जय श्री कृष्णः.श्री कृष्ण शरणं मम.श्री कृष्ण शरणं मम.चिन्ता सन्तान हन्तारो यत्पादांबुज रेणवः। स्वीयानां तान्निजार्यान प्रणमामि मुहुर्मुहुः ॥ यदनुग्रहतो जन्तुः सर्व दुःखतिगो भवेत । तमहं सर्वदा वंदे श्री मद वल्लभ नन्दनम॥ जय श्री कृष्णः

शुक्रवार, 5 नवंबर 2010

गोवर्धन पूजा और अन्नकूट का महत्व..





अन्नकूट का अर्थ है अन्न का ढेर इस प्रकार इस दिन भारी मात्रा में पक्वान्न बनाकर भगवान विष्णु जी को भोग लगाया जाता है और उसका प्रसाद वितरण किया जाता है.कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा अर्थात दीपावली का दूसरा दिन गोवर्धन पूजा एवं अन्नकूट महोत्सव के रूप में मनाया जाता है. गोवर्धन पूजा की विशेष झांकी मथुरा, काशी, गोकुल, वृन्दावन, नाथद्वारा आदि में देखने को मिलती है. कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को अन्नकूट उत्सव के रूप में मनाया जाता है.


इस दिन घर के आँगन में गोवर्धन पर्वत की रचना की जाती है.ब्रज क्षेत्र में इसे मानवाकार रूप में बनाया जाता है.कुछ स्थानों पर इसे पर्वताकार रूप में बनाते है. ब्रजक्षेत्र में गोवर्धन की गोबर प्रतिमा के साथ साथ गाय, बछड़े, गोप, गोपियां, ग्वाले आदि के भी प्रतीक बनाए जाते है. और इन सबको मोर पंखो, रंगों आदि से सुसज्जित किया जाता है. जैसी भी आपकी परम्परा हो, उसके अनुरूप गोवर्धन को बना कर उनका सूर्यास्त के पश्चात रोली, पुष्प, धूप, दीप आदि से पूजन करें, उसके बाद दूध दही, पकाअन्न का भोग लगाएं.


गोवर्धन को अन्नकूट अर्थात विभिन्न प्रकार के शाक, फल, अन्न, वनस्पतियां, दूध और मिष्ठान आदि का भोग लगाने का भी विधान है. कई स्थानों पर इस दिन दाल बाटी, चूरमा का भोग लगाया जाता है. और दूसरे दिन अन्न कूट का भोग लगता है. पूजन और नैवेद्य समर्पित करने के उपरान्त निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुए सात परिक्रमा गोवर्धन जी की करे.


गोवर्धनगिरे तुभ्यं गोपानां सर्वरक्षकम!

नमस्ते देवरुपाय देवानां सुखदायिने !!

अर्थात:- हे गोवर्धन गिरी ! तुम ही गोपों की रक्षा करने वाले हो, तुम देवस्वरूप देव हो और सुखदायी हो, मैं तुम्हें प्रणाम करता हूं.

उक्त परिक्रमा घर के सभी सदस्य एक साथ दें. तो उत्तम है. परिक्रमा के बाद निम्नलिखित मन्त्र से गोवर्धन की प्रार्थना भी करें...

गोवर्धन धराधार

गोकुलत्राणकारक !

बहुबाहूकृतच्छाय गवां

कोटिप्रदोभव !!

अर्थात पृथ्वी को धारण करने वाले गोवर्धन आप गोकुल के रक्षक है. भगवान श्री कृष्ण ने आपको अपनी भुजाओं पर उठाया था. आप मुझे करोड़ो गौएँ (धन-संपदा) प्रदान करें.

गोवर्धन गौ दिवस के रूप में भी मनाया जाता है. इस दिन गायों की सेवा करने का बहुत महत्व होता है. जिनके यहां अर्थात घर में गाय होती है, वे उन्हें स्नान करा कर कुंकुम, अक्षत आदि से पूजें तथा मालाओं से सजाएं और निम्नलिखित प्रार्थना करे..

लक्ष्मीयां लोकपालानां धेनुरूपेण संस्थिता !

घृतं वहति यज्ञार्थे मम पापं व्यपोहतु !!

जिनके यहां गाय ना हो, वे भी गाय की सेवा करने का प्रयास करें. गौशाला में जाकर दान आदि कृत्य करें और गायों को चारा खिलाए तथा सन्त सेवा भी करें. प्रति वर्ष गोवर्धन पूजा करने से घर में धन लाभ, धन धान्य, तथा पशु धन एवं घी, दूध आदि की कभी कमी नहीं रहती है. अकाल नहीं पडता है. तथा वर्ष भर उत्तम भोजन की प्राप्ति होती है.

शुभमस्तु !!

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