जय श्री कृष्णः.श्री कृष्ण शरणं मम.श्री कृष्ण शरणं मम.चिन्ता सन्तान हन्तारो यत्पादांबुज रेणवः। स्वीयानां तान्निजार्यान प्रणमामि मुहुर्मुहुः ॥ यदनुग्रहतो जन्तुः सर्व दुःखतिगो भवेत । तमहं सर्वदा वंदे श्री मद वल्लभ नन्दनम॥ जय श्री कृष्णः

सोमवार, 20 मई 2013

दरवाजे की ओर पैर कर सोना...अपशकुन.....



अच्छे और स्वस्थ जीवन के लिए जरूरी है चैन की नींद। नींद का संबंध न केवल हमारे स्वास्थ्य है बल्कि इसका प्रभाव घर की आर्थिक और धार्मिक स्थिति पर भी पड़ता है। इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए शास्त्रों में कई प्रकार के नियम बताए गए हैं। इन नियमों का पालन करना अतिअनिवार्य है अन्यथा कोई भयंकर परिणाम तक झेलना पड़ सकताहै।


गलत दिशा में सोना कई प्रकार से अशुभ है। पूर्व में जीवनमंत्र पर बताया गया है कि हमें दक्षिण या पूर्व दिशा की ओर सिर रखकर सोना चाहिए। इस संबंध में धार्मिक, वैज्ञानिक प्रभाव भी बताए गए हैं। इसके साथ ही एक बात और ध्यान रखना चाहिए कि सोते समय हमारे पैर दरवाजे के सामने न हो। ऐसे सोना शास्त्रों के अनुसार अच्छा नहीं माना जाता है।

विद्वानों के अनुसार दरवाजे की ओर पैर करके सोना मृत्यु का सूचक माना जाता है। किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके मृत शरीर को इसी अवस्था में रखा जाता है। अत: इस प्रकार जीवित व्यक्ति नहीं सोना चाहिए। दरवाजे की ओर पैर रखकर केवल मृत शरीर को रखा जाता है। जीवित के लिए यह स्थिति अत्यधिक हानिकारक है। इसलिए इस अवस्था में न सोएं।


ऐसे सोने पर घर के वातावरण में नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव बढऩे लगता है। जिससे परिवार के सदस्यों को मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है। आर्थिक कार्यों में भी नुकसान की संभावनाएं निर्मित होती हैं।

वास्तु विज्ञान में हर क्रिया के लिए अलग-अलग दिशा और स्थान का वर्णन किया गया है। इन्हीं नियमों में एक है कि व्यक्ति को कभी मुख्य दरवाजे की ओर पैर करके नहीं सोना चाहिए। इस तरह से सोना अपशकुन भी माना जाता है। इसलिए अगर आप घर के मुख्य दरवाजे की ओर पैर रखकर सोते हैं तो अपने सोने के तरीके को बदलिए। 

वास्तु विज्ञान के अनुसार मुख्य दरवाजे की ओर पैर का होना घर से बाहर निकलने का संकेत होता है। इस प्रकार से बाहर की ओर पांव करके मृत्यु के बाद ही व्यक्ति को लिटाया जाता है। इस दिशा में सोने से आयु कम होती है और व्यक्ति का स्वास्थ्य प्रभावित होता है। सोने के लिए सबसे अच्छी दिशा पूर्व और उत्तर को माना गया है। 

पूर्व दिशा की ओर मुंह करके सोने से शरीर उर्जावान और स्वस्थ्य रहता है। वास्तु विज्ञान में पूर्व और उत्तर पूर्व दिशा को उर्जा का केन्द्र माना गया है। इसे स्वर्ग की दिशा भी कहते हैं। इस दिशा की ओर मुंह करके सोने से शरीर में सकारात्मक उर्जा का संचार होता है और मानसिक तनाव में कमी आती है। लेकिन सूर्योदय की दिशा होने के कारण इस दिशा में मुंह करके सोने वाले व्यक्ति को सूर्योदय से पूर्व उठना चाहिए। अन्यथा सूर्योदय के समय आपका पांव सूर्य की ओर होगा। जिससे सूर्य देवता का अपमान होगा। 

शास्त्रों का मत है कि उत्तर दिशा कुबेर की दिशा है। इस दिशा की ओर मुंह करके सोने से उठते समय मुंह उत्तर की ओर होगा जिससे कुबेर की कृपा प्राप्त होगी। वहीं विज्ञान के अनुसार पृथ्वी के दोनों सिरों उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव के बीच चुम्बकीय प्रवाह होता है। उत्तरी ध्रुव चुम्बक के पोजिटिव और दक्षिणी ध्रुव निगेटिव पोल की तरह काम करते हैं। हमारा सिर पोजेटिव और पैर निगेटिव एनर्जी प्रवाहित करता हैं।

सोते समय उत्तर की ओर मुंह करके सोने से सिरहाना दक्षिण की ओर होता है। इससे हमारा सिर वातावरण की निगेटिव एनर्जी को अट्रैक्ट करता है और पैर पॉजेटिव एनर्जी को अपनी ओर खींचता है। जिससे सोते समय मन में उथल-पुथल नहीं मचती है और अच्छी नींद आती है। जबकि इसके विपरीत उत्तर दिशा की ओर दिशा करके सोने से मन में हलचल मची रहती है और अच्छी नींद नहीं आती है। सुबह उठने पर सिर भारी लगता है। जिससे कार्य क्षमता प्रभावित होती है।

शुभमस्तु !!







2 टिप्‍पणियां:

  1. Pt ji agar kisi ki dob or tob na pata ho toh uske bate msi agar koi jyotish sambandhi jankari laina chahe gph kaise la sakte hai kripya margdarshan karein.. ppoonam

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    1. वह अपने निकट के किसी विद्वान पंडित जी से प्रश्न लग्न द्वारा अपनी समस्याओं का समाधान कर सकते है

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