जय श्री कृष्णः.श्री कृष्ण शरणं मम.श्री कृष्ण शरणं मम.चिन्ता सन्तान हन्तारो यत्पादांबुज रेणवः। स्वीयानां तान्निजार्यान प्रणमामि मुहुर्मुहुः ॥ यदनुग्रहतो जन्तुः सर्व दुःखतिगो भवेत । तमहं सर्वदा वंदे श्री मद वल्लभ नन्दनम॥ जय श्री कृष्णः

सोमवार, 13 फ़रवरी 2012

“वन्दे शिवं शंकरम्”



                                                       
                                                           वन्दे शिवं शंकरम् ।।

वन्दे देवमुमापतिं सुरगुरुं वन्दे जगतकारणं,
वन्दे पन्नगभूषणं मृगधरं वन्दे पशूनां पतिं
वन्दे सूर्यशशांकवह्नीनयनं वन्दे मुकुन्दप्रियं,
वन्दे भक्तजनाश्रयं च वरदं वन्दे शिवं शंकरम ।।


देवताओं के गुरु तथा सृष्टि के कारण रूप परमेश्वर भगवान शंकर को मैं प्रणाम करता हूँ,

नागों को आभूषण के रूप में तथा मृग मुद्रा धारण करने वाले एवं समस्त जीवों के गुरु –स्वामी भगवान शंकर को मैं नमस्कार करता हूँ, नमस्कार करता हूँ

सूर्य चन्द्र और अग्नि देव को नेत्र रूप में धारण करने वाले भगवान नारायण के परम प्रिय भगवान शंकर को मैं प्रणाम करता हूँ ।

भक्त जनों को आश्रय देने वाले – वरदानी कल्याणरूप भगवान शंकर को मैं प्रणाम करता हूँ ।

               *********ॐ नमः शिवाय***********

शुभमस्तु !!

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