जय श्री कृष्णः.श्री कृष्ण शरणं मम.श्री कृष्ण शरणं मम.चिन्ता सन्तान हन्तारो यत्पादांबुज रेणवः। स्वीयानां तान्निजार्यान प्रणमामि मुहुर्मुहुः ॥ यदनुग्रहतो जन्तुः सर्व दुःखतिगो भवेत । तमहं सर्वदा वंदे श्री मद वल्लभ नन्दनम॥ जय श्री कृष्णः

शनिवार, 23 अक्तूबर 2010

करवा चौथ का ज्योतिष से सम्बन्ध..




त्यौहार, उत्सव आदि सभी प्रेम और सद्भाव बड़ाने के लिए होते है, लेकिन करवा चौथ व्रत ऐसा व्रत है जो कि पति पत्नी के प्रेम और स्पंदन को नई ताजगी मजबूती के साथ ताजा कर देता है.करवा चौथ का व्रत कई किस्से कहानियों से जुड़ा हुआ है, लेकिन इसका सार यही है कि इसे सुहागिनें अपने पति की लंबी आयु के लिए करती है.प्यार का इजहार करने और प्यार प्यार को मजबूती से जताने का जरिया बनने वाला करवा चौथ अब युवाओं के दिल में भी जगह बना रहा है.


हमारें शास्त्रों में चंद्रमा का विशेष महत्व है. और चन्द्र मॉस के अनुसार ही सारे पर्व मनाये जाते है. लगभग सभी धर्मों में चंद्रमा की सत्ता को स्वीकार किया है.इसी प्रकार ज्योतिष शास्त्र में चन्द्र कुंडली का भी विचार गोचर फल प्राप्त करने के लिए किया जाता है. आज यह विषय नहीं है आज केवल करवा चौथ और ज्योतिष के सम्बन्ध का विषय है कि आखिर करवा चौथ को इतना महत्व ही क्यों ?



वर्ष में सभी पर्वो का कुछ न कुछ सम्बन्ध ज्योतिषीय आधार पर स्थित होता है. और इन पर्वो के नाम भी इसी आधार पर रखे गए है. बारह महीनों में शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष के अनुसार कुल चौबीस चौथ अर्थात चतुर्थी तिथि गणना में आती है या इसे हम चौबीस गणेश चतुर्थी के नाम से भी जानते है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार राशि चक्र के चार विशेष बिंदुओं पर जब सूर्य देवता भ्रमण करते है तो विशेष पर्व के रूप में हम मनाते है. जैसे:- उतरायण यानि मकर संक्रांति के पास जो चतुर्थी होती है वह संकट चौथ कहलाती है. वैशाखी(संक्रान्ति) के पास दमनक चौथ या गण गौर, कर्क सिंह की सक्रान्ति के पास हरियाली तीज और गणेश जयंती चौथ, तुला सक्रान्ति के पास करक या करवा चौथ होती है. इन सबमे गणेश जी का व्रत, पूजा, बडों का सम्मान और प्रत्यक्ष देवता चंद्रमा, सूरज, हवा, जल आदि को नमस्कार करने का अति महत्व है.

वास्तव में गणेश जी को महाभारत के एक सन्दर्भ में सीधे शिव पार्वती का संयुक्त रूप ही कहा है जो कि सत्य भी है.कारण, आप शिव पार्वती के पुत्र है.सभी जीवगणौ, देवगणों के ईश होने से आपका सर्वदेवमय गणेश नाम सार्थक है.

अनादि काल से चले आ रहे स्त्री पुरुष के आपसी रिश्ते को स्थाई और कल्याणकारक बनाने के लिए ब्याह शादी के समय शिव पार्वती की तरह दो जीव एक देह या अर्धनारीश्वर स्वरुप होने का आशीष देने की हमारी परम्परा रही है. इन्ही का संयुकत रूप होने से गणेश चौथ खुद ही सुहाग या पति के लंबे, स्वस्थ और सुखी जीवन से जुड़ जाते है.

ज्योतिष शास्त्र में वर्णित बारह सूर्य, ग्यारह रूद्र, आठ वसु और दो अश्विनी कुमार मिलकर तैंतीस देवता माने जाते है. ये ही मुख्य देवगण कहे गए है. यदि और गहराई में चले तो दस विश्वेदेव, छत्तीस तुषित, चौसठ आभास्वर, उनचास वायु और दो सौ बीस महाराजिक मिलकर कुल चार सौ बारह गण यानि समूह देवताओं के स्वामी श्री गणेश जी महाराज है. अत: एक गणेश पूजन से इन सबकी पूजा मनौती एक साथ ही हो जाती है.

करवा नाम क्यों ?

करक संस्कृत शब्द का अर्थ हिंदी में करवा यानि अर्घ्य पात्र है. करक में साक्षात देव चन्द्र को अर्घ्य देने के लिए निहित जल रखने के कारण आम जनता इसे करक चतुर्थी या करवा चौथ के नाम से पुकारती है. सिन्दूर गणेश जी का गहना है, अत: सुहाग की निशानी माना गया है. इनके सर पर बाल चंद्रमा है, अत: उगते चाँद को अर्घ्य देकर व्रत खोलने का नियम है.

इसलिए अर्घ्य देकर आप अपने प्राणनाथ, पति परमेश्वर, शरीके हयात, जानू, हबी वगैरह के प्रति अपना प्यार जताए. एक करवा चौथ व्रत के द्वारा स्त्री या प्रमिका कई देवताओं को प्रसन्न कर सदा सुहागिन का आशीर्वाद प्राप्त कर लेती है.

शेष अगले भाग में.........


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