जय श्री कृष्णः.श्री कृष्ण शरणं मम.श्री कृष्ण शरणं मम.चिन्ता सन्तान हन्तारो यत्पादांबुज रेणवः। स्वीयानां तान्निजार्यान प्रणमामि मुहुर्मुहुः ॥ यदनुग्रहतो जन्तुः सर्व दुःखतिगो भवेत । तमहं सर्वदा वंदे श्री मद वल्लभ नन्दनम॥ जय श्री कृष्णः

रविवार, 19 फ़रवरी 2012

एक ही रात से सुख संपदा प्राप्ति का मार्ग खोलें..




माँ सबका कल्याण करती है, जब भी बच्चों पर किसी भी प्रकार से कोई संकट या विपदा आती है तो माँ हमेशा कोई ना कोई रास्ता निकाल ही लेती है, 

माँ दुर्गा जी ने भी यही किया है कि जब भी भक्त संकट में हो चाहे संकट आर्थिक हो या किसी दूसरे प्रकार का संकट हो तो माँ ने श्री दुर्गा सप्तशती के अंतर्गत दुर्गाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रं नामक एक अत्यंत महत्वपूर्ण और सरल स्तोत्र दिया है, इस 108  नामों को प्रतिदिन पड़ने से सभी कष्ट और संकट तो दूर होते ही है साथ ही धन, सुख और संपदा भी प्राप्त होती है.

इस स्तोत्र में स्पष्ट लिखा है कि.. भौमावास्यानिशामग्रे चन्द्रे शतभिषां गते । विलिख्य प्रपठेत् स्तोत्रं स भवेत् संपदां पदम्अर्थात...जिस दिन मंगलवार हो और उसी दिन अमावस्या हो तथा उस रात्री शतभिषा नक्षत्र हो तभी इन 108 नामों को लिखें तत्पश्चात इसका भक्ति भावना से पाठ करके माँ दुर्गा जी के चित्र के समक्ष फल और फूल रखकर अपनी कामना के साथ यह लिखा हुआ स्तोत्र अर्पण कर दें.

अगले दिन प्रातः उठकर इस लिखे हुए स्तोत्र को शीशे के फ्रेम में बनवाकर पूजा स्थल पर स्थापित कर दें तथा प्रतिदिन इसका पाठ करेंगे तो आप स्वयं अनुभव करेंगे कि आपकी समस्त बाधाएं और संकट माँ दुर्गा की कृपा से दूर होते जा रहे है. और आपके कोष की वृद्धि हो रही है, ऋण उतरने लगता है तथा घर से रोग और शत्रु भाग जाते है, तथा इसके प्रभाव से परिवार सुखी और सम्पान बनने लगता है

इसे लिखने की विधि का विशेष ध्यान रखें.लिखने का मुहूर्त: 21/22 फरवरी 2012  मंगलवार/ बुधवार की रात्री 12:20 मिनट से प्रातः 04:05 मिनट के मध्य लाल रंग के पेन से कागज पर लिखें या आज भी 8 मार्च 2016  रात 11 बज कर 36 मिनट तक ऐसा सिद्ध मुहूर्त बन रहा है आज की रात ग्रहण की रात भी होने से विशेष मुहूर्त इसे भूले नही इसका एक नमूना मैं यहाँ पर दे रहा हूँ इसे प्रिंट कर निकाल कर भी लिखें 

इसके मध्य खाली स्थान पर ॐ सती साध्वी....से आरम्भ करके 15 वें श्लोक प्रत्यक्ष ब्रह्मवादिनी तक लिखना है, सबसे अंत में अपना नाम, पिता का नाम, माता का नाम और गोत्र  अवश्य लिखकर माँ से निवेदन करें कि आपके सभी प्रकार की समस्याओं का माँ शीघ्र निराकरण करें.

पाठ इस प्रकार से श्री दुर्गा सप्तशती में लिखित है. आपने बस... ॐ सती साध्वी....से आरम्भ करके 15 वें श्लोक प्रत्यक्ष ब्रह्मवादिनी तक लिखना है,


।। दुर्गाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रं ।।


।। ॐ ।।

।। श्री दुर्गायै नमः ।।

।। श्री दुर्गाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् ।।

ईश्वर उवाच 

शतनाम प्रवक्ष्यामि शृणुष्व कमलानने ।
यस्य प्रसादमात्रेण दुर्गा प्रीता भवेत् सती ।। १।।

ॐ सती साध्वी भवप्रीता भवानी भवमोचनी ।
आर्या दुर्गा जया चाद्या त्रिनेत्रा शूलधारिणी ।। २।।
पिनाकधारिणी चित्रा चण्डघण्टा महातपाः ।
मनो बुद्धिरहंकारा चित्तरूपा चिता चितिः ।। ३।।
सर्वमन्त्रमयी सत्ता सत्यानन्द स्वरूपिणी ।
अनन्ता भाविनी भाव्या भव्याभव्या सदागतिः ।। ४।।
शाम्भवी देवमाता च चिन्ता रत्नप्रिया सदा ।
सर्वविद्या दक्षकन्या दक्षयज्ञविनाशिनी ।। ५।।
अपर्णानेकवर्णा च पाटला पाटलावती ।
पट्टाम्बर परीधाना कलमञ्जीररञ्जिनी ।। ६।।
अमेयविक्रमा क्रुरा सुन्दरी सुरसुन्दरी ।
वनदुर्गा च मातङ्गी मतङ्गमुनिपूजिता ।। ७।।
ब्राह्मी माहेश्वरी चैन्द्री कौमारी वैष्णवी तथा ।
चामुण्डा चैव वाराही लक्ष्मीश्च पुरुषाकृतिः ।। ८।।
विमलोत्कर्षिणी ज्ञाना क्रिया नित्या च बुद्धिदा ।
बहुला बहुलप्रेमा सर्ववाहन वाहना ।। ९।।
निशुम्भशुम्भहननी महिषासुरमर्दिनी ।
मधुकैटभहन्त्री च चण्डमुण्डविनाशिनी ।। १०।।
सर्वासुरविनाशा च सर्वदानवघातिनी ।
सर्वशास्त्रमयी सत्या सर्वास्त्रधारिणी तथा ।। ११।।
अनेकशस्त्रहस्ता च अनेकास्त्रस्य धारिणी ।
कुमारी चैककन्या च कैशोरी युवती यतिः ।। १२।।
अप्रौढा चैव प्रौढा च वृद्धमाता बलप्रदा ।
महोदरी मुक्तकेशी घोररूपा महाबला ।। १३।।
अग्निज्वाला रौद्रमुखी कालरात्रिस्तपस्विनी ।
नारायणी भद्रकाली विष्णुमाया जलोदरी ।। १४।।
शिवदूती कराली च अनन्ता परमेश्वरी ।
कात्यायनी च सावित्री प्रत्यक्षा ब्रह्मवादिनी ।। १५।।
य इदं प्रपठेन्नित्यं दुर्गानामशताष्टकम् ।
नासाध्यं विद्यते देवि त्रिषु लोकेषु पार्वति ।। १६।।
धनं धान्यं सुतं जायां हयं हस्तिनमेव च ।
चतुर्वर्गं तथा चान्ते लभेन्मुक्तिं च शाश्वतीम् ।। १७।।
कुमारीं पूजयित्वा तु ध्यात्वा देवीं सुरेश्वरीम् ।
पूजयेत् परया भक्त्या पठेन्नामशताष्टकम् ।। १८।।
तस्य सिद्धिर्भवेद् देवि सर्वैः सुरवरैरपि ।
राजानो दासतां यान्ति राज्यश्रियमवाप्नुयात् ।। १९।।
गोरोचनालक्तककुङ्कुमेव सिन्धूरकर्पूरमधुत्रयेण ।
विलिख्य यन्त्रं विधिना विधिज्ञो भवेत् सदा धारयते पुरारिः ।। २०।।
भौमावास्यानिशामग्रे चन्द्रे शतभिषां गते ।
विलिख्य प्रपठेत् स्तोत्रं स भवेत् संपदां पदम् ।। २१।।

।। इति श्री विश्वसारतन्त्रे दुर्गाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रं समाप्तम् ।।


श्रीरस्तु!!


7 टिप्‍पणियां:

  1. बेनामी2/19/2012 2:44 pm

    bahut subdar jankari hai jarur karenge dhanyvad

    उत्तर देंहटाएं

  2. अर्चना
    जन्म -02.09.1983
    वेळ रात्री-10.30pm शुक्रवार जन्म स्थान-पुणे(जुन्नर)
    Insurance Adviser
    LIc
    I have some Health &Financial problem
    i m not sucess in business
    मेरे पती
    हरिश
    11-12-1976
    वेळ - सुबह 8.00am शनिवार. जन्म स्थान-मुंबई(मालाड)

    मैने आपका राशी और रत्न देखा।
    वहापे मैने अपनी समस्या लिखी पर कुछ सुझाव नही मिला और
    मुझे कुछ सुझाव दिजीये ।
    मे आपकी बहो आभारी रहूगी।

    हिंदी भाषा में।
    archanakudale2@gmail.com

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    उत्तर
    1. आप दोनों की जन्म कुंडलिया अनुसार अभी अप्रैल 2017 तक किसी ना किसी रूप में बाधाएं आप दोनों को परेशान करती रहेंगी अप्रैल 2017 के बाद समय अनुकूल चलेगा 16 मोर के पंख का गुलदस्ता बना कर अपने बेडरूम में रखें तथा प्रतिदिन कुत्तो को खाने के लिए कुछ ना कुछ दें इससे राहत मिलेगी तथा लाभ भी होगा आपके स्वास्थ्य के लिए आप एमेथिस्ट रत्न पांच कैरट का चांदी में बनवा कर शनिवार सुबह अपने सीधे हाथ की सबसे बड़ी ऊँगली में पहने तो लाभ मिलेगा

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  3. आपने रत्न धारण करने काही लिऐ मुझे या पती.को. कहाः
    में खुद्द मोती और पवळे (लाल रंग ) पहेना है।
    मूझे business and Health issue हो रहा हे।
    Please clear बताऐ।
    अर्चना

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    1. एमेथिस्ट रत्न आपको archana kudale कहा है मोती और दुसरे रत्न आपको लाभ नही दे रहे है साथ ही ऊपर दिए गए उपाय भी करे तो स्वास्थ और धन की संस्यायें जल्दी दूर होंगी

      हटाएं
  4. sapne me kisi stri ko shishu ko janam dete hue dekhne ka arth kya h? guruji

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    उत्तर
    1. इस प्रकार के स्वप्न से मनः अशांत रहेगा

      हटाएं

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