जय श्री कृष्णः.श्री कृष्ण शरणं मम.श्री कृष्ण शरणं मम.चिन्ता सन्तान हन्तारो यत्पादांबुज रेणवः। स्वीयानां तान्निजार्यान प्रणमामि मुहुर्मुहुः ॥ यदनुग्रहतो जन्तुः सर्व दुःखतिगो भवेत । तमहं सर्वदा वंदे श्री मद वल्लभ नन्दनम॥ जय श्री कृष्णः

बुधवार, 20 अक्तूबर 2010

आईने का संभल कर प्रयोग करे…




दर्पण (आइना) के उचित प्रयोग चमत्कारिक शुभ परिणाम प्रदान करते है और अनुचित प्रयोग अनिष्टकारक परिणाम प्रदान करते है. प्राणऊर्जा ची को संतुलित करने के लिए दर्पण(आईने) फेंगशुई में क्रान्तिकारी उपाय है. और दर्पण से मिलने वाले परिणाम शीघ्र प्राप्त होते है. यह दोष से मिलने वाले अशुभ परिणामों को शुभ परिणाम में परिवर्तित कर देता है. फेंगशुई में दर्पण (आईना) से आशय उन समस्त चमकीली और परावर्तक वस्तुओं से है, जिसमे प्रतिविम्ब को देखा जा सकता है, जैसे- दर्पण(आईना), चमकीली पालिश युक्त धातु की प्लेट, चमकीला फर्श इत्यादि.


दर्पण सदैव उत्तर अथवा पूर्व दिशा की ओर लगाए जाने पर ही शुभ होते है. दर्पण जितने हलके और बड़े होंगे, उनका प्रभाव उतना ही अधिक होगा. उत्तर और पूर्व की दीवार पर वर्गाकार, आयताकार, अष्टभुजाकार दर्पण ही लगाने चाहियें, गोल दर्पण कभी नहीं, क्योंकि गोल दर्पण में समस्त ऊर्जा उसके निचले बिंदु पर केंद्रित हो जाती है. जो भार वजन का प्रतिनिधित्व करती है.

भवन में नुकीले व् तेजधार वाले दर्पण नहीं लगाने चाहियें. ये हानिकारक होते है. दर्पण का टूटना अशुभ माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि कोई मुसीबत इस दर्पण पर टल गयी है टूटे दर्पण को तुरंत ही कटवा कर वर्गाकार, आयताकार, अष्टभुजाकार दर्पण में परिवर्तित कराकर शेष भाग को फेंक देना चाहिए. अत: भवन में दर्पण. आईना अथवा शीशे का प्रयोग करने में निम्नलिखित सावधानियों का पालन करना अत्यंत आवश्यक होता है.

१:- आवासीय भवन अथवा व्यावसायिक भवन में ईशान (उत्तर-पूर्व) क्षेत्र में दर्पण लगाना चाहिए इसके लगाने से आय में वृद्धि होने लगती है. और व्यवसायिक सम्बन्धी बाधाए दूर होती है.

२:- आवासीय भवन अथवा व्यावसायिक भवन में दक्षिण, पश्चिम, आग्नेय, वायव्य एवं नैऋत्य दिशा में दीवारों पर लगे हुए दर्पण अशुभ होते है. यदि आपके यहां इस प्रकार के दर्पण लगे हुए है, तो उन्हें तुरंत हटा देना क्क्स्हाहिये अथवा ढक देना चाहिए.

३:- आवासीय भवन अथवा व्यावसायिक भवन में यदि वायव्य कोण कटा हुआ है, तो कटे हुए भाग की पूरी उत्तरी दीवार पर तीन से चार फुट चौड़ा दर्पण लगाया जा सकता है. इससे इस दोष से मुक्ति मिलती है.

४:- दुकानों और शोरूमों की छत पर दर्पण लगाने की परम्परा आधुनिक युग में है. दूकान और शोरूम के ईशान और मध्य में छत पर दर्पण नहीं लगाना चाहिए. एनी भागो में दर्पण लगाने से आय में वृद्धि होती है.

५:- यदि किसी कारण से आपके भवन और व्यवसाय स्थल का ईशान कोण नैऋत्य कोण से ऊंचा है, तो ईशान कोण की ओर फर्श में आधे से एक फुट चौड़ा दर्पण लगाए तो लाभ का मार्ग प्रशस्त होगा.

६:- कमरें में दरवाजे के अंदर की ओर दर्पण नहीं लगाना चाहिए यदि दरवाजा ईशान दिशा की ओर हो तो दर्पण लगाया जा सकता है.

इस प्रकार हम देखते है कि फेंगशुई और वास्तु शास्त्र में भिन्नता होते हुए भी अनेक समानताये है फेंगशुई के सिद्धांतों को भारतीय परिवेश के अनुसार प्रयोग कर आप समुचित लाभ प्राप्त कर सकते है.

शुभमस्तु !!



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