जय श्री कृष्णः.श्री कृष्ण शरणं मम.श्री कृष्ण शरणं मम.चिन्ता सन्तान हन्तारो यत्पादांबुज रेणवः। स्वीयानां तान्निजार्यान प्रणमामि मुहुर्मुहुः ॥ यदनुग्रहतो जन्तुः सर्व दुःखतिगो भवेत । तमहं सर्वदा वंदे श्री मद वल्लभ नन्दनम॥ जय श्री कृष्णः

गुरुवार, 11 नवंबर 2010

उद्योग में वास्तु की महत्वपूर्ण भूमिका...




किसी भी औद्योगिक ईकाई के लिए आयताकार और वर्गाकार जमीन शुभ होती है. फैक्ट्री वहाँ बनाए, जिसके उत्तर-पूर्व में गड्ढा तालाब, नदी आदि हो और दक्षिण-पश्चिम में ऊँचे टीले एवं पहाड़िया हों. फैक्ट्री के उत्तर-पूर्व में ऊँचे भवन, पर्वत, टीले या पेड़ तथा दक्षिण-पश्चिम में तालाब, गड्ढे आदि होते है, तो भारी आर्थिक हानि उठानी पडती है.


एक दिन ऐसा भी आता है कि फैक्ट्री बंद हो जाती है. फैक्ट्री की चाहरदीवारी और ईमारत की ईशान दिशा दबी, कटी या गोल किसी भी हालत में न रखें. यह दिशा बढ़ी हुई होती है तो भारी मुनाफ़ा होता है. केवल ईशान कोण के बढने से भूमि गौमुखी या शेर्मुखी हो गयी हो तो वह व्यापार व् आवास के लिए अत्यंत शुभ होती है. ऐसे भूखण्ड पर बनी फैक्ट्री के मालिक को बेशुमार एश्वर्य और प्रसिद्धि की प्राप्ति होती है.

फैक्ट्री के भूखण्ड का उत्तर, ईशान कोण, एवं पूर्व का भाग दक्षिण, दक्षिण-पश्चिम, एवं पश्चिमी भाग की तुलना में नीचा होना चाहिए.फैक्ट्री की ईमारत भूखण्ड के उत्तर, ईशान, व् पूर्व में ज्यादा स्थान छोड़कर बनाए. दक्षिण, दक्षिण-पश्चिम, व् पश्चिम दिशाओं की ओर बनाए. फैक्ट्री की चाहरदीवारी का मुख्य द्वार एवं ईमारत का मुख्य द्वार पूर्वमुखी व् उत्तर मुखी हो तो फैक्ट्री मुनाफे में चलती है.


फैक्ट्री के मुख्य द्वार के सामने बिजली का खम्भा, स्तंभ, बड़ा पेड़, खुली नाली या पड़ोस के भवन का नुकीला कोना नहीं होना चाहिए. यह अशुभ होता है. अगर ये वेध फैक्ट्री की दोगुनी ऊँचाई से अधिक दूरी पर होते है तो इससे दोष उत्पन्न नहीं होता है. फैक्ट्री और वेध के बीच में सार्वजनिक सडक हो तो भी यह दोष समाप्त हो जाता है. फैक्ट्री के दांये – बांये और पीछे भी ऐसी बाधा हो तो भी दोष नहीं लगता है. फैक्ट्री के अंदर बने हॉल, कमरे आदि चार कोण वाले होने चाहिए.


ईशान में फैक्ट्री नीची होती है तो सुख समृद्धि और बच्चो की प्रगति होती है. तथा ऊँची होती है तो हर प्रकार का कष्ट, दरिद्रता और संतान को कष्ट देने वाली होती है. फैक्ट्री का पूर्व नीचा होता है तो लंबी आयु, सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है. और पूर्व ऊँचा हो तो संतान नष्ट हो जाती है. फैक्ट्री का सक्स्हीं-पूर्व अर्थात आग्नेय कोण यदि दक्षिण पश्चिम से नीचा हो तो शुभ होता है. वायव्य और ईशान से आग्नेय कोण नीचा हो तो अग्नि भय की संभावना बनी रहती है.


यदि आग्नेय दक्षिण-पश्चिम से ऊँचा हो तो अशुभ फल मिलते है. और आग्नेय कोण यदि वायव्य और ईशान कोण से ऊँचा हो तो धन लाभ होता है. फैक्ट्री का दक्षिण नीचा हो तो बीमारी, आर्थिक संकट, धन हानि और ऊँचा हो तो धन लाभ और स्वास्थ उत्तम होता है. फैक्ट्री का दक्षिण-पश्चिम यदि नीचा हो तो लंबी बीमारी तथा असमय मृत्यु और ऊँचा हो तो लंबी आयु एवं सुख समृद्धि में वृद्धि होती है.

फैक्ट्री का पश्चिम नीचा हो तो संतान को कष्ट और ऊंचा हो तो संतान की तरक्की होती है. फैक्ट्री का वायव्य कोण यदि ईशान कोण से नीचा तो विवाद, धन हानि और वायव्य कोण दक्षिण-पश्चिम तथा आग्नेय कोण से नीचा हो तो धन लाभ होता है. वायव्य कोण यदि ईशान से ऊंचा हो तो विवाद में विजय, धन लाभ और यदि वायव्य कोण दक्षिण-पश्चिम व् आग्नेय से ऊंचा हो तो धन हानि होने लगती है. फैक्ट्री का उत्तर नीचा हो तो समृद्धिदायक और ऊंचा हो तो हानिकारक होता है.


इस प्रकार से फैक्ट्री लगाते समय इन बातो का पूरा ध्यान रखेंगे तो आपको फैक्ट्री में कभी भी हानि का मुंह नहीं देखना पडेगा.


आगे और भी है.........

शुभमस्तु !!


2 टिप्‍पणियां:

  1. बढ़िया प्रस्तुति के लिए साधुवाद .

    ग्राम-चौपाल - कम्प्यूटर में हाईटेक पटाखे

    उत्तर देंहटाएं
  2. ग्राम-चौपाल में आपकी टिप्पणी अच्छी लगी ,धन्यवाद !!!

    उत्तर देंहटाएं

कृपया अपने प्रश्न / comments नीचे दिए गए लिंक को क्लिक कर के लिखें

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails

लिखिए अपनी भाषा में