जय श्री कृष्णः.श्री कृष्ण शरणं मम.श्री कृष्ण शरणं मम.चिन्ता सन्तान हन्तारो यत्पादांबुज रेणवः। स्वीयानां तान्निजार्यान प्रणमामि मुहुर्मुहुः ॥ यदनुग्रहतो जन्तुः सर्व दुःखतिगो भवेत । तमहं सर्वदा वंदे श्री मद वल्लभ नन्दनम॥ जय श्री कृष्णः

रविवार, 6 जनवरी 2013

रमल ज्योतिष .......2




रमल अरबी ज्योतिष की विद्या है । अरबी भाषा में रमल का अर्थ रेत होता है । अरब देशों में ज्योतिषार्य भविष्य कथन के लिए रेत पर बिन्दु और लकीरें खींचकर गणनाएँ किया करते थे । इस प्रक्रिया का आधार रेत होने के कारण इसे अरबी भाषा में रमल कहा गया ।
अरब देशों से यह विद्या मध्य युग में भारत पहुँची । तत्कालीन व्याकरण शास्त्रियों ने इस अरबी विद्या के अरबी और फारसी भाषा में लिखे सूत्रों का संस्कृत अनुवाद किया । 

इस प्रकार भारत में संस्कृत भाषा में रमल विद्या का प्रचार-प्रसार होने लगा । इसी क्रम में रमल की उत्पत्ति को लेकर शिव-पार्वती आदि के प्रसंग प्रचलित हो गये, जो सत्य प्रतीत नहीं होते ।

अस्तु रमल से किसी भी प्रश्न का उत्तर जाना जा सकता है । इसके लिए एक निश्चित पद्धति के द्वाराप्रस्तार (रमल कुण्डली) बनाया जाता है । 

रमल की कुण्डली में बिन्दु एवं लकीर से बनी 16 आकृतियां की स्थिति का अध्ययन करके उसके शुभाशुभ फलों को जाना जाता है । रमल की कुण्डली बनाने हेतु सामान्यतः पासे का प्रयोग किया जाता है । पासे उपलब्ध न होने की स्थिति में एक से सौ तक संख्या के मध्य चार संख्या प्रश्नकर्ता से बुलवाकर भी रमल की कुण्डली (प्रस्तार) बनाया जा सकता है । 

रमल के द्वारा बिना जन्म कुण्डली, जन्म तारीख एवं जन्म समय के भी अपने मन में आए प्रश्नों का उत्तर जाना जा सकता है । 
रमल द्वारा भविष्यवाणी करने के सन्दर्भ में अनेक नियम और वर्जनाएँ बताई गई हैं । सूर्योदय से लेकर दोपहर 12 बजे तक का समय पासे डालकर उत्तर पाने के लिए अनुकूल होता है । 

पासे डालते समय रमलाचार्य को अपने इष्ट मंत्र का जप मन-ही-मन करना चाहिए । निम्नलिखित स्थितियों में रमल विद्या द्वारा प्रश्न का उत्तर जानना निषेध बताया गया है ।

१॰ विनोद-पूर्ण माहौल में उत्सुकतावश तथा शास्त्र की परीक्षा के लिए रमल का प्रयोग नहीं करना चाहिए ।
२॰ यात्रा के समय, पलंग पर बैठकर, दूसरे के घर में रमल के पासे नहीं डालने चाहिए ।

३॰ शुद्ध एवं पवित्र समतल भूमि या लकड़ी के तख्ते पर रमल के पासे डालने चाहिए ।

४॰ रमल द्वारा मूक-प्रश्नों के उत्तर भी दिए जा सकते हैं । अर्थात् यदि प्रश्नकर्त्ता अपना प्रश्न रमलाचार्य को नहीं बताए, तब भी उसका प्रश्न तथा उत्तर जाना जा सकता है ।

५॰ रमल में बिन्दु एवं लकीर के द्वारा 16 शक्लों की सहायता से प्रस्तार बनाकर फलादेश किया जाता है । प्रस्तार में एक ही शक्ल कई बार आ सकती है तथा कुछ शक्लें अनुपस्थित भी हो सकती है । प्रत्येक शक्ल के पृथक्-पृथक् शुभाशुभ गुणधर्म होते हैं । इनका ज्ञान होना परम आवश्यक है ।

रमल में राशियों को विभिन्न शक्लों के द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। 

रमल की शक्लें बिन्दु एवं लाइन (पंक्ति) से बनी होती है। एक शक्ल में अधिकतम चार बिन्दु या पंक्ति अथवा दोनों का मिलाजुला रुप हो सकता है। विभिन्न क्रम में बिन्दु एवं लाइन को व्यवस्थित करने पर अधिकतम १६ प्रारुप तैयार होते हैं। अतः रमल में १६ शक्लें बताई गई हैं। प्रत्येक शक्ल के विशिष्ट गुणधर्म होते हैं। शक्लें राशियों का प्रतिनिधित्व करती हैं ।

शक्लें राशियों का प्रतिनिधित्व करती हैं । राशियों के स्वामी सम्बन्धित शक्ल का स्वामी होता हैं । यदि कोई शक्ल मेष राशि को प्रदर्शित करती है, तो उस शक्ल का स्वामी मंगल होगा, क्योंकि मेष राशि का स्वामी मंगल होता हैं । विभिन्न राशियों के स्वरुप एवं नाम निम्न प्रकार है ------

लह्यानः-  इस शक्ल का भारतीय नाम वाग्मी माना गया है । लह्यान शक्ल को ब्राह्मण, धर्म-परायण, कर्तव्यनिष्ठ, मधुर वचन बोलने वाली, काले नेत्र तथा लम्बे आकार वाली माना गया है । यह मिष्ठान्न-प्रिय, सुगन्ध-प्रिय तथा कार्य-कुशल मानी गई है । 

यह ऐसे व्यक्ति का प्रतिनिधित्व करती है, जिसके मुख में नीचे का एक दाँत टूटा हुआ, गंजापन अथवा कोई निशान होता है । इस शक्ल को शुभ माना गया है । यह शक्ल पुरुष संज्ञक मानी गई है । इस शक्ल की राशि धनु, स्वामी ग्रह गुरु, दिशा पूर्व, तत्त्व अग्नि, प्रकृति खारीज, कालबल दिन, द्विस्वभाव शक्ल माना गया है । यदि संतान सम्बन्धी प्रश्न हो तथा प्रस्तार के पाँचवें घर में यह शक्ल आए, तो पुत्र जन्म की सूचक होती है ।

कब्जुल दाखिलः- इस शक्ल का भारतीय नाम तीक्ष्णांशु माना गया है । कब्जुल दाखिल शक्ल को क्षत्रिय वर्ण, गेहुंआ रंग, काले नेत्र युक्त, मधुर-भाषी, चतुर, बड़े सिर तथा मध्यम कद वाला बताया गया है । इसे बोलने में हाजित-जवाब, शिल्प-कला में निपुण, मिलि हुई भौंहें वाली तथा लम्बी गर्दन वाली माना गया है । 

इससे प्रभावित व्यक्ति क्रय-विक्रय में कुशल, सुन्दर वस्त्र एवं आभूषण का संग्राहक होता है । उसका पेट बड़ा होता है, जिसमें बल पड़ते हैं । इस शक्ल की राशि सिंह, स्वामी ग्रह सूर्य, दिशा दक्षिण, तत्त्व पृथ्वी, द्वि-स्वभाव शक्ल, प्रकृति दाखिल, कालबल रात्रि माना गया है । यह स्त्री संज्ञक शक्ल है । यह शुभ मानी जाती है । इसका निवास धर्म-स्थल अथवा दुकान आदि होता है । संतान सम्बन्धी प्रश्न में यदि यह शक्ल पाँचवें भाव में हो, तो निश्चित कन्या का जन्म होता है ।

कब्जुल खारीजः- इस शक्ल का भारतीय नाम पात माना गया है । कब्जुल खारीज शक्ल को मलेच्छ वर्ण, अत्याचारी, अभद्र, मुख पर घाव या चोट आदि का चिह्न वाली, बिल्ली के समान नेत्रों वाली, बड़ी ध्वनि उत्पन्न करने वाली, मोटे दाँत वाली तथा कटु पदार्थों को प्रिय मानने वाली होती है । 

यह चुगलखोर, अशुभ स्थानों पर निवास करने वाली, मुँह पर चेचक के दाग तथा छाती पर बालों वाली होती है । इस शक्ल की राशि कुम्भ, स्वामी ग्रह शनि, दिशा पूर्व, तत्त्व अग्नि, पुरुष संज्ञक, द्विस्वभाव, प्रकृति खारीज, कालबल दिन तथा अशुभ शक्ल माना गया है । प्रस्तार में शुभ घर में इसकी उपस्थिति पीड़ादायक फल देती है ।

जमातः- इस शक्ल का भारतीय नाम सौम्य माना गया है । जमात शक्ल गेहुँए वर्ण की, चित्रकला में निपुण, गुणवान, शुद्र वर्ण वाली, लम्बे, सुन्दर तथा मनमोहक चेहरे वाली, मिष्ठान्न-भोजी होती है । यह बढ़ी हुई दाढ़ी तथा शरीर पर फोड़े-फुँसियों के चिह्नों से युक्त, चौड़े माथे वाली तथा पाठशाला में निवास करने वाली होती है । यह नपुंसक संज्ञक शक्ल है । 

इस शक्ल की राशि मिथुन, स्वामी ग्रह बुध, दिशा दक्षिण, तत्त्व पृथ्वी, स्थिर संज्ञक, प्रकृति साबित, कालबल संध्या तथा मध्यम शुभाशुभ माना गया है । यदि प्रस्तार के सोलहवें घर में यह शक्ल आ जाए, तो प्रस्तार को बन्द माना जाता है तथा उस प्रस्तार का प्रयोग न करके नया प्रस्तार बनाया जाता है ।

फरहाः- इस शक्ल का भारतीय नाम दैत्य गुरु माना गया है । यह शक्ल लम्बे शरीर, गोरा रंग, पृथक् भौंहों, छोटे एवं काले नेत्रों तथा पतले होठों को प्रदर्शित करती है । इसका स्वरुप सुन्दर होता है । यह लिखने में कुशल, विनोद-प्रिय, मिष्ठान्न-भोजी तथा अग्नि तत्त्व की स्वामिनी होती है । यह पतली नाक वाली, गोल चेहरे पर तिलादि चिह्न एवं कान के नीचे किसी निशान को प्रदर्शित करती है । 

इस शक्ल की राशि तुला, स्वामी ग्रह शुक्र, दिशा पश्चिम, तत्त्व अग्नि, चर संज्ञक, प्रकृति मुंकलिब, कालबल संध्या तथा शुभ शक्ल मानी गयी है ।

उक़लाः- इस शक्ल का भारतीय नाम मन्दग माना गया है । उक़ला शक्ल अशुभ मानी गई है । यह काले वर्ण, बड़े और लम्बे मुख, ऊँची और मोटी नाक, छोटे मुँह एवं बड़े दाँत, लम्बी दाढ़ी एवं बड़े पेट, छोटे पैर तथा चेहेर के या सिर के बाँई ओर किसी प्रकार के निशान से युक्त होती है । इसके दाहिने पैर अथवा आँख में कोई दोष होता है । इस शक्ल की राशि कुम्भ, स्वामी ग्रह शनि, दिशा दक्षिण, तत्त्व पृथ्वी, चर संज्ञक, प्रकृति मुंकलिब, कालबल संध्या, नपुंसक / स्त्री संज्ञक तथा अशुभ शक्ल है ।

अंकीसः- इस शक्ल का भारतीय नाम सौरि माना गया है । अंकीस की शक्ल को अशुभ माना गया है । पसका स्वरुप अप्रिय होता है । यह काले रंग की कुरुप, मलिन मुख वाली, छोटी आँखों एवं लम्बी ऊँचाई वाली, गृहकार्य में निपुण, सेवक वृत्ति वाली, खट्टी वस्तुओं की प्रेमी, झूठ बोलने वाली, आलस्य युक्त, गोल चेहरा, मोटे होंठ, बड़े सिर तथा दाँतों में विकार युक्त होती है । 

यह कृषि कार्य में निपुण होती है । इसे काले रंग की तथा लोहे की वस्तुओं को एकत्रित करने का शौक होता है । इस शक्ल की राशि मकर, स्वामी ग्रह शनि, दिशा दक्षिण, तत्त्व पृथ्वी, स्त्री संज्ञक, द्विस्वभाव, प्रकृति दाखिल, कालबल रात्रि है ।

हुमराः- इस शक्ल का भारतीय नाम लोहित माना गया है । हुमरा शक्ल क्षत्रिय वर्ण, शूरवीर, हिंसा-प्रिय, निन्दित कार्य करने में प्रवीण होती है । शरीर पर घाव के चिह्न, पीले नेत्र तथा कटु पदार्थ प्रिय होते हैं । चेहरे पर चेचक के दाग, दाढ़ी में कोई चिह्न तथा जंगल एवं पहाड़ों पर निवास करने वाली होती है । यह लड़ाकू और चोर होती है । इस शक्ल की राशि मेष, स्वामी ग्रह मंगल, दिशा पश्चिम, तत्त्व वायु, पुरुष तथा स्थिर संज्ञक, प्रकृति साबित, कालबल संध्या तथा अशुभ शक्ल होती है ।

बयाजः- इस शक्ल का भारतीय नाम विधु माना गया है । बयाज शक्ल गोरे रंग वाली, ब्राह्मण वर्ण वाली, छोटा गोल मुख, बड़े एवं काले नेत्रों वाली, मधुर भाषिणी, सुगन्धित पदार्थों की प्रेमी, भ्रमणरत, देवों की पूजा करने वाली, छाती या पेट पर जले के निशान से युक्त, अच्छे वस्त्र पहनने वाली तथा वृक्ष स्थान में रहने वाली, मिष्ठान्न भोजी एवं पत्थर की संग्राहक होती है । यह शक्ल शुभ मानी जाती है । प्रस्तार के नवें घर में यह शक्ल आने पर स्वगृही होती है तथा भाग्य से सहायता मिलने की सूचक होती है । इस शक्ल की राशि कर्क, स्वामी ग्रह चन्द्रमा, दिशा उत्तर, तत्त्व जल, स्त्री तथा स्थिर संज्ञक, प्रकृति साबित, कालबल संध्या माना गया है ।

नस्त्रुल खारिजः- इस शक्ल का भारतीय नाम उष्णगु है । नस्त्रुल खारिज शक्ल क्षत्रिय वर्ण, लम्बे शरीर तथा विशाल नेत्रों वाली, गोरे रंग की, छोटी नाक, छोटा सिर, चौड़ी छाती, पतली अंगुलियाँ, आस्तिक, सुन्दर स्वरुप वाली, सुरुचि-पूर्ण वस्त्रों से युक्त तथा अच्छा भोजन करने वाली, इसके मुख पर तिल, मस्सा आदि चिह्न होता है । इसकी आवाज कड़क होती है । यह राज-कार्य में निपुण होती है । प्रस्तार के दसवें घर में यह स्वगृही होती है । यदि राज्यपक्ष से जुड़ा हुआ प्रश्न हो, तो प्रस्तार के दसवें घर में यह कार्य-सिद्धि देती है । इस शक्ल की राशि सिंह, ग्रह स्वामी- सूर्य, दिशा पूर्व, तत्त्व अग्नि, पुरुष तथा द्विस्वभाव संज्ञक, प्रकृति खारीज, कालबल दिन तथा शुभ शक्ल है ।

नस्त्रुल दाखिलः- इस शक्ल का भारतीय नाम सूरि माना गया है । नस्त्रुल दाखिल शक्ल गोरे रंग की, गोल मुख, चेहरे पर तिल आदि चिह्न, पैर में किसी प्रकार का निशान, बड़ी नाक, बड़े सिर, बड़े नेत्रों वाली, छोटे शरीर तथा कान्तिमय होती है । यह ब्राह्मण वर्ण वाली, तपस्वी, अध्ययनप्रिय, उत्तम सलाहकार, मूल्यवान् वस्तुओं की संग्राहक, स्वादिष्ट भोजन करने वाली होती है । प्रस्तार में सातवें घर में आने पर पुरुष संज्ञक तथा शेष घरों में स्त्री संज्ञक मानी जाती है । इस शक्ल की राशि मीन, ग्रह स्वामी गुरु, दिशा उत्तर, द्विस्वभाव संज्ञक, प्रकृति दाखिल, कालबल रात्रि तथा शुभ शक्ल मानी गयी है ।

अतवे खारिजः- इस शक्ल का भारतीय नाम चक्रमाना गया है । अतवे खारिज शक्ल शुभ नहीं है । यह मलेच्छ वर्ण, लम्बे, दुर्बल और चोट एवं घावादि के निशानों से युक्त शरीर वाली, कान्तिहीन, पीले नेत्र, मुख में दुर्गन्ध, मुख में नीचे का दाँत टूटा हुआ अथवा विकार युक्त, नीचे का धड़ बड़ा एवं पतली गर्दन एवं छोटे सिर वाली होती है । इसका निवास पर्वत, वन, कुआँ अथवा किले में माना गया है । यह ऊनी वस्त्र पहनने वाली, निम्नस्तरीय कार्यों में संलग्न शक्ल मानी गई है । इस शक्ल की राशि मकर, ग्रह स्वामी शनि, दिशा पूर्व, तत्त्व अग्नि, पुरुष तथा द्विस्वभाव संज्ञक, प्रकृति खारिज, कालबल दिन माना गया है ।

नकीः- इस शक्ल का भारतीय नाम आर माना गया है । नकी शक्ल गौरवर्ण, मध्यम कद, कमजोर शरीर, छोटे मुँह, बड़े नाक एवं होंठ, बड़े तथा विकार युक्त दाँत, पीले नेत्र वाली होती है । इसके केश लाल होते हैं । यह जुझारु, शस्त्रधारक, युद्ध में कुशल, क्षत्रिय वर्ण वाली होती है । इसका निवास स्थान जल के समीप अंधेरे स्थानों पर होता है । इस शक्ल की राशि वृषभ, स्वामी ग्रह शुक्र, दिशा उत्तर, तत्त्व जल, नपुंसक तथा चर संज्ञक, प्रकृति मुंकलिब, कालबल संध्या तथा अशुभ शक्ल मानी गयी है ।

अवते दाखिलः- इस शक्ल का भारतीय नाम कविमाना गया है । अवते दाखिल शक्ल गेहुँआ रंग, दुबले-पतले किन्तु लम्बे शरीर वाली, सुन्दर गोल चेहरे पर तिल एवं पृथक् भौंहों वाली, काले नेत्र तथा पाँव पर चिह्न युक्त होती है । इसे उत्तम पदार्थ प्रिय होते हैं । इसका निवास वृक्षों की जड़ों में अथवा वृक्षों से घिरे हुए स्थान पर होता है । इस शक्ल की राशि वृषभ, ग्रह स्वामी शुक्र, दिशा पश्चिम, तत्त्व वायु, स्त्री एवं द्विस्वभाव संज्ञक, प्रकृति दाखिल, कालबल रात्रि तथा शुभ शक्ल मानी गई है ।

इज्जतमाः- इस शक्ल का भारतीय नाम बोधन माना गया है । इज्जतमा शक्ल शूद्र वर्ण वाली मानी गई है । यह लिपिक कार्य करने वाली, गुणवान्, गेहुँए वर्ण वाली, मुँह पर दाईँ ओर चिह्न युक्त, छोटी नासिका तथा चौड़े दाँतों वाली, कोमल स्वभाव तथा मूल्यवान् धातुएँ समीप रखने वाली होती है । इसका निवास स्थान पाठशाला में माना गया है । यह सुन्दर दाढ़ी वाली, रंगीन वस्तुओं के प्रति अनुराग रखने वाली, गणना एवं ज्योतिषीय कार्य में निपुण होती है । इस शक्ल की राशी मिथुन, ग्रह स्वामी बुध, दिशा पश्चिम, तत्त्व वायु नपुंसक तथा स्थिर संज्ञक, प्रकृति साबित, कालबल संध्या तथा मध्यम शुभाशुभ वाली शक्ल मानी गयी है ।


तरीकः- इस शक्ल का भारतीय नाम "शीतांशु" माना गया है । तरीक शक्ल वैश्य वर्ण की मानी गयी है । इसका शरीर बड़ा, किन्तु दुबला-पतला एवं कमजोर, रंग गोरा, बारीक आवाज, छोटा सिर, बड़े नेत्र, आकर्षक, मिष्ठान्न-प्रिय, शरीर के बाएँ भाग में चिह्न युक्त, राज्यपक्ष से जुड़े व्यक्तियों की संदेशवाहक, मार्ग में भ्रमण करने वाली होती है । इसका निवास स्थान पर्वतों पर स्थित जल में होता है । इसे मूल्यवान् वस्तुएँ प्रिय होती है । इस शक्ल की राशि कर्क, ग्रह स्वामी चन्द्रमा, दिशा उत्तर, तत्त्व जल,नपुंसक तथा चर संज्ञक, प्रकृति मुंकलिब, कालबल संध्या तथा शुभ शक्ल मानी 
गयी है ।



शुभमस्तु !!!




















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