जय श्री कृष्णः.श्री कृष्ण शरणं मम.श्री कृष्ण शरणं मम.चिन्ता सन्तान हन्तारो यत्पादांबुज रेणवः। स्वीयानां तान्निजार्यान प्रणमामि मुहुर्मुहुः ॥ यदनुग्रहतो जन्तुः सर्व दुःखतिगो भवेत । तमहं सर्वदा वंदे श्री मद वल्लभ नन्दनम॥ जय श्री कृष्णः

बुधवार, 3 नवंबर 2010

दीपावली सभी के कष्ट दूर करती है..





मनुष्य का मनोकामनाओं से बड़ा गहरा रिश्ता है, क्योंकि मनुष्य ही एक ऐसा प्राणी है, जिसमे मन होता है. मन होगा, तो कामनाए भी होंगी. यह भी सही है कि इन कामनाओं का अंत नहीं होता है. परन्तु न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति की कामना भी एक प्रकार से मानवाधिकार ही है. इन कामना की पूर्ति के लिए भारतीय ज्योतिष एवं तंत्र शास्त्र में ऐसे काम्य प्रयोग बताए गए है, जिनके माध्यम से मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रक्रिया आसान हो जाती है. भौतिक प्रयासों के फल प्राप्त होने लगते है, अद्रश्य बाधाए दूर होने लगती है. कहने का तात्पर्य है कि किस्मत काम करने लगती है. जब किस्मत काम करने लगती है, तो आपका परिश्रम मनोकामनाओ की पूर्ति के लिए पर्याप्त होता है. इसलिए दीपावली, होली, सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण आदि ऐसे पर्व है जिनके द्वारा हम अपनी कामनाओं की पूर्ति कर सकते है, ऐसा ऋषि मुनिओं ने मानव जाति की भलाई के लिए शास्त्रों में उल्लेख किया है. इसी सन्दर्भ में अब दीपावली पर्व पर हम अपने कष्ट दूर कर सकते है.

दीपावली सभी के कष्ट दूर करती है. दीपावालो और मनोकामनाओं का भी गहरा रिश्ता है. दीपावली पर एक तो मन में उमंग होती है, आनानद का भाव होता है, कुछ करने की चाहत होती है. और कुछ पाने की आशा भी होती है. तंत्र शास्त्र में दीपावली को सभी प्रकार की साधनाओं के लिए सर्वाधिक उपयुक्त अवसर बताया गया है. तभी इसे महानिशा कहा गया है. ऐसी निशा जो वर्ष में सर्वाधिक महान है.साधना करें तो दीपावली पर .....प्रकृति प्रदत्त इस सुअवसर पर सब कुछ अनुकूल होता है. मन में जो उमंग होती है, वह उत्तरिगोलार्द्ध के भारत जैसे देश में अनुकूल मौसम की प्राप्ति के साथ सूर्य और चंद्रमा के मिलन की इस रात्री में इष्टदेव एवं साधना के लिए पर्याप्त एकाग्रता की पूर्ति करती है.

अब दीपावली पर मनोकामनाओं की पूर्ति कैसे हो यह तो शास्त्रों में विस्तारपूर्वक वर्णित है. जिसे करना हर किसी के लिए संभव नहीं है. हमें तो केवल वही करना है जो हमारे लिए संभव है जिसमे त्रुटि यदि हो तो वह हानिप्रद ना हो. ऐसी स्थिति में कुछ मन्त्रों का जप कुछ वस्तुओं को घर में रखना और कतिपय बातों का पालन करना अधिक श्रेष्ठ है. ऐसे ही कुछ उपाय प्रस्तुत है, जिन्हें एक बार इस दीपावली पर आजमाकर देखें लाभ अवश्य होगा.

१:- मनोकामना पूर्ति का संकल्प लें हनुमान जयंती के दिन से (छोटी दीपावली) आरम्भ करते हुए १०८ दिन तक अथवा मनोकामना पूर्ति तक प्रतिदिन २१ बार श्री हनुमान चालीसा का पाठ करें. यदि ज्यादा मुश्किल समस्या हो तो १०८ बार पाठ प्रतिदिन करने से आप स्वयं चमत्कार अनुभव करेंगे.

२:- हनुमान जयंती के दिन से श्री सुन्दरकाण्ड का पाठ आरम्भ करें और नौ दिन तक लगातार करना है, पहले दिन एक पाठ, दूसरे दिन दो पाठ, तीसरे दिन तीन पाठ...........इस प्रकार नवें दिन नौ पाठ होने चाहिए. इसमें आप अपने परिवार के सदस्यों को भी शामिल कर सकते है, पर ध्यान रखे कि जो भी सदस्य पाठ आरम्भ करे वह बीच में अधूरा ना छोड़े अर्थात पूरा पाठ कर के ही आसान से उठे, ऐसा अनुष्ठान घर में करने से वर्ष भर खुशिओं की प्राप्ति होगी, सभी बाधाए दूर होकर मनोकामना पूर्ण होने लगती है.

३:- यदि धन से संबंधी कोई समस्या हो, या धन कंही फंसा हुआ हो, कर्जा अधिक हो और अपनी क्षमता से बाहर हो, व्यवसाय में नुक्सान हो रहा हो तो दीपावली की रात्री में आठ रुद्राक्ष ले, जो कि सात मुखी होने चाहिए, उन पर सिन्दूर का तिलक लगा कर (पहले गंगाजल से शुद्ध कर ले) अपने सामने लकड़ी की एक पटरी या चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर चावलों की अलग अलग ढेरी पर स्थापित करें और इन आठ रुद्राक्षों को अलग अलग लक्ष्मी का रूप मानते हुए पूजा करे, अर्थात अष्ट लक्ष्मी की पूजा होगी. चावलों को रोली या कुंकुम से रंग कर अपने हाथ में चावल और लाल पुष्प लेकर... ॐ आद्यलक्ष्म्यै नमः, ॐ विद्यालक्ष्म्यै नमः, ॐ सौभाग्यलक्ष्म्यै नमः, ॐ अमृतलक्ष्म्यै नमः, ॐ कामलक्ष्म्यै नमः, ॐ सत्यलक्ष्म्यै नमः, ॐ भोगलक्ष्म्यै नमः, ॐ योगलक्ष्म्यै नमः, इन अलग अलग मंत्रो का जप करते हुए सभी रुद्राक्षो के ऊपर छोड़ते जाए ऐसा नित्य चालीस दिन तक प्रति दिन परिवार का कोई भी सदस्य कर सकता है. इसे चालीस दिन बाद लाल कपड़े में बांधकर घर के मंदिर में स्थापित करे. इसके फलस्वरूप धन की वृद्धि होगी, ऋण उतरने के साधन सरल होते जायेंगे, रोजगार की प्राप्ति होगी धन से सम्बंधित सभी कार्य पूर्ण होते जायेंगे.

४:- यदि घर में हमेशा क्लेश रहता है तो दीपावली की संध्या को श्री हनुमान जी के सीधे पैर का सिंदूर मंदिर से लाकर घर की प्रत्येक चौखट के ऊपर मध्य में घर का मुखिया अनामिका उंगली से तिलक कर दे. और जो सिंदूर पूजा में प्रयोग किया है उसका तिलक प्रतिदिन अपने माथे पर लगाए.

५:- यदि बच्चो को पढाई में परेशानी होती हो, मन नहीं लगता हो, पढ़ा हुआ याद नहीं रहता हो, अच्छे नंबर नहीं आते हो तो दीपावली की रात्री से श्री सरस्वती चालीसा का पाठ आरम्भ करके गोपाष्टमी तक प्रतिदिन नौ बार करे शाम के समय करे पाठ करते समय सफेद मिठाई आवश्य सामने रखे पाठ के बाद उसे प्रसाद रूप से स्वीकार कर लें. इन नौ दिनों में सरस्वती चालीसा सिद्ध हो जायेगी. इसके बाद प्रतिदिन एक पाठ प्रातःकाल करे तो विद्या भरपूर लाभ न्प्राप्त होने लगता है.

इन सभी उपायों को श्रद्धा के साथ करने पर पूर्ण रूप से सफलता प्राप्त होती है, पिछले कई वर्षों से इनके द्वारा हजारों परिवार लाभान्वित हो रहे है. इस बार आपका भाग्योदय होने का सुअवसर आपके हाथ में है अवश्य लाभ उठाये, आपकी मनोकामना पूर्ण हो ............ऐसी मेरी शुभकामनाए है...

आप सभी को दीपावली पर्व की बहुत बहुत बधाई हो.......

श्रीरस्तु !!


1 टिप्पणी:

  1. Bahut sundar gyanvardhak deepawali pooja vidhan prastutikaran ke liye aabhar...
    Deepawali kee haardik shubhkamnayne

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