जय श्री कृष्णः.श्री कृष्ण शरणं मम.श्री कृष्ण शरणं मम.चिन्ता सन्तान हन्तारो यत्पादांबुज रेणवः। स्वीयानां तान्निजार्यान प्रणमामि मुहुर्मुहुः ॥ यदनुग्रहतो जन्तुः सर्व दुःखतिगो भवेत । तमहं सर्वदा वंदे श्री मद वल्लभ नन्दनम॥ जय श्री कृष्णः

रविवार, 17 अक्तूबर 2010

रहस्यमय गाँठ(Mystic Knot)…..



इस रहस्यमय गाँठ को प्यार की गाँठ भी कहते है. इसका न कोई आदि होता है और न ही कोई अंत. वास्तु और फेंगसुई में इसके अनेक चमत्कार देखने को मिलते है.

यह एक तरह का जीवन चक्र है. यह बौद्ध धर्म की इस विचारधारा को प्रतिविम्बित करता है कि मानव-अस्तित्व जन्म-जन्मांतर का कभी न खत्म होने वाला चक्र है.


आध्यात्मिक परम्परा में यह प्रतीक बहुधा भाग्यशाली प्रतीक माना जाता है, पर सांसारिक स्तर पर इसे अमर प्रेम तथा परिवार के सदस्यों के बीच एकता का उत्कृष्ट प्रतीक माना जाता है.

यह हताशा, बिछोह, वेदना अथवा पराजय से रहित दीर्घ आयु का भी प्रतीक है. रहस्यमय गाँठ अनेक रंगों की होती है. आज चर्चा लाल रंग की करते है. यह लाल रंग की रहस्यमय गाँठ को आप अपने शयनकक्ष में दक्षिण-पश्चिम दिशा के कोने में रख सकते है. इससे पति-पत्नी के संबंधो में प्रगाड़ता अर्थात प्रेम की वृद्धि होती है.

यदि आप अपने परिवार के सदस्यों के बीच सम्बन्ध सुधारने के लिए इसका उपयोग करना चाहते है तो इस रहस्यमय गाँठ को दीवानखाने में दक्षिण-पश्चिम दिशा के कोने में लगाए. आप देखेंगे कि कुछ ही दिनों में परिवार के सदस्य आपस में प्रेम पूर्वक रहने लगे है. और घर का क्लेश समाप्त होता जा रहा है.

यदि इसे कार्यालय में दक्षिण-पश्चिम दिशा के कोने में रखा जाए, तो इससे कार्यालय के कर्मचारियों एवं मालिक के बीच मधुर सम्बन्ध स्थापित होते है. यह कर्मचारियों की मालिक के प्रति निष्ठा एवं मालिक द्वारा कर्मचारियों का अधिक ध्यान रखने का प्रतीक साबित होगा.

इस गाँठ का उपयोग आप किसी भी जगह पर दक्षिण-पश्चिम दिशा के कोने पर यदि करते हो तो समझ लो कि उस स्थान पर प्रेम की वर्षा होनी आरम्भ हो जायेगी........

शुभमस्तु !!



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