जय श्री कृष्णः.श्री कृष्ण शरणं मम.श्री कृष्ण शरणं मम.चिन्ता सन्तान हन्तारो यत्पादांबुज रेणवः। स्वीयानां तान्निजार्यान प्रणमामि मुहुर्मुहुः ॥ यदनुग्रहतो जन्तुः सर्व दुःखतिगो भवेत । तमहं सर्वदा वंदे श्री मद वल्लभ नन्दनम॥ जय श्री कृष्णः

बुधवार, 6 मार्च 2013

अटैच बाथरूम है वास्तु शास्त्र के विपरीत....



आज कल घरों में बाथरूम और टॉयलेट एक साथ होना आम बात है लेकिन वास्तुशास्त्र के नियम के 

अनुसार इससे घर में वास्तुदोष उत्पन्न होता है। 

इस दोष के कारण घर में रहने वालों को कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। 

पति-पत्नी एवं परिवार के अन्य सदस्यों के बीच अक्सर मनमुटाव एवं वाद-विवाद की स्थिति बनी रहती है।


वास्तु शास्त्र के प्रमुख ग्रंथ विश्वकर्मा प्रकाश में बताया गया है कि पूर्वम स्नान मंदिरम अर्थात भवन के पूर्व दिशा में स्नानगृह होना चाहिए। 

शौचालय की दिशा के विषय में विश्वकर्मा कहते हैं या नैऋत्य मध्ये पुरीष त्याग मंदिरम अर्थात दक्षिण और नैऋत्य (दक्षिण-पश्चिम) दिशा के मध्य में पुरीष यानी मल त्याग का स्थान होना चाहिए। 

बाथरूम और टॉयलेट एक दिशा में होने पर वास्तु का यह नियम भंग होता है। 




वास्तुशास्त्र के अनुसार स्नानगृह में चंद्रमा का वास है तथा शौचालय में राहू का। 

यदि किसी घर में स्नानगृह और शौचालय एक साथ हैं तो.... 

चंद्रमा और राहू एक साथ होने से चंद्रमा को राहू से ग्रहण लग जाता है

जिससे चंद्रमा दोषपूर्ण हो जाता है। 

चंद्रमा के दूषित होते ही कई प्रकार के दोष उत्पन्न होने लगते हैं। चंद्रमा मन और जल का कारक है 

और राहु विष का। इस युति से जल विष युक्त हो जाता है। 

जिसका प्रभाव पहले तो व्यक्ति के मन पर पड़ता है और दूसरा उसके शरीर पर।


शास्त्रों में चन्द्रमा को सोम अर्थात अमृत कहा गया है और राहु का विष। अमृत और विष एक साथ होना उसी प्रकार है जैसे अग्नि और जल। दोनों ही विपरीत तत्व हैं। 

इसलिए बाथरूम और टॉयलेट एक साथ होने पर परिवार में अलगाव होता है। 

लोगों में सहनशीलता की कमी आती है। मन में एक दूसरे के प्रति द्वेष की भावना बढ़ती है।

शुभमस्तु !!


2 टिप्‍पणियां:

कृपया अपने प्रश्न / comments नीचे दिए गए लिंक को क्लिक कर के लिखें

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails

लिखिए अपनी भाषा में