जय श्री कृष्णः.श्री कृष्ण शरणं मम.श्री कृष्ण शरणं मम.चिन्ता सन्तान हन्तारो यत्पादांबुज रेणवः। स्वीयानां तान्निजार्यान प्रणमामि मुहुर्मुहुः ॥ यदनुग्रहतो जन्तुः सर्व दुःखतिगो भवेत । तमहं सर्वदा वंदे श्री मद वल्लभ नन्दनम॥ जय श्री कृष्णः

शुक्रवार, 19 नवंबर 2010

वास्तु द्वारा दूर करें अपनी समस्याएं..






बंगला या फ्लैट का सपना सभी देखते है. लेकिन आवासीय भवन का चुनाव करते समय यह सदा ध्यान रखें कि उक्त स्थान स्वयं और परिवार के सदस्यों के साथ शांतिपूर्ण रहने के काबिल भी होना चाहिए. सबसे पहले उस स्थान की जांच करें, जिस भूखण्ड या भूखण्ड पर बने भवन में अपना फ्लैट आरक्षित करने जा रहे है. इसका निर्णय खुद करें. मकान खरीदने या बनवाने में धन की आवश्यकता होती है, वह धन अपनी मेहनत का होना चाहिए. कर्ज लेकर मकान बनवाना या खरीदना स्वयं को बीमार करना है. इसके कारण घर में घुटन और तनाव की वृद्धि होती है.


मकान बनवाने या खरीदने की स्थिति में लगने वाला धन पर्याप्त न हो तो मकान बनाने या उसे आरक्षित करने के बारे में सोचना परिवार को तनाव और रोग देना है. बदलाव प्रकृति का नियम है, और सभी ग्रह हर पल चल रहे है. आज यदि ग्रह या समय ठीक नहीं है तो आशा है कि कल जरूर ठीक होगा.ग्रहों की शक्ति के कारण व्यक्ति राजा से रंक बन जाता है. इसलिए अगर ग्रहों के अनुसार व्यक्ति ने अपने जीवन में परिवर्तन किया तो उसके पास मकान बनाने के लिए स्वयं की कमाई का धन एकत्र हो जाता है.


आप ऋण लेकर मकान आदि लेने से बचें. क्योंकि मकान सुख की वृद्धि के लिए बनाया जाता है. घुटन और तनाव के लिए नहीं बनाया जाता है. ज्योतिष शास्त्र या अन्य शास्त्रों एवं पुराणों के अनुसार मानव योनि में रहते हुए व्यक्ति अपना कर्ज नहीं उतारता है तो, मृत्यु के बाद भी कर्जदान बना रहता है. और उसे उसका कुफल भुगतना पडता है. यदि अपनी कमाई का 60% या 70% धन आपके पास है तो आप बाक़ी का धन उधार के रूप में ले सकते है. यह स्थिति सुखदायक बन सकती है, इससे अधिक प्रतिशत हो तो मकान का विचार उस समय त्याग दें तो आपके लिए अति उत्तम रहेगा.

अब मकान में होने वाली समस्याओं पर विचार करते है और उसका उपचार भी वास्तु के अनुसार क्या है. उसका विवरण आपके सामने है.

पति-पत्नी को किसी भी टकराव से बचने के लिए एक ही पलंग, एक ही गददा, एक ही चादर तथा एक ही तकिया प्रयोग में लाये तो शुख की वृद्धि होगी.

मकान का फर्श बनाने में काले रंग के पत्थरों का प्रयोग करने से राहू ग्रह की वृद्धि होती है.

अपने पूर्वजों के चित्र पूजा स्थल पर नहीं रखने चाहिए. इन्हें घर की दक्षिण दिशा या पश्चिम दिशा में लगाना चाहिए.

मकान का कोई कमरा किराए पर देने के लिए उत्तर-पश्चिम दिशा में बना हिस्सा ज्यादा ठीक रहेगा.

घर में शान्ति, आर्थिक उन्नति के लिए गुगुल की धूप सुबह शाम जलानी चाहिए.

किसी भी पेड़ के पश्चिम या दक्षिण दिशा की ओर नहीं सोना चाहिए. इससे दुर्घटना, झगड़ा, बिमारी आदि उत्पन्न हो सकती है.

भोजन करने के लिए पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुंह करके बैठना चाहिए.

अनेक मंजिलों वाले भवन में दरवाजे के ऊपर दरवाजा न बनवायें. घर में एक सीध में तीन दरवाजे नहीं बनवाए.

घर में किसी व्यक्ति को बार बार रोग पीड़ा का सामना करना पड़ रहा हो और ठीक न हो रहा हो, तो उस व्यक्ति को मकान के दक्षिण-पश्चिम कोने वाले कमरें में सुलाये या उसी कमरें में उपर्युक्त दिशा में बिस्तर लगा डे तो शीघ्रता से रोग निवृति होती है.

घर के मुख्य द्वार के सामने पेड़, बिजली या टेलीफोन का खम्भा, दूसरे के मकान का कोना आदि अवरोध एवं वेध हो तो, मुख्य द्वार के ऊपर पा कुआ दर्पण लगाना चाहिए.

इनके करने से वास्तु जनित दोषों से अवश्य छुटकारा मिलता है, तथा जीवन सुखी हो जाता है.

शुभमस्तु !!



कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

कृपया अपने प्रश्न / comments नीचे दिए गए लिंक को क्लिक कर के लिखें

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails

लिखिए अपनी भाषा में