जय श्री कृष्णः.श्री कृष्ण शरणं मम.श्री कृष्ण शरणं मम.चिन्ता सन्तान हन्तारो यत्पादांबुज रेणवः। स्वीयानां तान्निजार्यान प्रणमामि मुहुर्मुहुः ॥ यदनुग्रहतो जन्तुः सर्व दुःखतिगो भवेत । तमहं सर्वदा वंदे श्री मद वल्लभ नन्दनम॥ जय श्री कृष्णः

शनिवार, 9 फ़रवरी 2013

श्री सुन्दरकाण्ड द्वारा मनोकामना पूर्ण करें....



एक दुर्लभ अनुष्ठान.....



परम पूज्य गोस्वामी श्री तुलसी दास जी ने श्री राम चरित मानस मानव जाति की भलाई के लिए श्री राम तथा श्री हनुमान जी की असीम कृपा से रचना की है यह ग्रन्थ जीवन की सभी समस्याओं का एक मात्र समाधान है..

इसके विधिवत श्रद्धा पूर्ण अनुष्ठान से निश्चय ही सभी मनोकामना शीघ्र पूर्ण होती है. अनेक व्यक्तियों द्वारा यह अनुभूत है और परिणाम भी शीघ्र प्राप्त होते है. 

जीवन में सभी समस्या इस श्री हनुमान चालीसा युक्त श्री सुन्दरकाण्ड से पूर्ण होती है.


सर्वप्रथम अपने सामने एक लकड़ी की चौकोर चौकी/पटरी (उस पर सनमाइका ना हो) धोकर शुद्ध कर रखें ध्यान रहें कि उस लकड़ी की चौकी पर कोई पेंट आदि रंग ना किया हो. 

उसके ऊपर लाल रंग का रेशमी वस्त्र बिछा कर आसन प्रदान करे और श्री हनुमान जी का सुन्दर चित्र (आशीर्वाद की मुद्रा वाला) श्रद्धा से स्थापित करें.

उस चित्र के आगे शुद्ध तिल के तेल का दीपक व् गुग्गल धुप प्रज्जवल्लित करें. साथ ही एक बर्तन में गंगा जल रखें. 

उसके पास ही गुड से बनी रोटी भोग के लिए रखें. लाल पुष्पों द्वारा पूजन करके सबसे पहले श्री हनुमान चालीसा का एक बार पाठ करें.




श्री हनुमान चालीसा के पाठ के पश्चात...

"कहइ रीछपति सुनु हनुमाना, का चुप साधि रहेहु बलवाना ||
पवन तनय बल पवन समाना, बुधि बिबेक बिग्यान निधाना ||
कवन सो काज कठिन जग माहीं, जो नहिं होइ तात तुम्ह पाहीं ||"


उपरोक्त चौपाइयों का १६ (सोलह) बार जाप करें.

१६ बार जाप करने के बाद निम्न चौपाइयों का पाठ फिर श्री सुन्दरकाण्ड का पाठ करें इस प्रकार श्री सुन्दर काण्ड का पाठ के उपरान्त पुनः उपरोक्त चौपाइयों का पाठ ११ बार करें और अंत में श्री हनुमान चालीसा का पाठ करे.  

दो॰ -बलि बाँधत प्रभु बाढेउ सो तनु बरनि न जाई,
उभय धरी महँ दीन्ही सात प्रदच्छिन धाइ ||


चौ॰-अंगद कहइ जाउँ मैं पारा, जियँ संसय कछु फिरती बारा ||
जामवंत कह तुम्ह सब लायक, पठइअ किमि सब ही कर नायक ||
कहइ रीछपति सुनु हनुमाना, का चुप साधि रहेहु बलवाना ||
पवन तनय बल पवन समाना, बुधि बिबेक बिग्यान निधाना ||
कवन सो काज कठिन जग माहीं, जो नहिं होइ तात तुम्ह पाहीं ||
राम काज लगि तब अवतारा, सुनतहिं भयउ पर्वताकारा ||
कनक बरन तन तेज बिराजा, मानहु अपर गिरिन्ह कर राजा ||
सिंहनाद करि बारहिं बारा, लीलहीं नाषउँ जलनिधि खारा ||
सहित सहाय रावनहि मारी, आनउँ इहाँ त्रिकूट उपारी ||
जामवंत मैं पूँछउँ तोही, उचित सिखावनु दीजहु मोही ||
एतना करहु तात तुम्ह जाई, सीतहि देखि कहहु सुधि आई ||
तब निज भुज बल राजिव नैना, कौतुक लागि संग कपि सेना ||

छं॰ -कपि सेन संग सँघारि निसिचर रामु सीतहि आनिहैं,
त्रैलोक पावन सुजसु सुर मुनि नारदादि बखानिहैं ||
जो सुनत गावत कहत समुझत परम पद नर पावई,
रघुबीर पद पाथोज मधुकर दास तुलसी गावई ||


दो॰ -भव भेषज रघुनाथ जसु सुनहि जे नर अरु नारि,
तिन्ह कर सकल मनोरथ सिद्ध करिहि त्रिसिरारि ||


सो॰ -नीलोत्पल तन स्याम काम कोटि सोभा अधिक,
सुनिअ तासु गुन ग्राम जासु नाम अघ खग बधिक ||


इस प्रकार पाठ पूर्ण होने पर भोग अर्पण करें और अपनी मनोकामना श्री हनुमान जी के समक्ष रखें.
यह अनुष्ठान शुक्ल पक्ष के किसी भी मंगलवार से आरम्भ करें.

पाठ संध्या को प्रदोषकाल के समय करे.

इससे सभी मनोकामना पूर्ण होती देखी गयी है, प्रतिदिन ना हो सके तो प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को अवश्य करें..

५४ पाठ पूर्ण होते ही परिणाम मिलने लगता है...

भगवान् श्री हनुमान जी आप सभी की समस्त कामना पूर्ण करें,,,ऐसी मेरी शुभकामना है..


शुभमस्तु !!!

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