जय श्री कृष्णः.श्री कृष्ण शरणं मम.श्री कृष्ण शरणं मम.चिन्ता सन्तान हन्तारो यत्पादांबुज रेणवः। स्वीयानां तान्निजार्यान प्रणमामि मुहुर्मुहुः ॥ यदनुग्रहतो जन्तुः सर्व दुःखतिगो भवेत । तमहं सर्वदा वंदे श्री मद वल्लभ नन्दनम॥ जय श्री कृष्णः

सोमवार, 15 नवंबर 2010

आपकी संतान और वास्तु की भूमिका..





वास्तु दोष व्यक्ति को गलत मार्ग की ओर अग्रसर भी करते है. आपके घर का वास्तु ठीक नहीं है, तो आपकी संतान बेटा हो या बेटी हो वह अपना रास्ता भटक सकती है और गलत फैसले लेकर अपना जीवन तबाह भी कर सकती है यहां तक कि घर से भाग जाने का साहस भी कर सकती है.वास्तु दोष सबसे पहले मन और दिल को प्रभावित कर बुद्धि को भ्रष्ट कर देते है.


आपकी बेटी या बेटा प्यार के चक्कर में आकार भटक गए है, तो उसे कुछ न कह कर सबसे पहले घर की तरफ ध्यान दें. और जो वास्तु दोष मौजूद हों, उन्हें दूर करने की कोशिश करें. वास्तु में दिशा, सजावट और वजन का काफी महत्व होता है. इन तीनों का आपस में संतुलन बहुत जरूरी है. बेहतर निर्णय क्षमता के लिए अपनी बेटी और बेटे का कक्ष अपने कक्ष से पूर्व दिशा की ओर रखना चाहिए.उसके पड़ने लिखने की दिशा भी पूर्व ही होनी चाहिए. जहां तक मुमकिन हो बेटी को अपने कक्ष में सोने दें.उसके कमरें में सुन्दर, आकर्षक और मोहक पेंटिंग लगी होनी चाहिए. इससे बेटी के मन में आत्मविश्वास के भाव उत्पन्न होंगे.


उसके कमरे में गहरे या भडकीले परदे ना लगाए. और रौशनी की व्यवस्था भी पर्याप्त रखेंकी जितनी आवश्यकता हो उतना ही प्रकाश होना चाहिए अर्थात एकदम तेज रौशनी ना हो. लाल रंग का प्रयोग न कर पीले रंग का प्रयोग करें. बड़ी पेंटिंग भी उसके कमरे में ना रखे तो अच्छा होगा.

अपनी बेटी या अपने बेटे का कमरा ज्यादा सजा हुआ नहीं होना चाहिए कोई भी विलासिता का सामान वहां नहीं रखना चाहिए, क्योंकि इससे विलासिता बडती है. और गलत भावना का विकास होने लगता है. टेलीफोन, टीवी, संगीत से सम्बंधित कोई भी वस्तु का प्रयोग कम से कम करें. इस तरह की बाते भी आपकी संतान को विद्रोही बनाती है.

अपनी संतान का जरूरी सामान किताबे, कलम आदि घर में जन्म वास्तु के अनुसार रखें. उसके सिरहाने बेकार के सामान रददी आदि ना रखे, और ना ही अपने बच्चों के पलंग के नीचे जूते-चप्पल इत्यादि रखें और अपने बच्चो की अलमारी में नए जूते या चप्पल आदि ऊपर- नीचे कंही भी ना रखे इसके कारण आपकी संतान घर में बडो का आदर सत्कार नहीं करेगी अर्थात जिद्दीपन बडेगा व अपने को ही घर का मुखिया मानने लगेगी.

इनके कमरे के दरवाजे आसानी से खुलने चाहिए. और दरवाजे से खुलते- बंद होते समय आवाज भी नहीं आनी चाहिए. एक कक्ष से दूसरे कक्ष तक आसानी से पहुंचा जा सके, इसकी व्यवस्था भी करनी चाहिए. क्योंकि रुकावटें वास्तु दोष का कारण बन जाती है. आपकी संतान कोई किताब आदि लेने के लिए अलमारी की तरफ जा रही है और बीच में मेज या पलंग या दूसरी कोई रुकावट आती है, तो यह भी दोष है, इसे रख- रखाव का दोष माना जाता है. इसके कारण काम करने की क्षमता का क्षय होता है.

व्यक्ति जिस काम के लिए जा रहा है वह अधूरा ही रह जाता है या फिर उस काम को करने की इच्छा ही मर जाती है.

गलत वास्तु का प्रभाव शादी शुदा संतान के जीवन को भी प्रभावित करता है. जिन घरों में मां बाप परेशान रहते है, उन घरों की विवाहित बेटियाँ या बेटे भी दुखी रहते है. और इसका प्रभाव इनके दाम्पत्य जीवन पर भी पडता है. वास्तु दोष दूर कर के आप स्वयं सुखी होइए और अपनी संतान को भी सुखी देखिये.

शुभमस्तु !!

1 टिप्पणी:

  1. प्रस्तुत लेख में संतान का तात्पर्य पुत्र और पुत्री दोनों से है. वास्तु के नियम सभी पुत्र और पुत्रियों पर समान रूप से लागू होते है, चाहे वह अविवाहित हों या विवाहित हों. धन्यवाद

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