जय श्री कृष्णः.श्री कृष्ण शरणं मम.श्री कृष्ण शरणं मम.चिन्ता सन्तान हन्तारो यत्पादांबुज रेणवः। स्वीयानां तान्निजार्यान प्रणमामि मुहुर्मुहुः ॥ यदनुग्रहतो जन्तुः सर्व दुःखतिगो भवेत । तमहं सर्वदा वंदे श्री मद वल्लभ नन्दनम॥ जय श्री कृष्णः

सोमवार, 18 मार्च 2013

जन्म का शुभ व अशुभ समय.....




हम जैसा कर्म करते हैं उसी के अनुरूप हमें ईश्वर सुख दु:ख देता है। 

सुख दु:ख का निर्घारण ईश्वर कुण्डली में ग्रहों स्थिति के आधार पर करता है। 

जिस व्यक्ति का जन्म शुभ समय में होता है उसे जीवन में अच्छे फल मिलते हैं और जिनका 

अशुभ समय में उसे कटु फल मिलते हैं। 

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह शुभ समय क्या है और अशुभ समय किसे कहते हैं


 अमावस्या में जन्म:.......

ज्योतिष शास्त्र में अमावस्या को दर्श के नाम से भी जाना जाता है। 

इस तिथि में जन्म माता पिता की आर्थिक स्थिति पर बुरा प्रभाव डालता है। 

जो व्यक्ति अमावस्या तिथि में जन्म लेते हैं उन्हें जीवन में आर्थिक तंगी का सामना करना होता है। 

इन्हें यश और मान सम्मान पाने के लिए काफी प्रयास करना होता है। 

अमावस्या तिथि में भी जिस व्यक्ति का जन्म पूर्ण चन्द्र रहित अमावस्या में होता है वह अधिक 

अशुभ माना जाता है। 

इस अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए घी का छाया पात्र दान करना चाहिए, रूद्राभिषेक और सूर्य 

एवं चन्द्र की शांति कराने से भी इस तिथि में जन्म के अशुभ प्रभाव को कम किया जा सकता है।

संक्रान्ति में जन्म:.....

संक्रान्ति के समय भी संतान का जन्म अशुभ माना जाता है। 

इस समय जिस बालक का जन्म होता है उनके लिए शुभ स्थिति नहीं रहती है। 

संक्रान्ति के भी कई प्रकार होते हैं जैसे रविवार के संक्रान्ति को होरा कहते हैं

सोमवार को ध्वांक्षीमंगलवार को महोदरी, बुधवार को मन्दा, गुरूवार को मन्दाकिनी

शुक्रवार को मिश्रा व शनिवार की संक्रान्ति राक्षसी कहलाती है। 

अलग अलग संक्रान्ति में जन्म का प्रभाव भी अलग होता है। 

जिस व्यक्ति का जन्म संक्रान्ति तिथि को हुआ है... 

उन्हें ब्राह्मणों को गाय और स्वर्ण का दान देना चाहिए इससे अशुभ प्रभाव में कमी आती है। 

रूद्राभिषेक एवं छाया पात्र दान से भी संक्रान्ति काल में जन्म का अशुभ प्रभाव कम होता है।



भद्रा काल में जन्म.......

जिस व्यक्ति का जन्म भद्रा में होता है.... 

उनके जीवन में परेशानी और कठिनाईयां एक के बाद एक आती रहती है। 

जीवन में खुशहाली और परेशानी से बचने के लिए इस तिथि के जातक को सूर्य सूक्त, पुरूष सूक्त

रूद्राभिषेक करना चाहिए। 

पीपल वृक्ष की पूजा एवं शान्ति पाठ करने से भी इनकी स्थिति में सुधार होता है।

कृष्ण चतुर्दशी में जन्म.......

पाराशर ऋषि  जी कृष्ण चतुर्दशी तिथि को छ: भागों में बांट कर उस काल में जन्म लेने वाले 

व्यक्ति के विषय में अलग अलग फल बताते हैं। 

इसके अनुसार प्रथम भाग में जन्म शुभ होता है.. 

परंतु दूसरे भाग में जन्म लेने पर पिता के लिए अशुभ होता है

तृतीय भाग में जन्म होने पर मां को अशुभता का परिणाम भुगतना होता है

चौथे भाग में जन्म होने पर मामा पर संकट आता है

पांचवें भाग में जन्म लेने पर वंश के लिए अशुभ होता है 

एवं छठे भाग में जन्म लेने पर धन एवं स्वयं के लिए अहितकारी होता है। 

कृष्ण चतुर्दशी में संतान जन्म होने पर अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए 

माता पिता और जातक का अभिषेक करना चाहिए साथ ही 

ब्राह्मण भोजन एवं छाया पात्र दान देना चाहिए।

समान जन्म नक्षत्र.......

ज्योतिषशास्त्र के नियमानुसार अगर परिवार में पिता और पुत्र का

माता और पुत्री का अथवा दो भाई और दो बहनों का जन्म नक्षत्र एक होता है 

तब दोनो में जिनकी कुण्डली में ग्रहों की स्थिति कमज़ोर रहती है 

उन्हें जीवन में अत्यंत कष्ट का सामना करना होता है। 

इस स्थिति में नवग्रह पूजन, नक्षत्र देवता की पूजा

ब्राह्मणों को भोजन एवं दान देने से अशुभ प्रभाव में कमी आती है।

सूर्य और चन्द्र ग्रहण में जन्म.......

सूर्य और चन्द्र ग्रहण को शास्त्रों में अशुभ समय कहा गया है। इस समय जिस व्यक्ति का जन्म होता है उन्हें शारीरिक और मानसिक कष्ट का सामना करना होता है। इन्हें अर्थिक परेशानियों का सामना करना होता है। सूर्य ग्रहण में जन्म लेने वाले के लिए मृत्यु की संभवना भी रहती है। इस दोष के निवारण के लिए नक्षत्र स्वामी की पूजा करनी चाहिए। सूर्य व चन्द्र ग्रहण में जन्म दोष की शांति के लिए सूर्य, चन्द्र और राहु की पूजा भी कल्यणकारी होती है।

सर्पशीर्ष में जन्म........

अमावस्या तिथि में जब अनुराधा नक्षत्र का तृतीय व चतुर्थ चरण होता है तो सर्पशीर्ष कहलाता है। सार्पशीर्ष को अशुभ समय माना जाता है। इसमें कोई भी शुभ काम नहीं होता है। सार्पशीर्ष मे शिशु का जन्म दोष पूर्ण माना जाता है। जो शिशु इसमें जन्म लेता है उन्हें इस योग का अशुभ प्रभाव भोगना होता है। इस योग में शिशु का जन्म होने पर रूद्राभिषेक कराना चाहिए और ब्रह्मणों को भोजन एवं दान देना चाहिए इससे दोष के प्रभाव में कमी आती है।

गण्डान्त योग में जन्म.........

गण्डान्त योग को संतान जन्म के लिए अशुभ समय कहा गया है। इस समय संतान जन्म लेती है तो गण्डान्त शान्ति कराने के बाद ही पिता को शिशु का मुख देखना चाहिए। पराशर महोदय के अनुसार तिथि गण्ड में बैल का दान, नक्षत्र गण्ड में गाय का दान और लग्न गण्ड में स्वर्ण का दान करने से दोष मिटता है। संतान का जन्म अगर गण्डान्त पूर्व में हुआ है तो पिता और शिशु का अभिषेक करने से और गण्डान्त के अतिम भाग में जन्म लेने पर माता एवं शिशु का अभिषेक कराने से दोष कटता है।






त्रिखल दोष में जन्म............
जब तीन पुत्री के बाद पुत्र का जन्म होता है अथवा तीन पुत्र के बाद पुत्री का जन्म होता है तब त्रिखल दोष लगता है। इस दोष में माता पक्ष और पिता पक्ष दोनों को अशुभता का परिणाम भुगतना पड़ता है। इस दोष के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए माता पिता को दोष शांति का उपाय करना चाहिए।


मूल में जन्म दोष............
  मूल नक्षत्र (Moola nakshatra) में जन्म अत्यंत अशुभ माना जाता है। मूल के प्रथम चरण में पिता को दोष लगता है, दूसरे चरण में माता को, तीसरे चरण में धन और अर्थ का नुकसान होता है। इस नक्षत्र में जन्म लेने पर 1 वर्ष के अंदर पिता की, 2 वर्ष के अंदर माता की मृत्यु हो सकती है। 3 वर्ष के अंदर धन की हानि होती है। इस नक्षत्र में जन्म लेने पर 1वर्ष के अंदर जातक की भी मृत्यु की संभावना रहती है। इस अशुभ स्थित का उपाय यह है कि मास या वर्ष के भीतर जब भी मूल नक्षत्र  (Mool nakshatra) पड़े मूल शान्ति करा देनी चाहिए। अपवाद स्वरूप मूल का चौथ चरण जन्म लेने वाले व्यक्ति के स्वयं के लिए शुभ होता है।

अन्य दोष

ज्योतिषशास्त्र में इन दोषों के अलावा कई अन्य योग और हैं जिनमें जन्म होने पर अशुभ माना जाता है इनमें से कुछ हैं यमघण्ट योग, वैधृति या व्यतिपात योग एव दग्धादि योग हें। इन योगों में अगर जन्म होता है तो इसकी शांति अवश्य करानी चाहिए।

शुभमस्तु !!



6 टिप्‍पणियां:

  1. kya aap vistaar purwak danik puja kese ki jati hai uske baare me jankri de sakte hai
    kon se mantra
    kis cheej ke baad kya karna hai
    step by step
    kon se aarti
    hawan
    sankh
    jal
    bhog
    tilak
    mala
    fuul
    etcccc

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. इस विषय में शीघ्र ही लिखने वाला हूँ.....आपका धन्यवाद.

      हटाएं
  2. sharma ji hamari beti ki dob 22 .02 2005 me t. 12:05 am me shahjahanpur up me hua tha uske jivan k liYE mdn asant rahta aap apne gyan k khajane se is k jivan prakas dalane ki pripa kare my mail id ram.jagran24@gmail.com

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. आपकी बेटी का जन्म मकर लग्न में हुआ है और जन्म राशि तुला है तथा वर्तमान में शनि की साडेसाती चल रही है इसके हाथ से शनि का दान करवाते रहें आपको भी लाभ मिलेगा बेटी भाग्यशाली है इसकी विद्या बहुत अच्छी है माता - पिता के लिए शुभ है

      हटाएं
  3. sharma ji aap ka bahut 2 dhanyavad aap ne hamari chnta kam kar di

    उत्तर देंहटाएं

कृपया अपने प्रश्न / comments नीचे दिए गए लिंक को क्लिक कर के लिखें

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails

लिखिए अपनी भाषा में