जय श्री कृष्णः.श्री कृष्ण शरणं मम.श्री कृष्ण शरणं मम.चिन्ता सन्तान हन्तारो यत्पादांबुज रेणवः। स्वीयानां तान्निजार्यान प्रणमामि मुहुर्मुहुः ॥ यदनुग्रहतो जन्तुः सर्व दुःखतिगो भवेत । तमहं सर्वदा वंदे श्री मद वल्लभ नन्दनम॥ जय श्री कृष्णः

बुधवार, 27 फ़रवरी 2013

लाल किताब द्वारा मकान कुंडली बनाकर समस्याएं दूर करें..




लाल किताब ही एकमात्र ऐसा विषय है जिसमेज्योतिष का कोई भी अंग अछूता नहींफिर चाहे वो कुंडली शास्त्र हो या सामुद्रिक शास्त्रचाहे वो शरीरविज्ञान हो या वास्तु शास्त्र। 
लाल किताब में हर विषय को इतने खुबसूरत ढंग से  तार्किक रूप सेबताया गया है की इसके रचयिता परम पूजनीय पंडित रूप चंद जोशी जी को शत शत नमन है। 
इसी कड़ी में पंडित जी ने घर के नक़्शे से जनम कुंडली की जांच  दुरुस्ती कैसे की जाती है इस बाबत विस्तार से बताया है और साथ ही यह भी समझाया है की व्यक्ति अपने घर के नक़्शे के आधार परअपनी स्वयं की जनम कुंडली कैसे बना  जान सकता है और यदि कोई ग्रह कुंडली में अशुभ फल दे रहा हो तो घर के नक़्शे की सहायता से उसे कैसे ठीक किया जा सकता है ताकि शुभ फलों में और वृद्धिकी जा सके। 

हम सब जानते हैं की प्रत्येक दिशा निर्धारित है ठीक उसी प्रकार घर में भी प्रत्येक भाव निर्धारित है जिसको भली भांति समझने के लिए आप ऊपर दिए गए चित्र को ध्यान पूर्वक देखेंगे.. तो पायेंगे की चित्र में जो संख्याएं दी गयी हैं वो घर के नक़्शे के मुताबिक कुंडली के १२ भाव हैं। 
अब जो ग्रहकुंडली के जिस जिस भी भाव में होगा वह ग्रह घर के नक़्शे के मुताबिक बने भाव में भी ज़ाहिर हो रहाहोगा
उदहारण के लिए मान लीजिये की यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में सूरज नवम भाव में है जो कीऊपर दिए गए चित्र के मुताबिक घर के मध्य भाग में पड़ता हैअब उस व्यक्ति के घर के ठीक मध्यभाग में कहीं  कहीं से सूरज की रौशनी आती होगी क्यूंकि सूरज का सम्बन्ध रौशनी से है
ठीक इसी तरह यदि किसी का बृहस्पति प्रथम भाव में है तो ऊपर दिए गए चित्र मुताबिक जिस दिशा में प्रथमभाव दर्शाया गया है (पूर्व दिशा मगर उत्तर की तरफउस व्यक्ति के घर के उस भाग में बृहस्पति से सम्बंधित चीज़ें होंगी यानि की हवा का प्रबंध उस तरफ से होगा या पिता या दादा के रहने का कमरा उस दिशा में होगामंदिर या पूजा स्थान भी हो सकता है। 
इसी तरह अन्य ग्रहों के बारे में भी जाना जासकता है। अब यदि किसी का शुक्र सप्तम भाव में हो तो चित्र अनुसार सप्तम भाव जहाँ दर्शाया गया है.उस दिशा में व्यक्ति का शयन कक्ष या बैठक 'ड्राईंग रूम', या कच्ची ज़मीन या गाय अस्थान आदिआदि शुक्र से सम्बंधित चीज़ें होंगी।


विशेष- - कोई ग्रह जिस भी भाव में अशुभ फल देने वाला माना गया है उस ग्रह से सम्बंधित चीज़ें घर की उस दिशा में स्थापित  होने या करने से भी व्यक्ति उसके अशुभ फल से बच सकता है। 
अब यह भी सही है की एक ही घर में कई व्यक्ति रहते हैं तो फिर घर कुंडली किस पर लागू होगीइसके लिए मेराअपना निजी अनुभव है की जो उस घर में मुखिया होगा उस पर या घर के मालिक पर या यदि किरायेदार है तो जिसकी कमाई से किराया जाता है उस पर अन्य घर के मेम्बेर्स की अपेक्षा घर कुंडलीके ग्रह ज्यादा ज़ाहिर होंगे। प्रत्येक ग्रह से सम्बंधित चीज़ें  सम्बन्धी निम्नलिखित हैं-
बृहस्पतिहवापितादादामंदिरपूजा स्थानहवा के आने का प्रबंधदरवाज़े.

सूरजरौशनीधुपराजदरबारआफिससरकारी सामान.

चन्द्रपानीमाताघोडाखाली ज़मीनपानी का स्रोत.

शुक्रकच्ची दीवारगाय स्थानपत्नीबैठकरति कक्षकच्ची उपजाऊ  ज़मीन.

मंगलखाने पीने की जगह (डायिनींग रूम), भाईशस्त्रगारअग्नि स्थान.

बुधआफिसव्यापारिक स्थानलेखागारकंप्यूटर रूमबहन बुआबकरी या परिंदों के रखने का स्थान.

शनिलड़कियों के रहने का कमराचाचातायालोहे का भारी सामानलकड़ीबार.

राहूघर की नालीगरकीगन्दा पानी निकलने का रास्ताधुएं का स्थान.

केतुरोशनदानलड़के का कमराकुत्ते के रहने की जगहजूते रखने का स्थान आदि. 
अब ऊपर दी गयी जानकारी  चित्र अनुसार चाहे आप घर के नक़्शे से कुंडली बना कर जांच करे या कुंडली से घर के नक़्शे की जांच करे बात एक ही है

जो ग्रह जहाँ अशुभ फल देता है वहां उस ग्रह की चीज़ें स्थापित  करे और जो ग्रह जिस भाव में शुभ फल देता है वहां उस ग्रह की चीज़ें स्थापित करनेसे और भी शुभ फल मिलेगा।

शुभमस्तु!!

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