जय श्री कृष्णः.श्री कृष्ण शरणं मम.श्री कृष्ण शरणं मम.चिन्ता सन्तान हन्तारो यत्पादांबुज रेणवः। स्वीयानां तान्निजार्यान प्रणमामि मुहुर्मुहुः ॥ यदनुग्रहतो जन्तुः सर्व दुःखतिगो भवेत । तमहं सर्वदा वंदे श्री मद वल्लभ नन्दनम॥ जय श्री कृष्णः

गुरुवार, 14 अक्तूबर 2010

कौआ (Crow)के शकुन-अपशकुन संकेत समझे ..




प्राय: यात्राकाल में अथवा घर के आसपास कौआ कुछ विशिष्ट संकेत देता है.शुभ संकेतों से तो कोई परेशानी नहीं होती है,बल्कि खुशी होती है जबकि अशुभ संकेत के कारण कोई भी अचानक किसी भी ऋणात्मक घटना को सोचकर शंकित हो उठता है. कौए से कोई भी ऋणात्मक संकेत प्राप्त होने की दशा में उपाय करने के पूर्व हम कौए से प्राप्त होने वाले कुछ शुभ व् अशुभ संकेतों को देखते है.—

यदि कौआ मनुष्य के आगे कोई भी लाल वास्तु डाल देता है तो उसके जेल होने की बात बतलाता है.


यदि कोई पीले रंग का द्रव्य कौआ सामने गिराता है तो उससे सोने-चांदी की प्राप्ति सूचित होती है. दरअसल वह जिस द्रव्य को अपने पास ला देता है उसकी प्राप्ति और जिस द्रव्य को अपने यहां से उठा लेता है, उसकी हानि की और संकेत करता है.

यदि कौआ अपने आगे कच्चे मांस लाकर डाल दे तो धन की, मिट्टी गिरावे तो पृथ्वी की, और कोई रत्न डाल दे तो महान साम्राज्य की प्राप्ति होती है.

यदि यात्रा करने वाले की अनुकूल दिशा (सामने) की और कौआ जाए तो वह कल्याणकारी और कार्यसाधक होता है. परन्तु यदि प्रतिकूल दिशा की और जाए तो वह उसे कार्य में बाधा डालने वाला तथा भयंकर जानना चाहिए.

यदि कौआ सामने काँव-काँव करता हुआ जाय तो वह यात्रा के लिए विघातक होता है. कौए का वाम भाग में होना शुभ माना गया है. और दक्षिण अर्थात दाहिने भाग में होने पर वह कार्य का नाश करता है. वाम भाग में होकर कौआ यदि अनुकूल दिशा की और चले तो मध्यम माना जाता है. किन्तु बाम भाग में होकर यदि वह विपरीत दिशा की और जाय तो यात्रा का निषेध करता है.

यात्रा काल में यदि घर पर कौआ आ जाय तो वह अभीष्ट कार्य की सिद्धि सूचित करता है.

यदि कौआ एक पैर उठा कर एक आँख से सूर्य की और देखे तो भय देने वाला होता है.

यदि कौआ किसी वृक्ष के खोखले में बैठ कर आवाज दे तो वह महान अनर्थ का कारण है. ऊपर भूमि पर बैठा हो तो भी अशुभ होता है, किन्तु यदि वह कीचड़ में लिपटा हुआ हो तो उत्तम माना गया है.

जिसकी चौंच में मल आदि अपवित्र वस्तुंए लगी हो, वह कौआ दिख जाता है तो सभी कार्य का साधक है. कौए की भाँती अन्य पक्षियों का भी यही फल जानना चाहिए.

कौआ द्वारा किसी भी अनिष्टकारी अथवा अशुभ सूचना मिलने पर निम्न प्रयोग करना अशुभत्व का नाश करता है.

जहाँ भी कौए आते हो वहाँ जा कर कुछ ऐसे पदार्थ अर्पित करे या खिलावें जो कि कौए पसंद करते हो. जब कौए बैठ कर उन पदार्थो का भक्षण करे उस समय दूर से ही कुंकुम-अक्षत के द्वारा या मानसिक भाव से कामना करे कि हे काकभुशुण्डी देवता ! हमारे ऊपर कृपा करे तथा हम पर आने वाले अभीष्ट से हमारी रक्षा करे.. ऐसा करने से दोष दूर हो जाता है.

जिस पेड़ पर कौए ने कोई घोंसला बना रखा हो उस पेड़ के नीचे चींटियो के लिए थोड़ी सी शक्कर डालें अथवा पेड़ पर दूध अर्पित करें.

यात्रा काल में अशुभत्व लक्षण प्रकट होने पर गरीबों को यथायोग्य दान करे...यात्रा के बीच में ही किसी देवालय में भगवान के दर्शन करें तब आगे बड़ें..

इन उपायों के करने से कौआ अपशकुन के समस्त दोष दूर होते है.

शुभमस्तु...





2 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (15/10/2010) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा।
    http://charchamanch.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  2. चर्चा मंच पर शामिल करने के लिए आपका बहुत धन्यवाद.

    उत्तर देंहटाएं

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