिद्धि प्राप्त होती है. अर्थात उसके हर कार्य भगवान श्री सूर्य देवता की कृपा से पूर्ण होते है.

३:- उसकी पूर्ण आयु होती है, अर्थात उसकी अकाल मृत्यु नहीं होती है.

४:- उसका शारीर स्वस्थ बना रहता है. तथा तेजोमय होता है.

५:- उसके परिवार में अमन चैन रहता है. वंशवृद्धि होती है. तथा ऐसे अनेक लाभ प्रयोगकर्ता को होते है.

इस सूर्य द्वादशनाम स्तोत्रका पाठ पूर्व की ओर मुंह करके किसी आसान पर बैठ कर किया जा सकता है.

स्तोत्र निम्न अनुसार है:--

आदित्य: प्रथमं नाम द्वितीयं तु दिवाकर:,‌‌

तृतीयं भास्कर:प्रोक्तं चतुर्थ च प्रभाकर:!!१!!

पंचम च सहस्त्रांशु: षष्ठं चैव त्रिलोचन:,

सप्तमं हरिदश्वश्च अष्टमं च विभावसु:!!२!!

नवमं दिनकृत प्रोक्तम दशमं द्वाद्शात्मकम:,

एकादशं त्रयोमुर्तिर्द्वादाशं सूर्य एवं च !!३!!

द्वादशैतानि नामानि प्रातःकाले पठेन्नरः,

दु:स्वप्ननाशनं सद्यः सर्वसिद्धि प्रजायते !!४!!

आयुरारोग्यमेश्वर्य पुत्रपौत्र प्रवर्धनम्,

एहिकामुष्मिकादिनि लभन्ते नाऽत्र संशय:!!५!!

इति सूर्य द्वादशनाम स्तोत्र सम्पूर्णम् !

किसी भी मास के शुक्ल पक्ष के प्रथम रविवार से इसका पाठ आरम्भ करें, आप स्वयं अनुभव करेंगे कि पाठ का प्रभाव आपके जीवन में खुशिया व् हर प्रकार की बाधाओं को दूर कर के आपका यश मान और एश्वर्य की वृद्धि कर रहा है.

शुभमस्तु !!



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