जय श्री कृष्णः.श्री कृष्ण शरणं मम.श्री कृष्ण शरणं मम.चिन्ता सन्तान हन्तारो यत्पादांबुज रेणवः। स्वीयानां तान्निजार्यान प्रणमामि मुहुर्मुहुः ॥ यदनुग्रहतो जन्तुः सर्व दुःखतिगो भवेत । तमहं सर्वदा वंदे श्री मद वल्लभ नन्दनम॥ जय श्री कृष्णः

शनिवार, 4 दिसंबर 2010

सिंगिंग बाउल द्वारा घर की शान्ति बनाएं..




भारत में ध्वनि द्वारा घर तथा वातावरण को शुद्ध करने की परम्परा कई सदियों से चली आ रही है. शंख और घंटी तथा बाँसुरी आदि बहुत से ऐसे वाद्य यंत्र है जो कि वातावरण और घर की शान्ति के लिए सहायक सिद्ध होते है. तथा उन वाद्य यंत्रो या शंख व घंटी को धर्म में शामिल कर उसकी उपयोगिता को प्रमाणित कर दिया है.इन नाना प्रकार की ध्वनियों का प्रयोग विश्व के प्रत्येक धर्मों में प्राचीन समय से चला आ रहा है.


चीन में ध्वनि से ऊर्जा प्राप्ति पर विशेष बल अथवा प्राथमिकता दी जाती है. फेंगशुई में विंड चाइम का इसी सिद्धांत पर प्रयोग किया जाता है. उसी प्रकार घर के भीतर ऊर्जा तरंगों में सुधार लाने के लिए एक विशेष उपकरण का प्रयोग किया जाता है, जिसे सिंगिंग बाउल कहते है.


जिस प्रकार से शंख के बारे में शोध किया गया और यह निष्कर्ष निकला कि शंख की आवाज से आसपास के सूक्ष्म कीटाणुओं में भारी कमी आ जाती है, इसी प्रकार घंटी व घंटे की आवाज से कुछ अदृश्य बुरी शक्तियां दूर होती है.

चीन में इस सिंगिंग बाउल का प्रयोग परिवार के सदस्यों के बीच आपसी लगाव में सुधार लाने के लिए भी किया जाता है. इसकी ध्वनि येंग व यिन ऊर्जा में संतुलन लाती है.


यह सिंगिंग बाउल किसी भी धातु जैसे सोना, चांदी, ताम्बा, लोहा, सीसा या स्फटिक का हो सकता है. यह कई आकारों में भी हो सकता है. यह एक कटोरेनुमा होता है. इसको लकड़ी से बनी एक छोटी सी मुंगरी द्वारा कटोरे पर मारने से एक ध्वनि उत्पन्न करता है. यही ध्वनि घर को शुद्ध करने में सहायक होती है.


इसको बजाने के लिए पहले मुंगरी द्वारा कटोरे पर एक प्रहार करना चाहिए फिर इस मुंगरी को कटोरे के किनारे पर बांये से दांये घुमाना चाहिए. इस प्रकार एक विचित्र सी ध्वनि उत्पन्न होती है.

इसके नियमित प्रयोग से यह लय से बोलने लगेगा. तथा यह ध्वनि आपको कर्णप्रिय लगेगी. इसको दिन भर में कई बार बजा सकते है.

यदि आपको लगता है या महसूस हो रहा है कि घर-परिवार में कुछ अशांति हो रही है, तो इसका नियमित प्रयोग करने से घर की ऊर्जा शुद्ध हो जायेगी. चीन या फेंगशुई में इस ऊर्जा को ची कहा जाता है.

यह ची ही चीनी चिंतन का मुख्य आधार है.

शुभमस्तु !!



3 टिप्‍पणियां:

  1. जानकारी अच्छी लगी. धन्यवाद

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  2. बेनामी4/18/2011 3:32 pm

    pandit g kaha gum ho gaye aap bahutdina se koi nai post nahi dali apna blog update rakheye.
    aachi jankari dete hai aap

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  3. कुछ आवश्यक पारिवारिक कार्य हेतु शहर से बाहर हूँ. शीघ्र ही मिलता हूँ

    उत्तर देंहटाएं

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