जय श्री कृष्णः.श्री कृष्ण शरणं मम.श्री कृष्ण शरणं मम.चिन्ता सन्तान हन्तारो यत्पादांबुज रेणवः। स्वीयानां तान्निजार्यान प्रणमामि मुहुर्मुहुः ॥ यदनुग्रहतो जन्तुः सर्व दुःखतिगो भवेत । तमहं सर्वदा वंदे श्री मद वल्लभ नन्दनम॥ जय श्री कृष्णः

बुधवार, 9 जनवरी 2013

रत्नों द्वारा रोग दूर करें......



आजकल गली-चौराहे व चौपाटियोँ पर जगह-जगह रत्नोँ की दुकानेँ खुल गई हैँ। 

विक्रेता रत्न के बारे मेँ जानेँ या ना जानेँ, पर इस फायदेमंद धंधे को अपनाने से पीछे नहीँ हटते। 

वे जानतेहैँकिआजकल रातोँ-रात लखपति बनने केसपने आदमी देखता है।

रोगमुक्त जीजीनाचाहता है। फिर इन रत्नोँ की जानकारी चाशनीदार भाषा मेँ रूपान्तरित करखरीदार के समक्ष पेश करनेमात्र से लाभ ही लाभ है..

तो क्या बुरा है। आपको बता देँ कि कोई भीरत्न अच्छे जानकार से पूछे बगैर धारण न करेँ। 

बिना सोचे-समझे पहननेँ परसंभवतः आपको हानि हीहाथ लगेगी।

आइए आपको रत्नोँ की संक्षिप्त जानकारी देँ :-

1. माणिक्य :- 

यह सिँह राशि का रत्न है जो सूर्य के दोषोँ को दूर 

करता है। 

इसके अलावा यह सिर, हृदय, पेट व नेत्रोँ पर 

प्रभावडालता है। 

इससे ब्लड प्रैशर, मधुमेह जैसी बीमारियोँ मेँ 

लाभ पहुँचाता है। 

इसके अलावा पीठ मेँ उत्पन्न पीड़ा वातविकार, कर्ण रोग मेँ प्रभाव दिखाता है।



2. नीलम :- 

यह कुंभ व मकर राशि का रत्न है। 

यहशनि पीड़ा को शांत करता है। 

इस रत्न को धारण करने से दाम्पत्य सुख मेँ वृद्वि,टयुमर, घुटनोँ का दर्द, जोड़ोँ का दर्द, घाव मेँ सड़न, 

श्वास व अंडकोष की बीमारी जैसे कष्ट दूर होते हैँ। 

3. मोती :- 

यह चंद्र रत्न है।अतः कर्क राशि वालोँ के लिए फायदेमंद है। यह त्वचा रोग, पेट संबंधी बीमारी, श्वास 

रोग, मस्तिष्क रोग मेँ लाभकारी है।

4. पुखराज :- 

यह धनु राशि का रत्न है। गुरू के दोष कोशांत करने के लिए इसे धारण किया जाता है। 

यह दांपत्य जीवन को सुखमय एवं कुछ बीमारियोँ मेँ जैसेगर्भाशय, सैक्स अंगोँ, किडनी, लीवर,

 घुटने, कोहनी के दर्द, गैस, मुत्र विकार, हड्डियोँ का दर्द दूरकर लाभ पहुँचाता है। 

इसकेअलावा गुस्से को शांत करने की क्षमता भी है इसमेँ।

5. गोमेद :- 

जो यूरेनस व् राहू  के कारण कष्टमय जीवन जीरहे हैँ, वे इसे धारण करसकते हैँ। 

 इसके अलावा 4अंक वाल (जिनका जन्मांक 4 हो) इसे धारण कर मस्तिष्क, श्वास, मूत्र,यौनांग,पेट, 

हृदय तथा तंत्रिकाओँ संबन्धी समस्या से बच सकते हैँ।

6. पन्ना :- 

यह कन्या राशिवालोँ का शुभ रत्न है। इसकेअलावा मूलांक 5 वाले भी इसे धारण कर सकते हैँ।यह रत्न 

बुध का प्रतीक है।यह दिमागी विकृति, कर्णरोग तथा दृष्टि दोष दूरकरने मेँ सहायक है।

7. हीरा :- 

मूलांक 6 एवंतुला राशि वालोँ के लिएयह रत्न उपयोगी है। शुक्रग्रह दोष नाशक रत्न है।


इससे रत्न चिकित्सक शुक्र दोष (शुक्राणुओँ की कमी),नशापान तथा चर्मरोग दूरकरते हैँ। 

8. लहसुनिया :- 

यह मीन राशि एवं मुलांक 7 वालोँ का मुख्य रत्न है। इससे केतुके प्रभाव मेँ शांति मिलती है।


इसे धारण कर आप चमड़ी के रोग, पाचन विकार, रक्त विकार, आमाशय एवं दृष्टि विकार से बच 
सकते हैँ।यह शरीर मेँ स्फूर्ति प्रदान करने वाला रत्न है।
9. मूंगा :- 

यह वृश्चिक एवं मूलांक 9 वालोँ के लिए अति उत्तम रत्न है। मंगलका प्रतीक यह रत्न घाव,


छाले, हड्डी व जोड़ोँ के रोग,आँतविकार, रक्त दोष,पाचक अंगोँ के दोष तथाटयूमर, कैँसर जैसी घातक


बीमारियोँ को दूर करता है।

रत्न धारण करने से पूर्व किसी अच्छे रत्न चिकित्सक या विद्वान् ज्योतिषी से मिलेँ, तभी उसे धारण 

करेँ वरना बाज़ार  कई  अज्ञानी अपना-अपना बखान करते मिल जाते हैँ,

जो आपके लिए घातक सिद्व

हो सकते हैँ।

शुभमस्तु !!

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

कृपया अपने प्रश्न / comments नीचे दिए गए लिंक को क्लिक कर के लिखें

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails

लिखिए अपनी भाषा में