जय श्री कृष्णः.श्री कृष्ण शरणं मम.श्री कृष्ण शरणं मम.चिन्ता सन्तान हन्तारो यत्पादांबुज रेणवः। स्वीयानां तान्निजार्यान प्रणमामि मुहुर्मुहुः ॥ यदनुग्रहतो जन्तुः सर्व दुःखतिगो भवेत । तमहं सर्वदा वंदे श्री मद वल्लभ नन्दनम॥ जय श्री कृष्णः

बुधवार, 5 अक्तूबर 2011

विजया दशमी को श्री हनुमान जी की पूजा द्वारा अपना भाग्य चमकाएं...






आश्विन मास के शु्क्ल पक्ष की दशमी तिथि को विजयादशमी यानी दशहरा पर्व मनाया जाता है। विजयादशमी अर्थात् देवी की विजय का पर्व। यह श्रीराम की रावण पर एवं माता दुर्गा की शुंभ-निशुंभ आदि असुरों पर विजय के उपलक्ष्य में मनाए जाने वाला पर्व है। परंपरा के अनुसार इसे हम बुराई पर अच्छाई की विजय के पर्व के रूप में मनाते आए हैं। इस बार यह पर्व 6 अक्टूबर, गुरुवार को है।

विजयादशमी शक्ति की उपासना का पर्व है। शक्ति का अर्थ है - बल, सामथ्र्य और पराक्रम। हर व्यक्ति अपनी शक्ति का उपयोग अलग प्रकार से करता है। दुर्जन व्यक्ति ज्ञान का प्रयोग व्यर्थ विवाद या बहस में, धन का उपयोग अहं के दिखावे में, बल का प्रयोग दूसरों को पीड़ा पहुंचाने में करते हैं। इसके विपरीत सदाचारी व्यक्ति अपनी शक्ति का प्रयोग ज्ञान प्राप्ति, दूसरों की सेवा में एवं अपने धन का उपयोग अच्छे कार्यों में करते हैं। इस प्रकार शक्ति इंसान में कर्म, उत्साह और ऊर्जा का संचार करती है इसीलिए इस दिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की रावण पर विजय सत्य की असत्य पर, धर्म की अधर्म पर एवं न्याय की अन्याय पर विजय थी।

भगवान राम ने जगत को संदेश दिया कि दुष्ट और अत्याचारी कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, किंतु शक्ति का दुरुपयोग अंत में उसके ही विनाश का कारण होता है। यह पर्व हमारें मन में विजय का भाव जगाता है एवं अपनी ज्ञान एवं विवेक रूपी शक्तियों का जागरण कर अपने अज्ञान रूपी अंधकार और स्वभाविक विकारों - काम, क्रोध, मद, लोभ, मोह और मात्सर्य पर विजय प्राप्त करने की प्रेरणा देता है।

जब कभी हम कोई कर्म करते हैं तो यह नहीं सोचते कि हमारे परिवार पर इसका क्या असर होगा। अक्सर नासमझी या अनदेखी में कई काम ऐसे हो जाते हैं जो हमने किए खुद के लिए थे, परिणाम परिवार को भुगतना पड़ता है। जीवन में परिवार की वरीयता शेष चीजों से ऊपर रहे। परिवार पूंजी है, रिश्ते हमारी सम्पत्ति। जब भी कोई काम करें तो यह अनुमान पहले ही लगा लें कि इससे आपकी इस जायदाद पर तो कोई विपरीत असर नहीं पड़ेगा।

अहंकार जब परिवार में प्रवेश करता है तो फिर वहां परिवार गौण और व्यक्तिवाद हावी हो जाता है। परिवार का हर सदस्य केवल स्वयं का लाभ या हानि देखने लगता है। अगर परिवार का मुखिया भी इसी भााव में जीने लगे तो फिर वो परिवार रह ही नहीं जाता। वो सिर्फ व्यक्तियों का एक समूह बनकर रह जाता है। जहां हर आदमी अपनी ही सोच में डूबा होता है।

परिवार को सहेजने के लिए यह ध्यान रखना जरूरी है कि हम क्या कर रहे हैं, क्यों कर रहे हैं और इसका क्या परिणाम भुगतना पड़ सकता है। आप कुछ भी करें, अगर गलत किया है तो कीमत परिवार को भी चुकानी ही पड़ेगी। हमसे परिवार जुड़ा हुआ है, चाहें हम साथ रहें या ना रहें। एक डोर हमें बांधे हुए है।

रावण से सीखें, अहंकार और क्रोध ने रावण का तो सर्वनाश किया ही, पूरे राक्षस कुल को प्राण देकर रावण के बुरे कर्मों की कीमत चुकानी पड़ी। शक्ति के अभिमान में रावण ने कभी यह नहीं सोचा था कि उसके परिवार का भी विनाश हो जाएगा। राक्षस कुल के अधिकतर सदस्य रावण की चाटुकारिता में थे, कुछ उससे डरते थे और जो निडर होकर सत्य बोलते थे उनकी सुनी नहीं जाती थी। पूरे परिवार की बागडोर रावण के हाथ थी लेकिन रावण खुद अपने अहंकार के हाथ की कठपुतली था। उसका अहंकार उससे जो कराता, वो वही करता था।

परिणाम हमारे सामने है। अगर रावण ने एक पल के लिए भी यह सोचा होता कि उसके कर्मों का परिवार पर क्या प्रभाव पड़ सकता है तो शायद वो इतनी बड़ी चूक करने से बच जाता। लेकिन सिर्फ अहंकार के कारण उसे अपने कर्मों में परिवार के अच्छे-बुरे का ध्यान नहीं रहा। हमेशा याद रखें आपके हर एक कर्म से एक महीन डोर परिवार के साथ बंधी है। हमारा कर्म जिस दिशा में होगा, परिवार भी उसी दिशा में खिंचा जाएगा।

जीवन की सार्थकता तभी संभव है जब व्यक्तिगत, पारिवारिक और सामाजिक जीवन में बेहतरीन तालमेल द्वारा जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया जाए। इससे मिलने वाले यश, सफलता रूपी सुखद नतीजेे अपनों के साथ परायों के लिये भी अनुकूल व प्रेरणादायी हो।

ऐसा ही संदेश देने वाला पर्व है - विजयादशमी। यह देवी की विजय का पर्व है। लौकिक परंपराओं में खासतौर पर यह श्रीराम की रावण पर विजय के लिये जाना जाता है। वहीं शास्त्रों में यह माता दुर्गा की शुंभ-निशुंभ आदि असुरों पर विजय की घड़ी माना गया है।

शक्ति पूजा के इस विशेष अवसर पर देवी, शक्तिधर श्रीराम के अलावा एक और शक्ति स्वरूप देवता श्री हनुमान उपासना भी बहुत ही मंगलकारी मानी गई है। शास्त्रों के मुताबिक श्री हनुमान रुद्र अवतार ही नहीं बल्कि आदिशक्ति और श्रीराम के सेवक भी बताए गए हैं।

यही कारण है श्री हनुमान की आराधना शक्ति, शिव व विष्णु अवतार श्री राम की प्रसन्नता व कृपा देकर जीवन के हर मोर्चे पर संकट और पीड़ा हर मनचाही सफलता देने वाली भी मानी गई है।

जानते हैं विजयादशमी के अवसर पर श्री हनुमान की उपासना की आसान विधि -

-
हनुमान पूजा के लिये सूर्योदय से पहले जागकर तीर्थ में या गंगाजल मिलाकर स्नान करें। साथ ही इस दिन हनुमान पूजा का संकल्प और व्रत रखकर बिना नमक का भोजन करें।

-
लाल या सिंदूरी वस्त्र पहन हनुमान पूजा के लिये शिव या देवी मंदिर चुनें। संभव न हो तो घर पर ही हनुमानजी की मूर्ति या चित्र की पूजा भी शुभ होगी।

-
श्री हनुमान को सिंदूर व चांदी के वर्क का चोला चढाएं।

-
सिंदूर, लाल चंदन, लाल अक्षत, लाल फूल, लाल वस्त्र, जनेऊ चढ़ाकर हनुमान पूजा करें।

-
लाल फल या गुड़, चने, आटे से बने पकवान का भोग लगाएं।

-
एक नारियल पर सिंदूर लगा, मौली या कलेवा लपेटकर श्री हनुमान के चरणों में भेंट करें।

-
हनुमान मंत्र, हनुमान चालीसा, सुन्दरकाण्ड का पाठ भी यथासंभव करें। संभव न हो तो कम से कम नीचे लिखी हनुमान चालीसा की एक चौपाई का भक्तिभाव से स्मरण कर लें -

जै जै जै हनुमान गौसाईं, कृपा करहु गुरु देव की नाई।

-
दशहरे पर गुग्गल धूप, दस छोटी बत्तियों व गाय के घी के दीप व कर्पूर श्री हनुमान की आरती करें। प्रसाद बांटे। अंत में संकटहरण व सफल जीवन की कामना करे मन, कर्म, वचन के दोषों की क्षमा मांगे।


ज्योतिष के अनुसार दशहरा बहुत खास दिन होता है इस दिन राशि अनुसार ज्योतिषीय उपाय किये जाए तो आपकी किस्मत चमक सकती है। क्योंकि यह दिन ज्योतिष शास्त्र के अनुसार विशेष सिद्धियां प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण माना गया है। इस दिन ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति के अनुसार सभी राशि वाले निचे बताए प्रयोग करें
मेष- आपकी राशि के अधिपति देवता काॢतकेय स्वामी हैं। इस विजय पर्व पर शिव मन्दिर में कार्तिकेय भगवान को जल चढ़ाएं। अचानक पैसा मिलेगा।

वृष- इस राशि के अधिपति देवता इन्द्र हैं। इसलिए दशहरे पर्व पर वृष राशि वाले भगवान इन्द्र की पूजा करें। इससे आपका रूका हुआ पैसा वापस आएगा।

मिथुन- मिथुन राशि के पूज्य देवता भगवान विष्णु हैं। विजयदशमी पर अधिपति देवता विष्णु की पूजा करें।

कर्क- कर्क राशि के व्यक्ति सफेद वस्त्र पहन कर मां गौरी की पूजा करें। इससे सितारें साथ देने लगेंगे।

सिंह- दशहरे के पावन पर्व पर आप शिवजी को कच्चा दूध चढ़ाएं। आपका बुरा समय खत्म हो जाएगा।

कन्या- कन्या राशि के व्यक्ति अपने ग्र्रह का शुभ प्रभाव बढ़ाने के लिए ऊँ नम: भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करें।

तुला- राशि के अनुसार धन दौलत प्राप्त करने के लिए आप ऊँ इन्द्राय नम: मंत्र का 108 बार जप करें।

वृश्चिक- 10 वर्ष तक के बच्चों को कुछ मीठा खिला कर दक्षिणा दें।

धनु- धनु राशि का स्वामी ब्रहस्पति ग्रह है और ब्रहस्पति देव भगवान ब्रह्मा के अधिन मान जाते हैं। अत: इस दशहरे गुरु के अधिपति ब्रह्म देव को प्रसन्न करें।

मकर- मकर राशि का ग्रह स्वामी शनि है। इसलिए आप अपने शनि के अधिपति देव प्रजापति की पूजा करें। इससे आपके रूके काम पूरे होंगे।

कुंभ- ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंभ राशि के स्वामी शनिदेव हैं। शनिदेव के लिए शाम के समय दक्षिण दिशा में दीपक लगाएं।

मीन- मीन राशि का ग्रह स्वामी गुरु है। इसलिए दशहरे पर ऊँ ब्रह्मणे नम: मंत्र का 108 बार जप करें।

शुभमस्तु !!

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

कृपया अपने प्रश्न / comments नीचे दिए गए लिंक को क्लिक कर के लिखें

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails

लिखिए अपनी भाषा में