जय श्री कृष्णः.श्री कृष्ण शरणं मम.श्री कृष्ण शरणं मम.चिन्ता सन्तान हन्तारो यत्पादांबुज रेणवः। स्वीयानां तान्निजार्यान प्रणमामि मुहुर्मुहुः ॥ यदनुग्रहतो जन्तुः सर्व दुःखतिगो भवेत । तमहं सर्वदा वंदे श्री मद वल्लभ नन्दनम॥ जय श्री कृष्णः

बुधवार, 17 नवंबर 2010

दान देने से पहले जरा सोच लें(भाग 2)..




भारतीय संस्कृति में दान को एक शुभ कार्य माना जाता है. दान करने से व्यक्ति को दैवीय कृपा एवं सहायता प्राप्त होती है.यह मानकर धार्मिक श्रद्धालु दान देने के लिए प्रेरित होते है. इसके अतिरिक्त विभिन्न ग्रहों की पीड़ा को दूर करने के लिए भी दान का अत्यंत महत्व होता है. यह ध्यान रखना अति आवश्यक है कि दान हमेशा शुभ फल नहीं देता कभी कभी इसके भयंकर परिणाम भी देखने को मिलते है.भारतीय ज्योतिष के अंतर्गत लाल किताब का एक अनूठा सिद्धांत है कि किस व्यक्ति को कोन सा दान शुभ है और किस वस्तु का दान अशुभ होता है. इस सम्बन्ध में मेने इसी सन्दर्भ में एक लेख इसी ब्लॉग में दान देने से पहले जरा सोच लें.. नामक लिखा था. आज उसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए नई जानकारी आपको देने का प्रयास कर रहा हूं.


जन्मकुंडली में जो ग्रह अपनी उच्च राशि में स्थित होते है व्यक्ति को उन उच्च राशि के ग्रहों से सम्बंधित वस्तुओं का दान अपने जीवन में कभी नहीं करना चाहिए. जैसे किसी की जन्मकुंडली में चंद्रमा उच्च राशि का हो तो उसे जीवन भर चांदी, दूध आदि का दान करना उलटा कष्टों में डाल देगा. इसी प्रकार से जो ग्रह नीच राशि के होकर जन्मकुण्डली में स्थित हो तो उनका दान या गिफ्ट लेना उस व्यक्ति के लिए अशुभ फलदायी हो जाएगा. जैसे किसी व्यक्ति की जन्मकुण्डली में शनि यदि नीच राशि का होकर स्थित हो तो उस व्यक्ति को कभी भी लोहा आदि की वस्तुएं किसी से दान या गिफ्ट स्वरुप नहीं स्वीकार करनी चाहिए.


अपने पुत्र या पुत्री के विवाह के समय इन सूत्रों का विशेष रूप से ध्यान रखा जाय कि हम अपनी संतान की जन्मकुण्डली अनुसार गिफ्ट दे तो वह जीवन भर सुख पूर्वक रहे. किसी विद्वान ज्योतिषी से सलाह अनिवार्य रूप से आपको लाभ प्रदान कर सकती है.


ग्रहों की उच्च राशि एवं नीच राशि कोनसी होती है इसकी जानकारी के लिए तालिका दे रहा हूं.


ग्रह

उच्च राशि

नीच राशि

सूर्य

मेष

तुला

चन्द्र

वृष

वृश्चिक

मंगल

मकर

कर्क

बुध

कन्या

मीन

वृहस्पति

कर्क

मकर

शुक्र

मीन

कन्या

शनि

तुला

मेष

सूर्य:- जिस कुंडली में सूर्य उच्च राशि का होकर स्थित होता है उस व्यक्ति को लाल रंग की वस्तुओं का दान नहीं करना चाहिए. लाल फूल वाले पौधे या पेड़ नहीं उखाड़ने चाहिए. इसका भारी दोष उसके पिता और पुत्र पर पडता है. यदि जन्मकुण्डली में सूर्य देव नीच राशि में हो तो इन व्यक्तियों को कभी भी लाल रंग की वस्तुएं नहीं लेनी चाहिए. ऐसे व्यक्ति को सोने से सम्बंधित आभूषण भी उपहार स्वरुप नहीं ग्रहण करने चाहिए.

चंद्रमा:- यदि व्यक्ति की जन्मकुण्डली में चन्द्र उच्च राशि में हो तो उसे पानी का दान करना, प्याऊ आदि का संचालन करना सदैव हानिप्रद रहेगा. वही चन्द्र यदि नीच राशि का हो कर स्थित हो तो उस व्यक्ति को कभी भी निशुल्क प्याऊ पर पानी भी नहीं पीना चाहिए.

मंगल:- अगर मंगल की स्थिति जन्मकुण्डली में उच्च राशि की हो तो उस व्यक्ति को अपनी भूमि या किसी भी प्रकार की संपत्ति दान नहीं करनी चाहिए. यदि मंगल जन्मकुण्डली में नीच राशि का होकर स्थित हो तो भूमि संपत्ति का दान या उपहार नहीं लेना चाहिए चाहे वह पैतृक संपत्ति ही क्यों ना हो इस सन्दर्भ में उसे अपने पूर्वजो के नाम से उस भूमि संपत्ति से थोड़ा दान कर देना चाहिए तो वह भूमि संपत्ति शुभ फलदायी होगी अन्यथा पारिवारिक क्लेश तथा संतान को कष्ट मिलने की आशंका बनी रहती है. और किसी भी प्रकार के पत्थर का दान उच्च राशि वाले व्यक्ति को नहीं करना चाहिए.

बुध:- यदि बुध की स्थिति उच्च हो तो उस व्यक्ति को अपने घर से हरी वस्तुओं का दान या किसी को कोई पौधा आदि उपहार नहीं करना चाहिए.और किसी भी प्रकार का साहित्य एवं पुस्तक भी किसी को उपहार स्वरुप नहीं देनी चाहिए. यदि नीच राशि की स्थिति हो तो हरे भरे पौधे, और पुस्तके किसी से भी मुफ्त नहीं लेनी चाहिए.

वृहस्पति:- किसकी जन्मकुण्डली में वृहस्पति उच्च राशि का होकर शुभ फल प्रदान कर रहा हो तो उस व्यक्ति को जीवन भर धार्मिक कार्यों, मंदिर आदि धार्मिक कार्यों से जुड़े काम के लिए धन का दान नहीं करना चाहिए. यदि वृहस्पतिदेव नीच राशि से सम्बन्ध रखते हो तो उस धार्मिक व्यक्तियों एवं साधू सन्यासियों से किसी भी प्रकार का ताबीज आदि कोई भी वस्तु स्वीकार नहीं करनी चाहिए.बहुत हानिप्रद रहेगा.

शुक्र:- जिसकी जन्मकुण्डली में शुक्र ग्रह उच्च राशि का होकर बैठा हो तो उसे एश्वर्य पूर्ण वस्तुएं, मनोरंजक एवं सौंदर्य से सम्बंधित वस्तुएं किसी दूसरे को दान या गिफ्ट नहीं करनी चाहिए. यदि शुक्र नीच राशि में हो तो उसे एश्वर्य पूर्ण वस्तुएं, मनोरंजक एवं सौंदर्य से सम्बंधित वस्तुएं किसी दूसरे से उपहार या किसी भी रूप से स्वीकार नहीं करनी चाहिए.

शनि:- यदि शनि देव की स्थिति जन्मकुण्डली में उच्च हो तो उसे व्यर्थ परिश्रम और भ्रमण नहीं करना चाहिए. और लोहा, वाहन आदि को उपहार या दान स्वरूप नहीं लेना चाहिए. यदि नीच राशि का होकर जन्मकुण्डली में स्थित हो तो उसे कभी भी किसी से मुफ्त काम नहीं करवाना चाहिए. तथा मजदूर आदि श्रमिक को हमेशा प्रसन्न रखने से शुभ फल की प्राप्ति होने लगती है.

शुभमस्तु !!



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