जय श्री कृष्णः.श्री कृष्ण शरणं मम.श्री कृष्ण शरणं मम.चिन्ता सन्तान हन्तारो यत्पादांबुज रेणवः। स्वीयानां तान्निजार्यान प्रणमामि मुहुर्मुहुः ॥ यदनुग्रहतो जन्तुः सर्व दुःखतिगो भवेत । तमहं सर्वदा वंदे श्री मद वल्लभ नन्दनम॥ जय श्री कृष्णः

मंगलवार, 8 जनवरी 2013

सन् 2013 और आपकी राशि.....


ज्योतिष शास्त्र को वेदों का नेत्र कहा गया है। अर्थात वेद जो समाज के दर्पण हैं उनका नेत्र, समाज यानी मनुष्य का भूत, वर्तमान व भूविष्य, इसलिए ज्योतिष भूत, वर्तमान व भविष्य का दर्पण है। 

इसके जरिए बीती घटनाओं के बारे जानकारी तो हासिल की ही जा सकती है, वर्तमान कैसे सुधरे और भविष्य किस प्रकार चिंता मुक्त हो और प्रगति का मार्ग प्रशस्त हो, इसके बारे में भी ज्योतिष हमारा पथ-प्रदर्शन करता है। 

अतीत में हमारी ज्योतिष की परंपरा बहुत समृद्ध थी, लेकिन बीच में इसमें पीढ़ीगत परंपरा और उनकी कम जानकारी के चलते गलत व भ्रामक फलादेशों ने लोगों का ज्योतिष के प्रति विश्वास कम किया। 

लेकिन वर्तमान समय में इस विज्ञान के क्षेत्र में जो पढ़ी-लिखी नई पीढ़ी आई है, उसने न सिर्फ पुराने शास्त्रों का अध्ययन किया बल्कि नए शोधों के चलते बहुत से नई जानकारियों से ज्योतिष शास्त्र को समृद्ध भी किया है। 

इस पीढ़ी के आने के बाद पुरानी अपढ़ित व मुंहजबानी पीढ़ी अपने आप ज्योतिष के परिदृश्य से बाहर हो गई। आज पुन: सही फलादेश और ज्योषीय परिणामों की सत्यता ने लोगों का झुकाव पुन: ज्योतिष की तरफ कर दिया है। आज बड़े पैमाने पर शोध हो रहे हैं। ज्योतिष की अनेक पत्रिकाएं निकल रही हैं और उसकी अच्छी-खासी पाठक संख्या भी है। आज ज्योतिष ने अपनी एक नई पहचान बनाई है। 

ज्योतिष वह विज्ञान है जिसके द्वारा हमें वर्तमान व भविष्य की जानकारी मिलती है, मनुष्य के भविष्य का निर्धारण करने में ज्योतिष महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इससे शिक्षा के लिए तथा नौकरी के लिए कौन सा क्षेत्र चुनें, इसका भी पता सहज ही लगाकर सही निर्णय लिया जा सकता है। 
बच्ची के विवाह में बाधा आने पर किस समय विवाह के लिए प्रयास करें ताकि सफलता मिले और वह एक सुखद दामपत्य जीवन व्यतीत करे, यह ज्योतिष शास्त्र की मदद से पूर्व में ही तय किया जा सकता है।


चंद्रमा प्राय: सवा दो दिन, बुध व सूर्य एक माह, मंगल डेढ़ महीने, शुक्र लगभग एक मास, वृहस्पति तेरह महीने, शनि ढाई वर्ष और राहु-केतु 18 महीने तक एक राशि पर रहते हैं। 

संपूर्ण वर्ष में जातक के ऊपर ज्यादा प्रभाव गुरु, राहु व शनि का रहता है। इसलिए वर्ष फलगणना में इनका ज्यादा महत्व है। 

सन 2013 में शनि तुला राशिगत, गुरु वर्तमान में वृष राशिगत पर 31 मई से मिथुन राशिगत हो जाएगा। 

राहु 23 दिसम्बर 12 को अपनी पिछली राशि तुला में प्रवेश कर गया है। कन्या, तुला व वृश्चिक राशि पर शनि की साढ़ेसाती और कर्क व मीन राशि पर शनि की ढैया का प्रभाव रहेगा। ग्रहों की स्थितियों के आधार पर वर्ष 2013 में सभी राशियों के राशिफल नीचे दिए जा रहे हैं-

मेष- इस राशि पर केतु का संचार तथा शनि की दृष्टि वर्ष भर बनी रहेगी। वर्ष के आरंभ से 24 जनवरी तक राशि स्वामी मंगल उच्च राशि में होगा, इसलिए आय के साधनों में वृद्धि होगी।  

शनि की नीच दृष्टि होने से गुप्त परेशानियां तथा आर्थिक उलझनें भी आएंगी। 12 अप्रैल से 22 मई के मध्य पर इसी राशि पर मंगल तथा 13 अप्रैल से 13 मई तक सूर्य का शुभ संचार होने से व्यवसाय में लाभ के योग हैं। 

4 जुलाई से 4 अक्टूबर के मध्य मंगल की नीच दृष्टि होने से कठिनाइयों के बाद आय के साधन बनेंगे। 25 नवम्बर से मंगल की दृष्टि होने से संघर्ष के बाद धन प्राप्ति के साधन बनेंगे। 

उपाय:-  मेष राशि वालों को मंगलवार के दिन श्रीरामचरितमानस के सुन्दर काण्ड का पाठ तथा हनुमान मंदिर में किसी भी तेल में चमेली का तेल मिलाकर दीया जलाना शुभ रहेगा। 

वृष- वर्ष के प्रारंभ से इस राशि पर शुक्र की दृष्टि जबकि 30 मई तक गुरु का संचार इस राशि पर रहेगा। 17 मार्च से 10 अप्रैल के मध्य शुक्र उच्च राशि (मीन) में संचार करेगा। 
आमदनी व सुख-साधनों में वृद्धि होगी। 10 अप्रैल से 3 मई के मध्य शुक्र व्यय स्थान में होने से खर्च अधिक रहेगा। 

4 मई से 28 मई के मध्य शुक्र इसी राशि में शुभ रहेगा। 11 अगस्त से 5 दिसम्बर के मध्य शुक्र कन्या राशि में जाकर नीच का हो जाएगा। 

इस बीच आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। खर्च अधिक हो सकते हैं। 

उपाय:- इस राशि वालों के लिए शुक्रवार का व्रत व कन्या पूजन उत्तम रहेगा। 


मिथुन- वर्ष के आरंभ में इस राशि पर सूर्य व बुध की दृष्टि रहेगी। 15 जनवरी से बुध अष्टम स्थान में मंगल के साथ होने से बनते कार्य में रुकावट पैदा करेगा। 

2 फरवरी से बुध भाग्य स्थान में मंगल से युति करेगा तथा 9 अप्रैल की रात्रि से 27 अप्रैल तक बुध नीच राशिगत होने से स्वास्थ्य हानि, आय में कमी तथा खर्च वृद्धि करेगा। 27 मई से 3 अगस्त के मध्य बुध मिथुन राशिगत होकर बिगड़े कार्यों में सुधार करेगा। 

परन्तु 4 अगस्त से 4 सितम्बर के मध्य बुध कर्क राशि में होने से खर्च में वृद्धि करेगा। 15 सितम्बर से बुध उच्च राशि में होगा इसलिए आय के स्रोतों में कुछ सुधार होगा। 

21 अक्टूबर से कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। 

उपाय:- मिथुन राशि वाले जातक बुधवार को श्रीविष्णु सहस्रनाम का पाठ करें और गाय को हरा चारा खिलाएं। 

कर्क- इस राशि पर वर्ष भर शनि की ढैया का प्रभाव रहेगा, जिससे आय में कमी, व्यर्थ खर्च, तनाव व पारिवारिक उलझनें रहेंगी। 

वर्ष के आरंभ से 24 जनवरी तक मंगल की अशुभ दृष्टि रहने से खर्च ज्यादा, मानसिक तनाव व चोट आदि लगने का भय बना रहेगा। 

12 अप्रैल से 23 मई तक मंगल की नीच दृष्टि से क्रोध व खर्च ज्यादा होगा। 16 जुलाई से 26 अगस्त तक सूर्य का संचार होने से स्वास्थ्य संबंधी परेशानी और इसके बाद अशांति का योग है। 

उपाय:- इस राशि वाले प्रत्येक शनिवार को दशरथकृत शनि स्तोत्र का पाठ करके शनि मंदिर में सरसो का तेल चढ़ाएं। पूर्णमासी का व्रत विधि पूर्वक करना शुभ रहेगा। 

सिंह- वर्ष के आरंभ से 13 जनवरी तक सूर्य पर शनि की दृष्टि रहेगी जिससे स्वजनों से तनाव, 25 जनवरी से पुरुषार्थ में वृद्धि, 13 अप्रैल से 13 मई तक सूर्य उच्च राशि में होने से भाग्योन्नति। 

16 अगस्त से 17 सितम्बर तक लाभ व प्रगति के आसार। 15 अक्टूबर से वर्ष के अंत तक उत्साह में वृद्धि का योग है। 

उपाय:- इस राशि वाले नित्यप्रति हृदय स्तोत्र का पाठ करें तथा रविवार व्रत रखें। 
      

कन्या- वर्ष भर शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव रहेगा परन्तु जनवरी से 30 मई तक गुरु की दृष्टि के कारण विपरीत परिस्थितियों के बावजूद निर्वाह योग्य आमदनी के साधन बनेंगे। 

9 अप्रैल से 27 अप्रैल तक बुध नीच राशि में रहेगा, इसलिए स्वास्थ्य की हानि, आय में कमी और खर्च में वृद्धि होगी। 28 अप्रैल से 13 मई तक बुध अष्टम भाव में केतु युक्त होने से बनते कार्यों में अड़चन तथा आय प्रभावित करेगा। 

5 सितम्बर से वर्ष के अंत तक शुभ फल प्रगट होंगे। 

उपाय:- इस राशि वालों को बुधवार का व्रत, गो-सेवा तथा हरिहर स्तोत्र का पाठ शुभ रहेगा। 

तुला- वर्ष भर शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव रहेगा। यद्यपि शनि इस राशि पर उच्च का होकर संचार करेगा परन्तु राहु युति होने से भाग्योन्नति व आय वृद्धि में बाधाएं भी रहेंगी। 

13 अप्रैल से 14 मई के मध्य इस राशि पर सूर्य की नीच दृष्टि होगी, इसलिए आय कम व खर्च अधिक रहेगा। स्वास्थ्य संबंधी विकार उत्पन्न होंगे। 31 मई से तुला राशि पर गुरु की पंचम दृष्टि रहेगी, इसलिए परिस्थिति में क्रमश: सुधार होगा। 

11 अगस्त से 5 सितम्बर तक शुक्र कन्या राशि में संचार करेगा तो आय कम व खर्च अधिक होगा। 5 सितम्बर से 2 अक्टूबर तक शुक्र तुला राशि में होने से मान-प्रतिष्ठा में वृत्रि, धन लाभ व उन्नति के योग बनेंगे। 

4 अक्टूबर से पुन: व्यय अधिक हो जाएगा। 

उपाय:- इस राशि वालों के लिए शुक्रवार का व्रत तथा श्वेत मूंगा पहनना शुभ रहेगा। 


वृश्चिक- वर्ष भर साढ़ेसाती का प्रभाव होने से संघर्षमयी परिस्थितियां रहेंगी परन्तु वर्ष के आरंभ से 24 जनवरी तक मंगल उच्च राशिस्थ तृतीय स्थान में रहेगा जिससे पराक्रम में वृद्धि का योग मिलेगा। 30 र्म तक गुरु की शुभ दृष्टि के कारण शनि की साढ़ेसाती का अशुभ प्रभाव बहुत कम रहेगा। 

12 अप्रैल से 3 जुलाई तक मंगल की स्वगृही दृष्टि होगी, इसलिए निर्वाह योग्य आय के साधन बनते रहेंगे। 18 अगस्त से 4 अक्टूबर तक मंगल नीच राशि (कर्क) में संचार करेगा इसलिए आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। 

5 अक्टूबर से 25 नवम्बर तक मंगल की दृष्टि वृश्चिक राशि पर होने से निर्वाह योग्य आय के साधन बनेंगे परन्तु खर्च भी बढ़ेगा। 

उपाय:- इस राशि वालों के लिए हनुमानजी की आराधना व मंगलवार व्रत शुभ रहेगा। 


धनु- वर्ष पर शनि की तीसरी दृष्टि धनु राशि पर होने से संतान, स्त्री एवं सवारी की चिंता बनी रहेगी। 30 मई तक राशि स्वामी गुरु के षष्ठस्थ होकर संचार करने से सोची हुई योजनाओं में विलम्ब हो सकता है। 

31 मई के पश्चात वर्ष के अंत तक गुरु की स्वगृही दृष्टि होने से रुके हुए कार्य बनेंगे। 7 नवम्बर से वर्षान्त तक स्वामी गुरु वक्री अवस्था में संचार करेगा परन्तु समय उत्तम ही रहेगा। 

उपाय:- इस राशि वालों लिए गुरुवार का व्रत तथा धर्मग्रंथ का दान श्रेयष्कर होगा। 



मकर- राशि स्वामी शनि वर्ष भर उच्च राशिस्थ दशम भाव में राहु युक्त होकर संचार करेगा। फिजूलखर्ची व मानसिक चिंता रहेगी। 

वर्ष के आरंभ से 25 जनवरी तक मंगल उच्चस्थ संचार करने से धन लाभ के अवसर भी प्राप्त होंगे। 30 मई तक मकर राशि पर गुरु की शुभ दृष्टि होने से शुभ कार्यों पर खर्च भी अधिक होंगे। 

16 जुलाई से 16 अगस्त के मध्य सूर्य की दृष्टि होने से स्वास्थ्य में विकार उत्पन्न हो सकता है। 4 जुलाई से 5 अक्टूबर तक मंगल की दृष्टि पड़ने से मान-प्रतिष्ठा एवं संसाधनों में वृद्धि होगी।


उपाय:- इस राशि वालों के लिए शनिवार को सरसो के तेल में अपना चेहरा देखकर शनि मंत्र ऊं शं शनैश्चराय नम:पढ़ते हुए उसे मंदिर चढ़ाना तथा प्रत्येक सोमवार व शनिवार को कच्ची लस्सी, बिल्वपत्र ऊं नम: शिवायमंत्र के साथ चढ़ाना शुभ रहेगा। 


कुंभ- शनि ग्रह भाग्य स्थान में उच्च राशिगत (तुला) में राहु से युक्त होकर संचार करेगा। 

आय के साधनों में वृद्धि और भाग्योन्नति में भी वृद्धि का योग मिलेगा। 
25 जनवरी से 4 मार्च तक मंगल कुंभ राशि में संचार करने से व्यवसाय और गृह संबंधी कुछ उलझनें मिल सकती हैं। 

12 फरवरी से 14 मार्च तक कुंभ राशि पर मंगल के साथ सूर्य का संचार होने से बनते कार्यों में कुछ विघ्न-बाधाएं आ सकती हैं परन्तु 31 मई से राशि पर वृहस्पति की दृष्टि से बिगड़े कार्यों में सुधार होगा। 


उपाय:- इस राशि वालों को शनिवार को शनि स्तोत्र का पाठ करके शनि मंदिर में सरसो का तेल चढ़ाना चाहए।

  मीन- वर्ष भर शनि की ढैया के कारण मानसिक तनाव, शरीर कष्ट और आर्थिक उलझनें रहेंगी। 

गुप्त चिंताएं बढ़ेंगी। वर्ष के आरंभ से 30 मई तक राशि स्वामी गुरु तीसरे स्थान पर रहेगा इसलिए नौकरी और व्यवसाय में अनुकूल स्थिति रहेगी। 

31 मई से वर्ष के अंत तक गुरु चतुर्थ योग रहेगा इसलिए भूमि-जायदाद संबंधी लाभ होने के योग बन सकते हैं। 


उपाय:- इस राशि वालों के लिए सूर्य की उपासना करना श्रेष्ठ रहेगा। ऊं धूपि: सूर्याय नम:मंत्र का एक माला नित्यप्रति जप भी करें।



शुभमस्तु !!


2 टिप्‍पणियां:

  1. नमस्ते मेरा भाग्य कब कुलेगा मुझे कब जॉब मिलेगा मेरा नाम प्रदीप कुमार गुप्ता हे जनम 30/०१/१९७८ को प्रात; ११;४५ पर हुआ

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  2. नमस्ते मेरा भाग्य कब कुलेगा मुझे कब जॉब मिलेगा मेरा नाम प्रदीप कुमार गुप्ता हे जनम 30/०१/१९७८ को प्रात; ११;४५ पर हुआ

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