जय श्री कृष्णः.श्री कृष्ण शरणं मम.श्री कृष्ण शरणं मम.चिन्ता सन्तान हन्तारो यत्पादांबुज रेणवः। स्वीयानां तान्निजार्यान प्रणमामि मुहुर्मुहुः ॥ यदनुग्रहतो जन्तुः सर्व दुःखतिगो भवेत । तमहं सर्वदा वंदे श्री मद वल्लभ नन्दनम॥ जय श्री कृष्णः

शनिवार, 23 मार्च 2013

पंचक- शुभ या अशुभ.......



प्रायः आपने अपने घर में या फिर पास - पड़ोस में अपने बड़ों - बुजुर्गो से सुना होगा कि अमुक कार्य को आज संपन्न मत करो. यह पंचक काल है, यह अशुभ समय है, इसमें कार्य प्रारम्भ किया तो सफलता प्राप्त नही होगी अथवा इस कार्य को पुनः पांच बार संपन्न करना पड़ेगा ऐसा हम प्रायः सुनते आये है लेकिन क्या आप जानते है कि पंचक क्या है ? इस पंचक काल को इतना अशुभ क्यों मानते है ?

भारतीय ज्योतिष अनुसार जब चन्द्रमा, कुम्भ और मीन राशि पर रहता है तब उस समय काल को पंचक कहते है. अर्थात धनिष्ठा नक्षत्र से रेवती नक्षत्र तक जो पांच नक्षत्र (धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद, एवं रेवती) होते है. उन्हें पंचक के रूप में जाना जाता है. ऋषि - मुनियों ने इन नक्षत्रो को अशुभ माना है 

इन नक्षत्रों के स्वभाव के अनुसार कोई भी किया हुआ कार्य पांच बार होता है. इसलिए पंचक में कुछ कार्यों को करना अशुभ माना गया है....


पंचक में किन नक्षत्रों का प्रभाव पड़ता है और किन पांच कार्यों को करना अशुभ माना गया है उसकी जानकारी निम्न है...

धनिष्ठा नक्षत्र में अग्नि का भय रहता है...

शतभिषा नक्षत्र में कलह होने के योग बनते है ....

पूर्वा भाद्रपद रोग कारक नक्षत्र होता है....

उत्तरा भाद्रपद में धन के रूप में दण्ड होता है....

रेवती नक्षत्र में धन हानि की संभावना होती है....

पंचक में ना करने वाले पांच कार्य :....

१:- धनिष्ठा नक्षत्र में घास लकड़ी आदि ईंधन इकट्ठा नही करना चाहिए, इससे अग्नि का भय रहता है.

२:- पंचक में दक्षिण दिशा में यात्रा नही करनी चाहिए, क्योंकि दक्षिण दिशा, यम की दिशा मानी गयी है. इन नक्षत्रों में दक्षिण दिशा की यात्रा करना हानिकारक माना गया है.

३:- रेवती नक्षत्र में घर की छत डालना धन हानि और क्लेश कराने वाला होता है. 

४:- चारपाई या फोल्डिंग या किसी भी रूप में बैड नही बनाना चाहियें..

५:- पंचक में शव का अंतिम संस्कार नही करना चाहिए. ऐसा माना जाता है कि पंचक में शव का अंतिम संस्कार करने से उस कुटुंब में पांच मृत्यु और हो जाती है, 

(यदि परिस्थिति वश किसी व्यक्ति की मृत्यु पंचक काल में हो जाती है तो शव के साथ पांच अन्य पुतले आटे के या कुशा से बनाकर अर्थी के पास रखें या ऊपर रखें और इन पाँचों का भी पूर्ण विधि - विधान से अंतिम संस्कार करें.तो परिवार में बाद में और मृत्यु नही होती एवं पंचक दोष समाप्त हो जाता है.)

पंचक निषेध काल.....

मुहूर्त ग्रंथो के अनुसार विवाह का मुहूर्त निर्णय करते समय अथवा मुंडन का मुहूर्त निकालते समय पंचक का विचार किया जाता है. इसी प्रकार ग्रहारंभ, गृह प्रवेश तथा उपनयन आदि में भी इस समय का विचार नही किया जाता है.

इसके अलावा रक्षाबंधन, भैयादूज आदि पर्वो में भी पंचक नक्षत्रो का निषेध के बारे में नही सोचा जाता है.

इस पंचक काल में शुभ/अशुभ कार्यों को प्रायः संपन्न नही किया जाता है, अतः आप भी इस समय काल को ध्यान में रख कर ही विशेष कार्यों के लिए निर्णय लें. कहीं ऐसा ना हो कि आपको एक ही कार्य को बार बार करना पड़ें, मतलब पांच बार करना पड़ें, तब कहीं जाकर सफलता मिलें..


शुभमस्तु !!


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