जय श्री कृष्णः.श्री कृष्ण शरणं मम.श्री कृष्ण शरणं मम.चिन्ता सन्तान हन्तारो यत्पादांबुज रेणवः। स्वीयानां तान्निजार्यान प्रणमामि मुहुर्मुहुः ॥ यदनुग्रहतो जन्तुः सर्व दुःखतिगो भवेत । तमहं सर्वदा वंदे श्री मद वल्लभ नन्दनम॥ जय श्री कृष्णः

शनिवार, 1 जून 2013

रुद्राक्ष का चमत्कार.....2





 प्राचीन पांडुलिपि ‘‘रुद्राक्ष कल्प’’ में भी 108 मुखी रुद्राक्ष का वर्णन आता है। जन्मकुंडली देख कर ही यह निश्चय किया जाता है कि जातक को कितने मुखी रुद्राक्ष पहनना चाहिये। विभिन्न मुखी रुद्राक्षों का वर्णन इस प्रकार है
 
1 मुखी - एक मुखी रुद्राक्ष तो भगवान शंकर का ही स्वरूप माना जाता है। यह रुद्राक्ष सूर्य से संबंधित हैं और सूर्य के अशुभ प्रभाव जैसे आत्मविश्वास की कमी, निस्तेज चेहरा, दब्बूपना आदि को ठीक करता हैं और सूर्य द्वारा दिये जाने वाले रोगों को ठीक कर सकते है जैसे दायीं आंख के रोग, सिर दर्द, कान के रोग, हडिडयों की कमजोरी आदि। साथ ही समृद्धि, शक्ति व नेतृत्वक्षमता भी देता है। यह धारक को उच्च पद, आदर व सम्मान दिलवाता है। जिस घर में एक मुखी रुद्राक्ष होता है, उस घर में सदा लक्ष्मी का वास होता है,शत्रु स्वयं ही परास्त हो जाते हैं.

2 मुखी - दो मुखी रुद्राक्ष शिव-शक्ति का स्वरूप है। यह चंद्रमा से संबंधित है और चंद्रमा के अशुभ प्रभाव को कम करता है। चंद्रमा द्वारा दिये जाने वाले रोग जैसे बांयीं आंख के रोग, किडनी का रोग, आंत के रोग  को ठीक करता है। साथ ही आपसी संबंधों में आई कड़वाहट को भी दूर करता है और मानसिक शक्ति बढाता है। जो व्यक्ति गौरी शंकर रुद्राक्ष धारण नहीं कर सकते, उन्हें गौरी व शंकर दोनों को प्रसन्न करने के लिये दो मुखी रुद्राक्ष ही धारण करना चाहिये। वक्ताओं, न्यायाधीशों, वकीलों, वैज्ञानिकों, अनुसंधानकर्ताओं व विद्यार्थियों के लिये यह उतम रुद्राक्ष है।

 3 मुखी - तीन मुखी रुद्राक्ष ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों का स्वरूप है। अतः इसे पहनने से त्रिदेव की प्रसन्नता मिलती है। यह मंगल से संबंधित है। मंगल द्वारा दिये जाने वाले अशुभ प्रभाव जैसे कि रक्त के रोग, उच्च रक्त चाप, षारीरिक कमजोरी, महावारी के रोग, किडनी के रोग, तनाव, नकारात्मक सोच, पापबोध आदि को ठीक करता है। दया, धर्म एवं परोपकार के विचारों को विशेष रूप से बढाता है। वात, पित्त व कफ का षरीर में उचित संतुलन रखता है। कमजोर विद्यार्थियों के लिये लाभदायक है। बार-बार बीमारियों से परेशान रहने वाले जातकों को लाभ देता है।
 
4 मुखी - यह देवी सरस्वती और ब्रह्मा का स्वरूप है। यह बुध से संबंधित है और बुध ग्रह के अशुभ प्रभावों जैसे कि दिमागी कमजोरी, कुछ भी समझने की कमी, बोल-चाल की दिक्कत, दिमाग की नसों की कमजोरी आदि से बचाता है। यह मनुष्य को धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष देने वाला रुद्राक्ष है। ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैष्य व शुद्र चारों वर्गों से पूजित है। ब्रह्मचारी, गृहस्थ, वानप्रस्थ व सन्यासी सभी इसे धारण कर सकते हैं। वेद, पुराण, संस्कृत पढने-पढ़ाने वालों को तो यह अवश्य ही धारण करना चाहिये। 

5 मुखी - पांच मुखी रुद्राक्ष परमेश्वर का स्वरूप है। यह गुरु से संबंधित है और ज्ञान, सौंदर्य, मानसिक शान्ति, धन, संतान आदि देता है। यह गुरू के अशुभ प्रभाव जैसे कि वैवाहिक जीवन में  तनाव, मोटापा, शुगर, जांघ व किडनी के रोग को ठीक करता है। यह दीर्ध आयु व अपूर्व स्वास्थ्य प्रदान करता है। टूटे दिलों को जोडता है व अचानक हमले से रक्षा करता है। 

6 मुखी - छः मुखी रुद्राक्ष स्वामी कार्तिकेय का स्वरूप है। यह शुक्र से संबंधित है और शुक्र के अशुभ प्रभाव व रोग जैसे कि प्रजनन अंगों के रोग, उच्च रक्तचाप आदि रोगों को ठीक करता है और प्रेम व संगीत आदि में रूचि जगाता है। विद्या-अध्ययन में भी उपयोगी है। धन-संपत्ति के कष्टों से मुक्ति मिलती है। काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मत्सर नामक छः दुर्गुणों को दूर करता है। 

7 मुखी - सात मुखी रुद्राक्ष लक्ष्मी का स्वरूप है। यह शनि ग्रह से संबंधित हैं और शनि के अषुभ प्रभाव जैसे कि रोग, मृत्यु, नपुंसकता, सर्दी, निराशा, अंधकार आदि को दूर करता हैं। यह सप्तकोटि मंत्रों के समतुल्य है। सप्तावरण का मोह भंग करवाता है। यह रुद्राक्ष धारण करने से सप्त द्वीप दर्शन की इच्छा होने पर यात्रा सुगम होती है। सात मुखी रुद्राक्ष से व्यापार व नौकरी में उन्नति मिलती है तथा धन-धान्य की कमी नहीं रहती। 
  
8 मुखी - आठ मुखी रुद्राक्ष गणेश जी व रूद्र का स्वरूप है। यह राहु ग्रह से संबंधित है और राहु के अशुभ प्रभावों जैसे कि फेंफड़ों के रोग, अकस्मात् होने वाली घटनायें, मोतियाबिंद, पैर, त्वचा के रोग आदि को ठीक करता है। लेखन-कला में निपुणता देता है। व्यक्ति को अंतर्मुखी होने की षक्ति देता है। 

9 मुखी - नौ मुखी रुद्राक्ष मां दुर्गा का स्वरूप है। अतः नवरात्री व्रतों का फलदाता है। नवग्रहों में से अनिष्टकारक का नाश करता है। ये केतु ग्रह से संबंधित है और केतु के अशुभ प्रभावों जैसे कि फेफड़ों के रोग, ज्वर, आंख का दर्द, त्वचा रोग, शरीर दर्द आदि को ठीक करता है व आत्मबल की वृद्धि करता है। दिल की धडकन, चलने से घबराहट पैदा होना, श्वास फूलना, हाफना आदि रोगों में लाभकारी होता है। गृहस्थी की समस्याओं को दूर करता है। 

10 मुखी - दस मुखी रुद्राक्ष विष्णु का स्वरूप है। यह सभी ग्रहों के अशुभ प्रभाव को कम करने में सक्षम है तथा जातक को एक संपूर्ण सुरक्षा का अहसास देता है। इसे प्रमुख दस अवतारों का आशीर्वाद प्राप्त है। दस इन्द्रियों द्वारा किये गये पापकर्मों का नाष करता है। राजसी कार्यों में सफलता मिलती है। दस दिशाओं में यश की वृद्धि करता है। हृदय व दिमाग को मजबूत करता है। अपरिचित व्यक्ति भी मित्र बनने लगते हैं। 

11 मुखी - ग्यारह मुखी रुद्राक्ष ग्यारहवें रूद्र का स्वरूप है। ग्यारहवें रूद्र महावीर बजरंगबली हैं। यह जातक को साहस व आत्मविश्वास देता है और जातक हिम्मत व बहादुरी से जीवन जीता है। विद्यावान, गुणी और चतुर भी बनाता है। जातक में दूसरों के मन की बात जान लेने का गुण आने लगता है। झुंझलाहट व अधीरता से मुक्ति दिलवाता है। गमगीन स्वभाव को दूर करता है। यह किसी से पूछे बिना भी धारण किया जा सकता है। 

12 मुखी - बारह मुखी रुद्राक्ष सूर्य देव का स्वरूप है। यह सूर्य ग्रह से संबंधित है। बारह मुखी रुद्राक्ष धारण करने से राजकीय कामों में सफलता मिलती है। महत्त्वाकांक्षायें ऊंची होने लगती है। यह आपसी कलह भी शांत करता है। 

13 मुखी - तेरह मुखी रुद्राक्ष इन्द्र का स्वरूप है। यह 6 मुखी रुद्राक्ष की तरह से ही काम करता है और सांसारिक सुखों की पूर्ति भी करता है। राज्य में पद प्राप्त करवाता है। उदार व सात्विक भाव उत्पन्न होते हैं। नवीन योजनाओं को सफल करने के लिये यह लाभदायक है। 

14 मुखी - चैदह मुखी रुद्राक्ष भगवान शिव त्रिपुरारी का स्वरूप माना जाता है। यह शनि ग्रह से संबंधित है। यह सभी अभिलाषायें पूर्ण करता है और मन ईश्वर  में लगाता है। मस्तिष्क की शान्ति देने वाला है, हृदय को मजबूत करता है, उच्च रक्तताप को ठीक करता है, तपेदिक दमा कैंसर जैसे रोगों में लाभदायक है। इसे पानी में घिसकर पीने से अनेक रोगों का निवारण होता है। 

गौरी शंकर रुद्राक्ष यह सर्वश्रेष्ठ रुद्राक्ष है। दो रुद्राक्ष आपस में जुड कर यह रुद्राक्ष बनाते हैं। यह शारीरिक व मानसिक शक्ति  प्रदान करता है। यह शिव के अर्धनारीश्वर रूप का प्रतीक है। यह एक मुखी व 14 मुखी दोनो रुद्राक्षों का भी फल देने वाला होता है। इसे धारण करने से दुख-दरिद्रता पास नहीं आती। मान-सम्मान में वृद्धि होती है। वातावरण षुद्ध व पवित्र बनता है।सर्दी, निराषा, अंधकार आदि को दूर करता हैं। यह सप्तकोटि मंत्रों के समतुल्य है। सप्तावरण का मोह भंग करवाता है। यह रुद्राक्ष धारण करने से सप्त द्वीप दर्शन की इच्छा होने पर यात्रा सुगम होती है। सात मुखी रुद्राक्ष से व्यापार व नौकरी में उन्नति मिलती है तथा धन-धान्य की कमी नहीं रहती। 

शेष अगले भाग में......



शुभमस्तु !!!

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