जय श्री कृष्णः.श्री कृष्ण शरणं मम.श्री कृष्ण शरणं मम.चिन्ता सन्तान हन्तारो यत्पादांबुज रेणवः। स्वीयानां तान्निजार्यान प्रणमामि मुहुर्मुहुः ॥ यदनुग्रहतो जन्तुः सर्व दुःखतिगो भवेत । तमहं सर्वदा वंदे श्री मद वल्लभ नन्दनम॥ जय श्री कृष्णः

रविवार, 19 फ़रवरी 2012

महाशिवरात्री की आप सभी को शुभकामनाएं..

। ॐ नम: शिवाय।। ॐ नम: शिवाय।। ॐ नम: शिवाय।। ॐ नम: शिवाय।। ॐ नम: शिवाय।



महाशिवरात्रि भगवान शंकर का सबसे पवित्र दिन है। 


यह अपनी आत्मा को पुनीत करने का महाव्रत है। 

इसके करने से सब पापों का नाश हो जाता है। 


हिंसक प्रवृत्ति बदल जाती है। निरीह जीवों के प्रति दया भाव उपज जाता है। 


ईशान संहिता में इसकी महत्ता का उल्लेख इस प्रकार किया गया है । 









  ॥शिवरात्रि व्रतं नाम सर्वपापं प्रणाशनम्। 





आचाण्डाल मनुष्याणं भुक्ति मुक्ति प्रदायकं॥




इस दिन मिट्टी के बर्तन में पानी भरकर, ऊपर से बेलपत्र, आक धतूरे के पुष्प, चावल आदि डालकर 



‘शिवलिंग’ पर चढ़ाया जाता है।

रात्रि को जागरण करके शिवपुराण का पाठ सुनना हरेक व्रती का धर्म माना गया है।

अगले दिन सवेरे जौ, तिल, खीर और बेलपत्र का हवन करके व्रत समाप्त किया जाता है।







अनुष्ठान:- 



कारोबार वृद्धि के लिए---

महाशिवरात्रि के सिद्ध मुहर्त में पारद शिवलिंग को प्राण प्रतिष्ठित करवाकर स्थापित करने से व्यवसाय में 



वृद्धि व नौकरी में तरक्की मिलती है। 





बाधा नाश के लिए---


शिवरात्रि के प्रदोष काल में स्फटिक शिवलिंग को शुद्ध गंगा जल, दूध, दही, घी, शहद व शक्कर से स्नान 



करवाकर धूप-दीप जलाकर निम्न मंत्र का जाप करने से समस्त बाधाओं का शमन होता है। 




॥ॐ तुत्पुरूषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रूद्र: प्रचोदयात्॥





बीमारी से छुटकारे के लिए......

शिव मंदिर में लिंग पूजन कर दस हज़ार मंत्रों का जाप करने से प्राण रक्षा होती है। 




महामृत्युंजय मंत्र का जाप रुद्राक्ष की माला पर करें।





शत्रु नाश के लिए-----

शिवरात्रि को रूद्राष्टक का पाठ यथासंभव करने से शत्रुओं से मुक्ति मिलती है। 


मुक़दमे में जीत व समस्त सुखों की प्राप्ति होती है।





मोक्ष के लिए----

शिवरात्रि को एक मुखी रूद्राक्ष को गंगाजल से स्नान करवाकर धूप-दीप दिखा कर तख्ते पर 



स्वच्छ कपड़ा


 बिछाकर स्थापित करें। 


शिव रूप रूद्राक्ष के सामने बैठ कर सवा लाख मंत्र जप का संकल्प लेकर जाप आरंभ करें। 


जप शिवरात्रि के बाद भी जारी रखें। ॐ नम: शिवाय।


। ॐ नम: शिवाय।। ॐ नम: शिवाय।। ॐ नम: शिवाय।। ॐ नम: शिवाय।। ॐ नम: शिवाय।। 





ॐ नम: शिवाय।। ॐ नम: शिवाय।। ॐ नम: शिवाय।। ॐ नम: शिवाय।








शुभमस्तु !!

1 टिप्पणी:

  1. सभी को महाशिवरात्रि के पर्व की हार्दिक शुभकामनायें....

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