जय श्री कृष्णः.श्री कृष्ण शरणं मम.श्री कृष्ण शरणं मम.चिन्ता सन्तान हन्तारो यत्पादांबुज रेणवः। स्वीयानां तान्निजार्यान प्रणमामि मुहुर्मुहुः ॥ यदनुग्रहतो जन्तुः सर्व दुःखतिगो भवेत । तमहं सर्वदा वंदे श्री मद वल्लभ नन्दनम॥ जय श्री कृष्णः

शनिवार, 6 नवंबर 2010

भाई-बहन के प्यार का त्यौहार..




यह गुजरात मेंबाई बीज,महाराष्ट्र में माई बीज”, बंगाल, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश तथा राजस्थान में भाई दौज के नाम से लोकप्रिय है. इसे यम द्वितीया भी कहते है. भाई दूज या यम द्वितीया गोवर्धन पूजा के बाद मनाई जाती है.यह सम्पूर्ण भारत में व्याप्त है,



सूर्य के पुत्र यम है, जो कि संज्ञा (सूर्य पत्नी) से उत्पन्न है. इनकी बहन यमुना (यमी) है. पौराणिक कथा (भविष्य पुराण) के अनुसार इस दिन यम की बहन ने अपने भाई यम को अपने घर पर भोजन का निमंत्रण दिया था. उस निमंत्रण को पाकर अपने राज काज में अति व्यस्त रहता हुआ यम बहन के स्नेह को स्मरण कर भावुक हो गया. वह बहन के घर गया तथा बहन यमी ने स्वयं के हाथों से बनाया हुआ सुस्वादु और पौष्टिक भोजन यम को कराया और उसका अनेक प्रकार से सत्कार तथा टीका किया. यम ने भी अपनी बहन को अनेक भेंट देकर प्रसन्न किया और मस्तक पर टीका किया. यमी ने यम से वर माँगा कि जो बहन इस दिन अपने भाई को भोजन कराए तथा टीका करें, तो उनकी रक्षा होनी चाहिए. तभी से यह भाई-दौज का पर्व सिद्ध होकर भाई बहन के सुन्दर प्यार का प्रतीक बन गया है.

इस दिन प्रत्येक व्यक्ति को चाहिए कि वह यदि सम्भव हो सके, तो यमुना अथवा किसी भी नदी में स्नान कर( यह सम्भव ना हो, तो घर पर ही स्नान कर लें) यम के दश नामों का इस श्लोक से स्मरण कर अर्घ्य दे तथा प्रणाम करें..

यमो निहन्ता पितृ धर्म राजौ,

वैवस्वतो दण्ड धरशच काल:!

भुताधिपो दत्त कृतानुसारी,

कृतान्त एतद्दशनाम भिर्जपेत !!

उपरोक्त शलोक का पठन करने के पश्चात बहन के घर ( यदि विवाहित है, तो सपत्नीक) जाए. तथा वंहा बहन के हाथ से रुचिकर भोजन करें तथा भोजनोपरांत यथा शक्ति भेंट दें. और उससे तिलक कराएं. बहन को भाई की दीर्घायु की कामना करनी चाहिए.

यदि सगी बहन ना हो, तो चाचा, मामा, फूफा, मौसा आदि की लड़की के यहां भोजन करें. यह भी सम्भव न हो, तो मानी हुई (धर्म) बहन के यहां जाएँ तथा यह भी सम्भव न हो, तो नदी के किनारे या किसी गाँव के पास बैठकर उसे ही बहन मानकर भोजन करें उस दिन स्वयं के घर भोजन न करें अन्यथा दोष लगता है.

भाई दूज मनाने से भाई बहन में आत्मीय स्नेह रहता है तथा स्नेह का यह बंधन लंबे समय तक चलता है. जीवन में संघर्ष के क्षणों में भी एक दूसरे का सुख दुःख बांटने की आकांक्षा रहती है,

जो बहन भोजनोपरांत अपने भाई को ताम्बूल (मीठा पान) खिलाती है, उसका सौभाग्य अखंडित रहता है.भाई को भी यमलोक का भय नहीं रहता है..

शुभमस्तु !!



3 टिप्‍पणियां:

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  2. आज अनुष्ठान रात्री 10:00 बजे तक चला उसके बाद मेने आपकी प्रतीक्षा की.

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