जय श्री कृष्णः.श्री कृष्ण शरणं मम.श्री कृष्ण शरणं मम.चिन्ता सन्तान हन्तारो यत्पादांबुज रेणवः। स्वीयानां तान्निजार्यान प्रणमामि मुहुर्मुहुः ॥ यदनुग्रहतो जन्तुः सर्व दुःखतिगो भवेत । तमहं सर्वदा वंदे श्री मद वल्लभ नन्दनम॥ जय श्री कृष्णः

शनिवार, 27 अप्रैल 2013

चार रत्नों से समस्याएं दूर करें.....




ज्योतिषशास्त्र में कहा गया है कि जो भी मिलता है वह भाग्य का फल होता है। भाग्य अगर अनुकूल है तो, जो भी चाहेंगे आसानी से मिल जाएगा। लेकिन भाग्य का स्वामी शुभ स्थिति में नहीं है तो लाख प्रयास करने के बाद भी निराशा ही हाथ लगती है। ज्योतिषशास्त्र आपके भाग्य को मजबूत बनाने के उपाय भी बताता है। जो भी ग्रह अनुकूल फल नहीं दे रहे हैं, उनके रत्न को उस ग्रह से संबंधित उंगली में पहन लीजिए तो किस्मत के दरवाजे पर लगा ताला खुल जाएगा और कामयाबी कदम चूमेगी। 


भाग्य को मजबूत बनाना के लिए चार चीजों की जरूरत है बुद्धि, परिश्रम, आत्मविश्वास और ईश्वर का आशीर्वाद। ये चार चीजें जिन्हें मिल जाती हैं उन्हें कामयाब होने से कोई रोक नहीं सकता। इन चार चीजों के लिए ज्योतिषशास्त्र में चार रत्नों का जिक्र किया गया है। 


बुद्धि का स्वामी बुध है और इसका रत्न है पन्ना। बुद्धि सही दिशा में लगाने के लिए बुध को मजबूत और शुभ बनाना चाहिए। इसके लिए पन्ना धारण करना उत्तम होता है। पन्ना हरे रंग का होता है। इसे कनिष्ठा यानी छोटी उंगली में धारण करना चाहिए। क्योंकि इस उंगली के अंतिम पोर से सटा हुआ बुध पर्वत होता है। लेखन, पत्रकारिता, वाणी से संबंधित कार्यों से जुड़े लोगों को यह रत्न कार्य क्षेत्र में उन्नति दिलाने में सहायक होता है। 


बुद्धि के साथ ही व्यक्ति में परिश्रम करने की भी क्षमता होनी चाहिए। यह क्षमता व्यक्ति में शनि के प्रभाव से आती है। हस्त ज्योतिष के अनुसार शनि ही भाग्य का आधार है। शनि पर्वत उन्नत हो और इस पर हथेली के अंतिम छोर से कोई रेखा चलकर आती है तो व्यक्ति बहुत ही भाग्यशाली होता है। ऐसा व्यक्ति इसलिए भाग्यशाली माना जाता है क्योंकि यह संघर्षशील और परिश्रमी होता है। शनि को शुभ बनाने के लिए मध्यमा उंगली में नीलम अथवा काले घोड़े के नाल का छल्ला पहनना चाहिए। 


कामयाबी के लिए आत्मविश्वास भी बहुत जरूरी है जो सूर्य से मिलता है। सूर्य को पिता एवं कार्य क्षेत्र में अधिकारी का कारक माना जाता है। बचपन में पिता और कार्य क्षेत्र में अधिकारी से अनुकूल सहयोग नहीं मिले तो व्यक्ति को सफलता पाने के लिए कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसलिए सूर्य को मजबूत होना जरूरी है। 
ज्योतिषशास्त्र में सूर्य को ग्रहों का राजा कहा गया है। यानी अकेला सूर्य अगर उत्तम स्थिति में हो तो अन्य ग्रहों के अशुभ प्रभाव को कम कर देता है। सूर्य को मजबूत बनाने के लिए माणिक्य रत्न धारण करना चाहिए। सूर्य का स्थान हाथ में अनामिका उंगली के अंतिम पोर पर होता है इसलिए यह रत्न अनामिका उंगली में धारण करना चाहिए

गुरू धन का कारक ग्रह हैं। गुरू मजबूत होने पर धन संबंधी परेशानियों में कमी आती है। सूर्य नाम और यश दिला भी दे, बुध बुद्धिमान बना दे लेकिन व्यक्ति के पास धन नहीं है तो सब कुछ होते हुए भी वह भाग्यहीन ही कहा जाता है। गुरू को मजबूत और शुभ फलदायी बनाने के लिए इंडेक्स फिंगर यानी तर्जनी उंगली में पुखराज धारण करना चाहिए। 

इस रत्न को धारण करने से व्यक्ति में ईश्वर के प्रति श्रद्धा बढ़ती है और वह ग़लत काम से दूर रहता है। ऐसे व्यक्ति पर ईश्वर की कृपा बनी रहती है और धन संबंधी परेशानियों में कमी आती है।


रत्न कैसे काम करता है.....

जिस ग्रह का रत्न व्यक्ति धारण करता है वह रत्न संबंधित ग्रह की उर्जा को अवशोषित करता है और शरीर में पहुंचाता है। इससे शरीर में मौजूद उस ग्रह से संबंधित कमियां दूर होती है और व्यक्ति उस ग्रह से संबंधित उर्जा का लाभ प्राप्त कर पाता है। 


शुभमस्तु !!!

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