जय श्री कृष्णः.श्री कृष्ण शरणं मम.श्री कृष्ण शरणं मम.चिन्ता सन्तान हन्तारो यत्पादांबुज रेणवः। स्वीयानां तान्निजार्यान प्रणमामि मुहुर्मुहुः ॥ यदनुग्रहतो जन्तुः सर्व दुःखतिगो भवेत । तमहं सर्वदा वंदे श्री मद वल्लभ नन्दनम॥ जय श्री कृष्णः

गुरुवार, 21 अक्तूबर 2010

दक्षिणमुखी भवन भी लाभदायक होते है..




दक्षिणमुखी भवन को अधिकाँश लोग ठीक नहीं मानते और इस दिशा के भवन पर अनेक प्रकार की प्रतिक्रियाएं देते है. लेकिन उनका यह मानना गलत है. कि दक्षिणमुखी भूखण्ड या भवन रहने की दृष्टि से अच्छे नहीं होते है. आज यह अनुभव में आया है कि वास्तु और जन्मकुंडली के अनुसार बनाया गया दक्षिणमुखी भवन भी अन्य मुखी भवनों से किसी भी रूप से कम श्रेष्ठ नहीं होता है.

वैसे तो पूर्व या उत्तरामुखी भवन वास्तु अनुरूप ना हो तो वे भी महाविनाशकारी होते है. अर्थ का अनर्थ हो जाता है. वही दिशा और भूखण्ड या भवन रहने योग्य है जिस पर भवन निर्माण वास्तु अनुकूल किया गया होता है. दक्षिणमुखी भूखण्ड या भवन को लेकर इस तरह की भ्रान्ति ठीक नहीं है.


दक्षिणमुखी भूखण्ड या भवन में दक्षिण-पूर्व दिशा का स्थान शुभ होता है. तथा दक्षिण-पश्चिम का स्थान अशुभ होता है. दक्षिण दिशा गृहिणी के स्वास्थ्य तथा जीवन के उत्थान में मदद करती है. इसलिए घर की दक्षिण दिशा का विशेष ध्यान रखना चाहिए.

दक्षिणमुखी भूखण्ड या भवन के दक्षिण-आग्नेय क्षेत्र में मुख्य द्वार होता है तो सब शुभ ही होता है. यहां से प्रवेश करने वाले का मुंह उत्तर-ईशान की तरफ होने की वजह से आर्थिक प्रगति में बढ़ोतरी होती है. उत्तर-ईशान आर्थिक उत्थान की दिशा मानी गयी है. इसलिए दक्षिण दिशा में गड्ढे या सेप्टिक टैंक, बोरवेल भूल कर भी नहीं बनवाना चाहिए. दक्षिणमुखी घर के दक्षिण-आग्नेय में मुख्यद्वार, ड्राइंगरूम, रसोईघर, ऑफिस, शौचालय या गेस्टरूम बनाया जाए तो यह निर्माण वास्तु अनुकूल होता है. और गृहस्वामी की सुख समृद्धि में वृद्धि होती है. छोटे बच्चों का शयन कक्ष भी यंही होना चाहिए.

दक्षिण दिशा का स्तर दक्षिण-नैऋत्य को छोड़कर शेष दूसरे क्षेत्रों से ऊंचा होना चाहिए. यंहा बोरवेल, सेप्टिक टेंक, अंडरग्राउंड वाटर टेंक नहीं होना चाहिए. इससे यह क्षेत्र हल्का और नीचा हो जाता है. जिससे वास्तु दोष उत्पन्न हो जाता है. और परेशानियां बढ़ जाती है.

घर के दक्षिण में शयन कक्ष, ड्राइंगरूम, सीडियां और टायलेट बनाया जा सकता है. यह दिशा शयन कक्ष के लिए अति उत्तम मानी गयी है.

सम्पूर्ण भवन के दक्षिण-नैऋत्य में मुख्यद्वार, गड्ढे, बोरवेल, सेप्टिक टेंक, अंडरग्राउंड वाटर टेंक बनाना मना है.

यंहा पर इन चीजों का निर्माण गृहस्वामी एवं उसकी पत्नी को लंबी एवं असाध्य बिमारी को देता है. यंहा पर ऊँचे पेड़ लगाए जा सकते है. दक्षिण-नैऋत्य में गृहस्वामी और उसकी पत्नी के लिए शयन कक्ष बनाए जाए तो बहुत ही शुभ होता है.

यदि इन सभी बातों का ध्यान तथा किसी योग्य बास्तु व् ज्योतिष शास्त्र के विद्वान से परामर्श लिया जाए तो दक्षिणमुखी भूखण्ड और भवन द्वारा हम उन्नति का मार्ग प्रशस्त कर सकते है.

शुभमस्तु !!


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