जय श्री कृष्णः.श्री कृष्ण शरणं मम.श्री कृष्ण शरणं मम.चिन्ता सन्तान हन्तारो यत्पादांबुज रेणवः। स्वीयानां तान्निजार्यान प्रणमामि मुहुर्मुहुः ॥ यदनुग्रहतो जन्तुः सर्व दुःखतिगो भवेत । तमहं सर्वदा वंदे श्री मद वल्लभ नन्दनम॥ जय श्री कृष्णः

शुक्रवार, 17 मई 2013

रत्नों द्वारा भाग्य चमकाएं.......




कहते हैं कि घूरे के दिन भी बदलते हैं तो इंसान के क्यों‍ नहीं। कहावत सच तो है लेकिन लंबा इंतजार करने से अच्छा है यदि आपकी कुंडली सही है तो रत्न धारण करने से अच्छी सफलता मिल सकती है। लेकिन रत्न धारण करने से पहले किसी पारंगत ज्योतिषी से सलाह लेना आवश्यक है। 

आजकल कई ज्योतिषी राशि के अनुसार रत्न पहना देते हैं जो कभी-कभी नुकसानदायक भी हो सकता है। आप इस राशि के हैं तो यह रत्न पहन लीजिए। ऐसा कहकर वे रत्न पहना देते हैं। जबकि राशि के साथ ही राशि स्वामी ‍की स्थिति उसके बैठने का स्थान आदि भी बहुत महत्व रखते हैं। जातक को क्या आवश्यकता है, इस बात का ध्यान नहीं रखते। 


रत्न पहनाने के ‍पहले उस ग्रह की नवांश व अन्य वर्गों में क्या स्थिति है, उसकी डिग्री क्या है? यह देखना जरूरी है। तभी जाकर सही रत्न पहनकर भरपूर लाभ उठाया जा सकता है।

कहते हैं कि घूरे के दिन भी बदलते हैं तो इंसान के क्यों‍ नहीं। कहावत सच तो है लेकिन लंबा इंतजार करने से अच्छा है यदि आपकी कुंडली सही है तो रत्न धारण करने से अच्छी सफलता मिल सकती है।      

आपकी जन्म पत्रिका में लग्नेश मित्र राशि में हो या भाग्य में मित्र का होकर बैठा हो या पंचम में स्वराशि का हो या मित्र राशि का हो। चतुर्थ भाव में मित्र का हो या उच्च का हो तब उससे संबंधित रत्न धारण करने से अच्छे परिणाम मिलते हैं। 

भाग्य नवम भाव का स्वामी नवम में हो या स्वराशि का होकर बैठा हो या मित्र राशि का होकर लग्न, चतुर्थ, पंचम, तृतीय, दशम या एकादश में हो या उच्च का होकर द्वादश में हो तो उससे संबंधित रत्न पहनकर अच्छा लाभ उठाया जा सकता है। विद्या, संतान भाव को प्रबल करना हो तो उस भाव का स्वामी नवम में होकर मित्र राशि का हो तो उस भाव के स्वामी का रत्न व पंचम भाव का रत्न नवम भाव से संबंधित रत्न जिस उँगली में पहनते हों तो उसमें पहनने से संतान का भाग्य, विद्या दोनों बढ़ते हैं और मनोरंजन के साधनों में वृद्धि होती है। 

मान-प्रतिष्ठा बढ़ती है। चतुर्थ भाव का रत्न भी पहनकर माता, भूमि, भवन, जनता से संबंधित कार्यों में लाभ उठाया जा सकता है। ध्यान देने वाली बात यह है कि नवांश में नीच का न हो, नहीं तो लाभ के बजाए नुकसान ही होता है। इसी प्रकार पंचमेश विद्या विचार शुभ हो तो उस रत्न से अच्छा लाभ मिल सकता है। यदि जो रत्न पहना जाए उसकी महादशा का या अंतर्दशा चर ही हो तो अच्छे परिणाम मिलते हैं। 



रत्न पहनने से पहले शुभ मुहूर्त में ही रत्न बनवाना चाहिए और प्राण-प्रतिष्ठा कर पहनना चाहिए। फिर देखिए कैसे नहीं रत्न तकदीर बदलने में कामयाब होता है।

शुभमस्तु !!



8 टिप्‍पणियां:

  1. pandit ji mera nam ram mishra janam hardoi up india me 25 march 1980 21:30 me hua tha dainik news pepar me reporter hai safalta nahi mil rahi hai kya kare hamane tarjani me gold rig aur madhayama me chadi me gomed pahan rakha hai kahi ye badhak to nahi jivan me marag darshan ka abhav hai aap k hamare jivan me sahayak ho

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. जन्म कुंडली के अनुसार गोमेद का अभी कोई प्रयोजन नही है इसे उतार दें यह लाभ देने की जगह बाधा उत्पन्न कर रहा है आपको केतु की महादशा चल रही है केतु आपकी कुंडली में भाग्येश बुध के साथ पंचम भाव में स्थित है इसलिए रोजगार और भाग्य का पूर्ण फल नही मिल रहा है अतः पन्ना रत्न धारण कर सकते है और प्रतिदिन शाम को सूर्यास्त के बाद कुत्ते को रोटी खिलाएं तथा श्री हनुमान चालीसा का पाठ प्रतिदिन रात्री के समय मिटटी के दिए में सरसों का तेल का दीपक लगाकर परेन तो भाग्य उज्जवल होगा

      हटाएं
    2. sir ji pranaw kya gomet hamari kumdali kal sarf yog ko kam karne me sahayak hoga ya nahi dob 25 march 1980 hardoi 21:30

      हटाएं
    3. केवल काल सर्प की पूजा ही होगी गोमेद से शुभ फल नही मिलेगा

      हटाएं
  2. Dob:5 march 1991
    time:subah 9:30 baje
    place:thane maharastra
    mene middle finger me nilam aur last finger me panna pehna tha lagbhag 1 saal tak par ab nahi pehenta me .... Par kya ab me nilam dharan kar sakta hu anil ji ....???? Isse mere jivan par kya asar padega plz bataiega .....

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. मेष लग्न में शनि बाधक ग्रह है आप नीलम कभी नही पहन सकते और बुध भी छठे भाव का स्वामी है अतः पन्ना भी नही धारण कर सकते है आप जन्मकुंडली के अनुसार पुखराज, मूंगा और माणिक्य रत्न ही धारण कर लाभ उठा सकते है

      हटाएं
  3. sir ji dob 21 02 2004 11:05 shahjahanpur up kya is kundali me shani budh ka sastayan yog banta hai jivan par kya yogdan hoga thank

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. नही बनता ..यह तो शुभ योग है एक दुसरे की राशि परिवर्तन का योग है शनि ..बुध की राशि में है और बुध..शनि की राशि में है

      हटाएं

कृपया अपने प्रश्न / comments नीचे दिए गए लिंक को क्लिक कर के लिखें

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails

लिखिए अपनी भाषा में