जय श्री कृष्णः.श्री कृष्ण शरणं मम.श्री कृष्ण शरणं मम.चिन्ता सन्तान हन्तारो यत्पादांबुज रेणवः। स्वीयानां तान्निजार्यान प्रणमामि मुहुर्मुहुः ॥ यदनुग्रहतो जन्तुः सर्व दुःखतिगो भवेत । तमहं सर्वदा वंदे श्री मद वल्लभ नन्दनम॥ जय श्री कृष्णः

मंगलवार, 1 जनवरी 2013

वास्तु शास्त्र की प्राचीन कहावतें......



वास्तु शास्त्र हमें पांच भौतिक तत्वों में संतुलन बनाये रखने की शिक्षा देता है.हमारी यह प्राचीन धरोहर प्रकृति अनुसंधान पर आधारित उच्च कोटि का विज्ञान है, यही वास्तु हमारे महापुरुषों ने हजारों वर्ष पहले अपनी भाषा में मनुष्यों की भलाई के लिए कहावतो में प्रगट किया, उनमे से से कुछ कहावते आपके समक्ष लिख रहा हूँ.......



जाके उत्तर धोबी सौवे, ताहि भुवन को मालिक रौवे” 

अर्थात:- जिस घर के उत्तर की तरफ धोबी रहता हो, उस भवन के मालिक को कई प्रकार की समस्याएं आती है.

जाके पूरब पीपल हौवे, सो लक्ष्मी पर लक्ष्मी खौवे

अर्थात:- जिस घर के पूर्व में पीपल का वृक्ष होता है, उस घर में लगातार धन तथा पारिवारिक हानि उठानी पड़ती है.

जेंहि भुई पर अशोक वृख बासा, शोक रहित उई भवन सुवासा

अर्थात:- जिस भूमि पर अशोक का वृक्ष होता है, वंहा का भवन उत्तम सुखदायक होता हैं, अर्थात घर की सीमा में अशोक का पेड़ का होना परम सुखदायक हैं.

सिंहभूमि जो रहने जावे, तन मन आपन सकल गवाये

अर्थात:- आगे से चौड़े और पीछे से संकरे अर्थात शेर मुखी भवन में रहने वाले के शरीर स्वास्थ्य एवं धन दोनों की हानि होती है.

बड़ो दुआर भावे, आफत बुलावे

अर्थात:- जो व्यक्ति घर से बड़ा दरवाजा (मुख्य द्वार) लगाता है, वंहा नाना प्रकार की समस्या आती है.

बीचे कूप न आवै धुप हौवे रंक रहे जो भूप” 

अर्थात:- जिस भवन के बीचो बीच कूआं हो तथा जिस भवन में धुप न आती हो, वंहा के निवासी दरिद्रता को प्राप्त होते है.

ईश पूजा, नैरित भारी, अग्नि अगन जरावै,
वायु खुल्ला, नाभि खाली, उही घर राम रखावे” 

अर्थात:- जिस घर में ईशान्य में पूजा होती है, नेॠत्य क्षेत्र भारी हो, आग्नेय कोण खुला हो तथा जिसका ब्रह्म स्थान (नाभि क्षेत्र) खाली हो उस भवन के निवासियों पर ईश्वर की कृपा दृष्टि रहती है.

जिस भवना में गौअन रैवें उहिकी नाव मुरारी खेवे

अर्थात:- जिस भवन में गायों का वास होता है, वंहा भगवान् की कृपा बनी रहती है. 

गर्दभ लौटे, शुकर जनने नर को वधा ह्वे जाय,
बिन सुद्धी ता पर रहे, उके वैई खा जायै

अर्थात:- जिस जमीन पर गधा लोट लगावै, सूअर जने तथा जन्हा किसी का वध हो जाएँ उस भूमि पर रहने वालों को बिना शुद्धि नही रहना चाहियें अन्यथा वंहा के निवासियों का धीरे धीरे नाश होने लगता है.



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